अल-मुन्तक़िम - الْمُنْتَقِمُ
अल्लाह ﷻ नाम सर्वशक्तिमान, सारी क़ायनात बनाने वाले ख़ालिक का वो नाम है, जो कि सिर्फ उस ही के लिए है और इस नाम के अलावा भी कई और नाम अल्लाह के हैं जो हमे अल्लाह की खूबियों से वाकिफ़ करवाते हैं। अल्लाह ﷻ के ही लिए हैं खूबसूरत सिफाती नाम। इन को असमा-उल-हुस्ना कहा जाता है। ये नाम हमें अल्लाह की खूबियाँ बताते हैं। अल्लाह के खूबसूरत नामों में से एक नाम है अल-मुन्तक़िम।
अल-मुन्तक़िम - इसके रुट है ن ق م जिसका मतलब है - बदला लेने वाला, सज़ा देने वाला, इंतकाम लेने वाला।अल्लाह वो है के जो अपने मुजरिम बंदो से अकेला ही इंतकाम लेने वाला है, ज़ालिमों के ज़ुल्म का पूरा बदला लेने वाला।
अल-मुन्तक़िम वो ज़ात है जो अपने नाफरमान बन्दों को उनके नापसन्दीदा कामो का ज़ुल्म का बदला लेने वाला, अल-मुन्तक़िम जब किसी से इन्तेक़ाम लेना चाहे तो इन्तेहाई सख्त गिरफ्त फरमाता है। किस्मे ताक़त है के वो अल मुन्तक़िम के इन्तेक़ाम और गज़ब को भुगत सके ? और कोइसे हम अपने आप को बचायेंगे जब अल्लाह सुब्हान व तआला ने हमे पकड़ लिया ? अल्लाह सुब्हान व तआला हमारी गलतियों को माफ़ फरमाए और हमे खुद भी कोशिश करनी है के हम अल्लाह की नाफरमानी करने से बचे। अल्लाह के गज़ब का सामना करना हमारे लिए मुमकिन नहीं, इसलिए अल्लाह से पनाह मांगते रहे और अपने आमाल दुरुस्त करते रहे।
अल्लाह सुब्हान व ताला का इन्तेक़ाम जैसा इन्तेक़ाम भी किसी का नहीं, अल्लाह की पकड़ से बचना भी नामुमकिन है। हर छोटी बड़ी चीज़ लिखी जा रही है। अल्लाह सुब्हान व तआला जैसी पकड़ किसी की नहीं।
जब ज़ालिम लोग बेचारी मज़लूमो को सताए और मज़लूम कुछ न कर सके, उन मज़लूम को इन्साफ देने वाला और उसकी तरफ से बदला लेने वाला। मिसाल के तौर पर किसी बेवा का या मिस्कीन का घर ढहा दिया, किसी की ज़मीन गज़ब कर ली, किसी ताक़तवर क़ौम ने मज़लूम क़ौम के घर से जनाज़े निकाले और इस तरह के तमाम जुर्म जो आज दुनिया में हो रहे हैं। उनकी पूछ करने वाला उन जुर्म की सजा देने वाला कौन है? क्या अदालतो में इन्साफ होता दिखता है ? पैसा रसूख दबदबा इनसे इन्साफ बिक नहीं जाता? और किसी अदालत में अगर मुजरिम को सजा हो भी जाये तो कितनी होगी? दस लोगों के क़ातिल को भी एक ही दफ़ा सूली देंगे न ? और करोडो के क़ातिल को भी एक ही दफ़ा मरा जा सकता है। और मुजरिम को सजा देने से भी मज़लूम का क्या फायदा होगा ? क्या उसकी ज़िन्दगी, उसकी ज़मीन, उसके क़ुरबतदार उसे वापस मिल जायेंगे ? अल्लाह सुब्हान व तआला फरमाता है
فَإِمَّا نَذۡهَبَنَّ بِكَ فَإِنَّا مِنۡهُم مُّنتَقِمُونَ
फिर अगर हम ले जाएं आपको तो बेशक हम इन्तेक़ाम लेने वाले हैं
अल क़ुरआन 43 :41
जी, ये दुनिया ऐसी है के यहाँ इन्साफ होना मुमकिन ही नहीं, उन सब मज़लूमो का जिन पर ज़ुल्म ज़्यादती हुई उनसे इन्तेक़ाम लेने वाला और उन्हें उनके हर जुर्म का पूरा पूरा बदला देने वाला अल मुन्तक़िम। और याद रखें अल मुन्तक़िम नाफरमान बन्दों के नापसंदीदा काम का इन्तेक़ाम लेने वाला है, फर्मबरदार बन्दों के पसंदीदा काम का नहीं। अल्लाह सुब्हान व ताला की ये सिफ़त मुजरिमो के लिए खौफ का बाइस है, इस सिफ़त को जानने और समझने वाला जुर्म करने से पहले ही रुक जायेगा। अल्लाह सुब्हान व तआला ने बदले का दिन मुक़र्रर कर रखा है उस दिन हर एक उसके काम जो कुछ उसने किये उनका पूरा पूरा बदला मिलने वाला है -
يَوۡمَ نَبۡطِشُ ٱلۡبَطۡشَةَ ٱلۡكُبۡرَىٰٓ إِنَّا مُنتَقِمُونَ
और जिस दिन हम पकड़ेंगे, सख्त पकड़, और बेशक हम इन्तेक़ाम लेने वाले हैं
अल क़ुरआन 44:16
अल मुन्तक़िम, उन मज़लूमो का इन्तेक़ाम ले जो निसहाय हैं और जिन पर ज़ुल्म हुआ और जब अल मुन्तक़िम इन्तेक़ाम लेने पर आये तो कोई चीज़ उसके रस्ते के रुकावट नहीं बन सकती। अल्लाह सुब्हान व तआला ने जो दीं दिया है उसमे इन्साफ है, उसमे बन्दों को अपना बदला दुनिया ही में मिल जाने की रुखसत है- लेकिन जो हुकूमत ही नाफरमान है उससे इन्साफ की उम्मीद की जा सकती है ?
जी हाँ, इन्साफ के साथ हर नाफरमान ज़ालिम से उसके जुल्म का पूरा पूरा बदला लेने वाला अल मुन्तक़िम। अल्लाह सुब्हान व तआला मेरी और आपकी खताएं माफ़ फरमाए और हमे अपने फर्माबरदार बन्दों में शामिल करे, आमीन। अगर कोई जाने अनजाने में हमने ज़ुल्म किया हो तो उसके लिए आज तौबा करें और जो हो सके मज़लूम के लिए मदद करने की कोशिश करें। अल्लाह के इन्तेक़ाम से अपनी हिफाज़त करने का जरिया यही है के अपने गुनाहों की तौबा।
مِن قَبۡلُ هُدٗى لِّلنَّاسِ وَأَنزَلَ ٱلۡفُرۡقَانَۗ إِنَّ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْبِـَٔايَٰتِ ٱللَّهِ لَهُمۡ عَذَابٞ شَدِيدٞۗ وَٱللَّهُ عَزِيزٞ ذُو ٱنتِقَامٍ
और उसने ही वो कसौटी उतारी है जो हक़्क़ और बातिल में फर्क दिखाने वाली है, अब जो लोग अल्लाह की आयतो को क़ुबूल करने से इंकार करें उन्हें यक़ीनन सख्त सज़ा मिलेगी, अल्लाह बेपनाह ताक़त का मालिक और इन्तेक़ाम का मालिक है।
अल क़ुरआन 3 : 4
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