Nikah (part 2): HumSafar Kaise Chune

लड़के के लिए लड़की (बीवी) का इंतेखाब लड़की के लिए लड़के (शौहर) का इंतेखाब निकाह के लिए लड़की देखना:

हमसफ़र कैसे चुने ?

Table Of Content

  1. लड़के के लिए लड़की (बीवी) का इंतेखाब
  2. लड़की के लिए लड़के (शौहर) का इंतेखाब
  3. निकाह के लिए लड़की देखना:


निकाह में लड़के और लड़की के इंतखाब (selection) की अहम बुनियाद: निकाह में लड़के और लड़की के इंतखाब के कुछ ख़ास बुनियादी पहलू हैं आइए इस पर एक नजर डालें


लड़के के लिए लड़की (बीवी) का इंतेखाब:

इस हवाले से कुछ हदीस पर गौर करें

हजरत अबू हुरैरह रज़ि से रिवायत है कि रसूलल्लाह ﷺ. ने फ़रमाया:

औरत से निकाह चार चीज़ो की बुनियाद पर किया जाता है,:

1. मालदारी (धन, संपत्ति/बैंक बैलेंस)

 2. हस्बे नस्ब (खानदान, पारिवारिक स्थिति)

 3.खुबसुरती (सुंदरता / सुंदर)

 4. दीनदारी (धार्मिक)

लिहाजा तुम दीनदार औरत से निकाह करके कामयाबी हासिल करो, अगर तुम ऐसा न करोगे तो तुम्हारे हाथों को मिट्टी लगेगी।(यानी आखिर में तुझे नदामत और मायूसी होगी। )

(सहीह बुखारी - 5090, मुस्लिम - 3635, सुनन इब्ने माजा - 1858, सुनन अबू दाऊद - 2047)


अबू सईद खुदरी रज़ि की रिवायत में ये अल्फाज इस तरह हैं

तुम दीन और अख्लाक वाली औरत का इंतेखाब कर लेना।

सिलसिला सहीहा हदीस न०- 1443


दीनदार औरत कौन?

एक हदीस में आया है

नबी ﷺ ने फ़रमाया:

आदमी के नेक बख़्त होने कामयाब होने की चार चीज़ें हैं-

1. नेक बीवी

2. कुशादा घर

3. अच्छे पड़ोसी

4. उम्दा सवारी

सही अल जामी 887, मसनद अहमद 14947 सही इब्न ऐ हिब्बन 4032



दीनदार औरत घर को जन्नत बनाने की कोशिश में जुटी रहती है, अल्लाह के बनाए हुदुद को पार नहीं करती, अल्लाह के अहकाम का ख्याल रखती है, तकवा और परहेज़गारी से काम लेती है, मुश्किल और परेशानी में सब्र करती है, शौहर का दीन में साथ देती है, बच्चों की परवरिश अच्छे ढंग से दीन के ऐतबार से अंजाम देती है, मोहब्ब्त, नर्मी और शफकत से घर वालो और सास ससुर की खिदमत करती है। जिससे घर में खुशनुमा माहौल फराहम होता है।

इन अहादिस से पता चलता है कि नबी करीमصلى الله عليه وسلمने दीनदार औरत को खास तरजीह(priority)दी।

आज हम समाज और आस पास का माहौल देखते हैं तो दिल बैठ जाता है, जिस तरीक़े से आज रिश्ता तलाशा जा रहा है धन दौलत, खानदानी स्टेटस, जात बिरादरी वगैरह वगैरह।

इस्लाम जिस बुनियाद पर निकाह को तरजीह (प्राथमिकता) देता है वह दीनदारी और अखलाकी मयार है। 

मान लीजिए कि अगर किसी दीनदार को छोड़ कर हम ऐसे इंसान का इंतेखाब करें जो दौलत मंद हो ऊंचे खानदान वाला हो, खुबसूरत भी हो- अगर लड़की में ये सारी खूबी है मगर वो बदक़िरदार है बदज़ुबान है नाफरमानी करने वाली है... लड़का जो दौलत मंद हो, हैंडसम हो मगर उसके अखलाक निहायत गिरे हुए हैं मसलन नसेड़ी, शराब पीता हो, चरित्र हीन हो तो नतीजा क्या होगा कुछ दिनों बाद कलह शूरू हो हो जायेगा लड़ाई झगड़े,फितना फसाद और फिर जिंदगी जहन्नुम बन कर रह जाती है जैसा कि आज हमारे समाज में हो रहा है। इसलिए हमारे नबी ﷺ. ने कहा ‘तुम्हारे हाथों को मिट्टी लगेगी’।

