अत तव्वाब - ٱلْتَّوَّابُ
अल्लाह ﷻ नाम सर्वशक्तिमान, सारी क़ायनात बनाने वाले ख़ालिक का वो नाम है, जो कि सिर्फ उस ही के लिए है और इस नाम के अलावा भी कई और नाम अल्लाह के हैं जो हमे अल्लाह की खूबियों से वाकिफ़ करवाते हैं। अल्लाह ﷻ के ही लिए हैं खूबसूरत सिफाती नाम। इन को असमा-उल-हुस्ना कहा जाता है। ये नाम हमें अल्लाह की खूबियाँ बताते हैं। अल्लाह के खूबसूरत नामों में से एक नाम है अत तव्वाब।
अत तव्वाब इसके रुट है ت و ب जिसका मतलब है - वापस लौटना, रुजू करना, पलटना। अत तव्वाब का मतलब है बहुत ज़्यादा तौबा क़ुबूल करने वाला। यह नाम क़ुरआन में 11 मर्तबा आया है।
तौबा करना मतलब अपने गुनाहो का ऐतराफ़ करना, उन्हें दोबारा न करने का इरादा करना और अल्लाह की तरफ पलटना और माफ़ी तलब करना। लेकिन इसमें जो ख़ास मतलब है अत तव्वाब का, वो है दिशा बदलना, रुख मोड़ना, पलटना।
अल्लाह सुब्हान व तआला, अत तव्वाब है, न सिर्फ इसलिए के इंसान उसकी तरफ पलटते हैं, बल्कि अल्लाह भी इंसान की तरफ रुजू करता है, उन्हें पश्चाताप का मौका देता है और उनकी गलती माफ़ करता है।
इंसान जानबूझकर गुनाह करता है, बार बार अपनी हदें तोड़ता है, अल्लाह की नाफरमानी करता है, अल्लाह सुब्हान व तआला चाहे तो ऐसे गुनहगार और सरकश को माफ़ न करे। मगर ये अल्लाह की बेइंतेहा रहमत और शफकत है की ऐसे गुनहगार बन्दों की भी पुकार सुनता है, उनकी तौबा क़ुबूल करके उन्हें दोबारा फर्माबरदार बनने का मौका देता है।
وَإِذۡ قَالَ مُوسَىٰ لِقَوۡمِهِۦ يَٰقَوۡمِ إِنَّكُمۡ ظَلَمۡتُمۡ أَنفُسَكُم بِٱتِّخَاذِكُمُ ٱلۡعِجۡلَ فَتُوبُوٓاْ إِلَىٰ بَارِئِكُمۡ فَٱقۡتُلُوٓاْ أَنفُسَكُمۡ ذَٰلِكُمۡ خَيۡرٞ لَّكُمۡ عِندَ بَارِئِكُمۡ فَتَابَ عَلَيۡكُمۡۚ إِنَّهُۥ هُوَ ٱلتَّوَّابُ ٱلرَّحِيمُ
याद करो, जब मूसा ने अपनी क़ौम से कहा "लोगों तुमने बछड़े को अपना माबूद बनाकर अपने ऊपर बड़ा ज़ुल्म किया है, इसलिए तुम लोग अपने पैदा करने वाले के सामने तौबा करो और अपनी जानो को हलाक करो, इसी पैदा करने वाले के नज़दीक तुम्हारी भलाई है। उस वक़्त तुम्हारे पैदा करने वाले ने तुम्हारी तौबा क़ुबूल करली की वो बड़ा माफ़ करने वाला और रहम करने वाला है।
अल- क़ुरआन 2:54
अत तव्वाब, वो ज़ात है जो बार बार इंसानियत का रुख तौबा की तरफ मोड़ता है, जब जब इंसान गलत रस्ते पर चल पड़ता है। अल्लाह बहुत माफ़ करने वाला मेहरबान है और जो कोई उससे अपनी गलतियों की माफ़ी तालाब करता है और गुनाहो से तौबा करके उसकी तरफ पलटता है, तो अत तव्वाब हर बार उनकी तौबा क़ुबूल करता है और उन्हें माफ़ कर देता है और उनका मर्तबा और उनकी इज़्ज़त उन्हें लौटाता है।
أَلَمۡ يَعۡلَمُوٓاْ أَنَّ ٱللَّهَ هُوَ يَقۡبَلُ ٱلتَّوۡبَةَ عَنۡ عِبَادِهِۦ وَيَأۡخُذُ ٱلصَّدَقَٰتِ وَأَنَّ ٱللَّهَ هُوَ وَّابُ ٱلرَّحِيمُ
क्या इन लोगों को मालूम नहीं है कि वो अल्लाह ही है जो अपने बन्दों की तौबा क़बूल करता है और इनकी ख़ैरात [सदक़े] को क़बूल करता है, और ये कि अल्लाह बहुत माफ़ करनेवाला और रहम करनेवाला है?