यानि तबाही और बर्बादी के सिवा कुछ हासिल न होगा।


लड़की के लिए लड़के (शौहर) का इंतेखाब


जिस तरह से एक खुशहालऔर पुरसुकून जिंदगी गुजारने, दुनियां और दीन दोनों को संवारने के लिए लड़की का दीनदार होना ज़रूरी है उसी प्रकार बेटियों को जिन्दगी में भी दीनदार मर्द का होना बेहद जरूरी है आइए इसे हदीस की रोशनी में देखें


हज़रत अबू हुरैरह रज़ि. से रिवायत है कि रसूलल्लाह ﷺ. ने फरमाया

जब तुम्हारे पास कोई ऐसा शख्स निकाह का पैगाम भेजे जिस का दीन और अख्लाक तुम पसंद करते हो उससे निकाह कर दो।

अगर तुम ऐसा न करोगे तो जमीन में फ़ित्ना और बहुत बड़ा फसाद होगा।

जामेअ तिर्मिज़ी: 1084,1085, मिश्कात उल मसाबीह: 3090


वजाहत 

इस हदीस से पता चलता है कि

हमारे प्यारे नबी ﷺने इस बात की नसीहत की है कि:

जैसे एक मर्द को नेक बीवी चुनने उस से निकाह करने की सलाह दी है, ठीक उसी तरह एक मुस्लिम औरत को भी इस्लाम की नज़र में इस बात  की सलाह दी जाती है कि  वो भी अपने होने वाले शौहर में नेकी, दीनदारी और अच्छे अखलाक के पहलू सबसे पहले देखे।

एक बात और अगर ऐसे रिश्ते को ठुकराया गया तो जमीन में फितना और फसाद फैल जाएगा इस हदीस के पसमंजर में हम देखते हैं कि आज समाज में बेहयाई आम बात हो गई है.…

साथ ही अच्छे और दीनदार रिश्ते को ठुकराने , माल व दौलत को तरजीह देने की वजह से बेटीयां over age का दंश झेल रही हैं इस मौजू पर आगे की पोस्ट में बात होगी इंशा अल्लाह


निकाह के लिए लड़की देखना:

शरीयत ने मंगेतर को एक नजर देख लेने की  इजाजत दी है हदीस की रोशनी में एक नज़र:

हज़रत मुगीरा बिन शोबा रज़ि. कहते है कि मैंने एक औरत की तरफ निकाह का पैगाम भेजा तो नबी ﷺ. ने मुझसे पूछा कि “क्या तूने उसे देखा है?

मैंने कहा “नहीं”

तो आप ﷺ. ने फरमाया: “जाकर उसे देख लो, इस तरह ज्यादा उम्मीद है कि तुम दोनो में उल्फत और मुहब्ब्त पैदा हो जाये।”

चुनाँचे मैं उस अन्सारी औरत के घर गया, और उसके माँ बाप के जरिये उसे पैगाम दिया और नबी सल्ल. का पैगाम सुनाया तो ऐसा मालूम हुआ की उन्हें ये बात पसन्द नहीं आई।

उस औरत ने पर्दे के अंदर से ये बात सुनी तो कहा, “अगर रसूलल्लाह ﷺ. ने देखने का हुक्म दिया है तो तुम देख लो वरना मैं तुम्हें अल्लाह का वास्ता दिलाती हूँ; गोया उस औरत ने इस बात को बहुत बड़ा समझा।”

हजरत मुगीरा रज़ि कहते है कि, “मैंने उस औरत को देखा और उससे शादी कर ली।”

फिर इसके बाद उन्होंने उससे बाहमी मुवाफक़त और हमआहँगी का ज़िक्र फरमाया।

(सुनन इब्ने माजा हदीस न०- 1865, 1866, तिर्मिज़ी हदीस न०- 1087, मिश्कात हदीस न०- 3106)


हज़रत जाबिर बिन अब्दुल्लाह रज़ि. से रिवायत है कि रसूलल्लाह ﷺ. ने फरमाया कि,

“तुममें से जब कोई किसी औरत को निकाह का पैगाम दे, अगर मुमकिन हो तो उससे वो कुछ देख ले जो उसे उससे निकाह की तरफ रागिब कर रहा है। (यानी आदत और अख्लाक,कद काठी और हुस्नो जमाल वगैरह)

रावी(जाबिर रज़ि) बयान करते हैं कि मैंने एक लड़की को निकाह का पैगाम दिया तो मैं उसे छिपछिपा कर देखता था यहाँ तक कि मैंने उसमें वो खूबी देख ही ली जिसकी वजह से मैं उससे निकाह करना चाहता था, फिर मैंने उससे निकाह कर लिया।

(सुनन अबू दाऊद - 2082,मिश्कात - 3106)


नबी ﷺ. ने इरशाद फरमाया:

जब अल्लाह किसी आदमी के दिल में किसी औरत को निकाह का पैगाम देने का ख्याल पैदा कर दे तो फिर इस बात में कोई हर्ज नहीं कि वो शख्स उस औरत को देख ले।

(सुनन इब्ने माजा हदीस न०- 1864)

एक औरत नबी सल्ल. के पास खुद को हिबा करने आई तो नबी ﷺ. ने उसकी तरफ एक नज़र उठाकर देखा फिर नजरें नीची कर ली और सर झुका लिया।

सहीह बुखारी हदीस न०- 5030


वजाहत

जो अहादीस पेश की गई है उस से ये पता चलता है कि निकाह से पहले लड़की को एक नजर देखा जा सकता है।

  • लेकिन इसका ये कतई मतलब नहीं है कि देखने की इजाज़त है तो रोज़ रोज़ मिलना शुरू कर दें घंटों बातें करने लगे, घूमने फिरने मौज मस्ती करनी शुरू हो जाए , हां कुछ बातें की जा सकती हैं जैसे दीन के मसले पर। न की फालतू की गप शप,।
  • ध्यान रहे इस्लाम ऐसी चीज़ों को नजायज करार देता है देखने की इजाज़त इस लिए दी गई है की नया जोड़ा जो निकाह जैसे पाक रिश्ते में जुड़ना चाहता है एक दूसरे को देख कर मुतमइन हो जाए। क्यों कि ज़िंदगी उन्हें ही साथ गुजारनी है।
  • अब हमारे समाज में होता ये है की लड़की देखने के नाम पर पूरा का पूरा खानदान आ रहा है जैसे ही रिश्ता तय होता है बातचीत शुरू होती है और फिर लड़की को देखने का सिलसिला शुरू होता है कभी नंद, कभी जेठानी,कभी सास आ रही है तो कभी चाची सास, मुमानी सास आ रही है टोलियां बना बना कर और लड़की की अम्मी सबके आव भगत में लगी हुई हैं प्लेटें भर भर के मिठाई और पाकवान पेश कर रही होती है फिर लड़की का इंटरव्यू शुरू होता है दुनियादारी के सारे सावल पूछ लिए जाते हैं मगर बस दीन का पहलू नज़र अंदाज़ कर दिया जाता है।
  • और एक बात जिसे देखना चाहिए यानि लड़के को उसे लड़की देखने की इजाज़त नहीं दी जाती, बल्कि सास ससुर, जेठ देवर सब देख रहे हैं बस लड़के के लिए कहा जाता है कि गैर मेहरम है उसे शादी के बाद ही देखना है, लड़के की पसंद को कोई ख़ास अहमियत नहीं दी जाती। 

ये निहायत गलत बात है। और ये भी होता है बाज दफा लड़के तो लड़की पसंद होती है पर सास या ससुर को पसंद न हो या दहेज़ कम मिल रहा हो तो शादी नहीं करते।

इस बात का ख्याल होना चाहिए कि आख़िर होने वाले नए जोड़े को ही साथ जिंदगी गुजारनी होती हैं फिर उनकी पसंद को प्राथमिकता दी जानी चाहिए ताकि भविष्य में जिंदगी पुरसकून हो।

 निकाह की फजीलत की अगली कड़ी में कुछ ख़ास बिंदु पर बात होगी " इंशा अल्लाह"

तब तक दुआओं में याद रखें।

अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त बातों को लिखने पढ़ने से ज्यादा अमल की तौफीक अता फरमाए आमीन 🤲

- आपकी दीनी बहन फिरोजा

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