अल क़ुरआन 9:104
रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया: "मैं अहले-जन्नत में सब के बाद जन्नत में जाने वाले और अहले-दोज़ख़ में सबसे आख़िर में उससे निकलने वाले को जानता हूँ , वो एक आदमी है। जिसे क़ियामत के दिन लाया जाएगा और कहा जाएगा : इसके सामने इस के छोटे गुनाह पेश करो और इस के बड़े गुनाह उठा रखो (एक तरफ़ हटा दो) तो उसके छोटे गुनाह उसके सामने लाए जाएँगे और कहा जाएगा : फ़ुलाँ-फ़ुलाँ दिन तूने फ़ुलाँ-फ़ुलाँ काम किये और फ़ुलाँ-फ़ुलाँ दिन तूने फ़ुलाँ-फ़ुलाँ काम किये। वो कहेगा : हाँ, वो इनकार नहीं कर सकेगा और वो अपने बड़े गुनाहों के पेश होने से डरा हुआ होगा। ( उस वक़्त ) उसे कहा जाएगा : तुम्हारे लिये हर बुराई के बदले एक नेकी है। तो वो कहेगा : ऐ मेरे रब ! मैं ने बहुत से ऐसे ( बुरे ) काम किये जिन्हें मैं यहाँ नहीं देख रहा। मैं (अबू-ज़र (रज़ि०) अल्लाह عنہ) ने रसूलुल्लाह ﷺ को देखा कि आप हँसे यहाँ तक कि आप के पिछले दाँत मुबारक नुमायाँ हो गए। (मुस्लिम 190)
इस हदीस से अल्लाह की रहमत और बरकत की अज़मत का पता चलता है, अल्लाह की माफ़ करने की सिफ़त है, अल्लाह माफ़ करना पसंद करता है। "जो बड़े बड़े गुनाहों और खुले-खुले बुरे काम से बचते हैं, सिवाय इसके कि कुछ क़सूर उनसे हो जाए। बिला शुबह तेरे रब का दामने-मग़फ़िरत बहुत वसी (फैला हुआ) है। वो तुम्हें उस वक़्त से ख़ूब जानता, जब उसने ज़मीन से तुम्हें पैदा किया और जब तुम अपनी माँओं के पेटों में अभी जनीन (भ्रूण) ही थे। बस अपने नफ़्स की पाकी के दावे न करो, वही बेहतर जानता है कि वाक़ई मुत्तक़ी कौन है।" अल् क़ुरआन 53:32
अगर हम बड़े बड़े गुनाहो से बचते रहे, और छोटे मोटे गुनाह जाने अनजाने हमसे हो गए, तो अल्लाह सुब्हान व तआला बन्दों के ऐसे गुनाह ऐ सगीरा माफ़ फरमाता रहता है, नमाज़, रोज़े और इसी तरह इबादतें गुनाहो का कफ़्फ़ारा बन जाती है अल्लाह के हुकुम से। यहाँ समझने की बात ये है के अल्लाह सुब्हान व तआला जानता है गलती का पुतला है और उससे गलतियां होंगी, इंसान 100 % परफेक्ट नहीं हो सकता, लेकिन उसे कोशिश 100% करनी है के उससे गुनाह न हो, और माफ़ी भी मांगते चलना है। और दूसरी बात ये है के तक़वा के दावे नहीं करना न ही उस पर तकब्बुर करना है, क्युकी ये भी अल्लाह ही की रहमत है के हमे अच्छे काम करने का मौका मिला और नेकी का हौसला मिला।
लेकिन गुनाह ऐ कबीरा जिनसे बचने की ताक़ीद अल्लाह ने की है वो भी माफ़ हो जायेंगे इंशाल्लाह मगर उसके सच्चे दिल से माफ़ी मांगनी होगी। (ऐ नबी) कह दो कि ऐ मेरे बन्दो,(70) जिन्होंने अपनी जानों पर ज़्यादती की है, अल्लाह की रहमत से मायूस न हो जाओ, यक़ीनन अल्लाह सारे गुनाह माफ़ कर देता है, वो तो माफ़ करनेवाला और रहम करनेवाला है। (अल क़ुरआन 39:53)
तौबा करने के लिए कभी भी देर नहीं होती, चाहे इंसान कितना ही गुनाहगार हो, कितने ही गुनाह कर चुका हो, अल्लाह सुब्हान व तआला तब भी माफ़ी मांगने वाले को माफ़ फरमाता है। क्युकी अल्लाह फरमाता है "अल्लाह तो तुम्हारी तरफ़ रहमत के साथ पलटना चाहता है" (कुरआन 4:27)
रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया: अल्लाह कहता है: ऐ आदम के बेटे! जब तक तू मुझसे दुआएँ करता रहेगा और मुझसे अपनी उम्मीदें वाबस्ता रखेगा मैं तुझे बख़्शता रहूँगा चाहे तेरे गुनाह किसी भी दर्जे पर पहुँचे हुए हों मुझे किसी बात की परवाह और डर नहीं है। ऐ आदम के बेटे! अगर तेरे गुनाह आसमान को छूने लगें फिर तो मुझसे मग़फ़िरत तलब करने लगे तो मैं तुझे बख़्श दूँगा और मुझे किसी बात की परवाह न होगी। ऐ आदम के बेटे! अगर तू ज़मीन बराबर भी गुनाह कर बैठे और फिर मुझसे (मग़फ़िरत तलब करने के लिये) मिले लेकिन मेरे साथ किसी तरह का शिर्क न किया हो तो मैं तेरे पास उसके बराबर मग़फ़िरत ले कर आऊँगा (और तुझे बख़्श दूँगा)। (तिरमिज़ी 3540)
तौबा के अल्फ़ाज़-
أسْتَغْفِرُ اللهَ رَبي مِنْ كُلِ ذَنبٍ وَأتُوبُ إلَيهِ
हिन्दी-
अस्तग़फिरुल्लाह रब्बी मिन कुल्ली ज़म्बिंउ व अतुबु इलैही
तर्जुमा-
मैं अल्लाह से अपने तमाम गुनाहो की माफ़ी चाहता हूं, जो मेरा रब है। और उसी की तरफ़ रुजू करता हूं।
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