पानी पीने की दुआ, सुन्नतें और साइंटिफिक फ़ायदे
1. पानी पीने से पहले की दुआ
بِسْمِ اللهِ
बिस्मिल्लाह (Bismillah)
"शुरू अल्लाह के नाम से"
"शुरू अल्लाह के नाम से"
2. पानी पीने के बाद की दुआ
الْحَمْدُ لِلَّهِ
अल-हम्दु लिल्लाह (Al-hamdu lillah)
"तमाम तारीफ़ें अल्लाह के लिये हैं।"
"तमाम तारीफ़ें अल्लाह के लिये हैं।"
3. पानी पीने की सुन्नतें
1. बिस्मिल्लाही पढ़ कर पीना। [तिर्मिज़ी 1885]2. दाएं हाथ से पीना। [मुस्लिम 2020]
3. बैठ कर पीना [बुखारी 6452; मुस्लिम 2024, अबु दाऊद 3717]
4. तीन सांस में पीना। [बुखारी 5631; मुस्लिम 2028; तिर्मिज़ी 1885]
5. कुदरती ठंडा और मीठा पानी पीना। [तिर्मिज़ी 1895]
6. बर्तन में सांस न लेना। [तिर्मिज़ी 1889; बुखारी 5630; इब्न माजा 3428]
7. बगैर फुंके पीना। [इब्न माजा 3430]
8. सीधे घड़े/बर्तन से पानी न पीना बल्कि प्याले या गिलास में पीना। [बुखारी 5627; इब्न माजा 3420]
9. पानी पिलाने वाले का आखीर में पीना। [इब्न माजाह 3434; अबु दाऊद 3725]
10. पानी पीने वाला या पिलाने वाला दाईं तरफ से पानी पिलाना शुरू करे। [इब्न माजा 3425]
11. पीने के बाद अल्हम्दुलिल्लाह कहना। [तिर्मिज़ी 1885]
नोट:
1. ये सुन्नतें हर पानी जैसे चीज़ के लिए है। जैसे दूध, चॉय, कॉफ़ी, कोल्ड ड्रिंक वग़ैरह।
2. ज़मज़म को खड़े होकर पीना सुन्नत है।
4. सुन्नत तरीके से पानी पीने के साइंटिफिक फ़ायदे
1. तीन सांस में पानी पीना से प्यास बुझाती है, सेहत अच्छी रहती है और शरीर में तंदुरुस्ती आती है।2. खड़े होकर या चलते समय पानी पीने से गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट [Gastrointestinal Tract (GIT)] और किडनी को नुकसान पहुँच सकता है, गठिया (arthritis), तंत्रिका तनाव (nerve tension) और दूसरी बीमारियाँ हो सकती हैं।
3. बैठ कर पानी पीने से शरीर में एसिड (acid) लेवल बना रहता है, रीढ़ की हड्डी और गुठने मजबूत बने रहते हैं, ज़ेहन दुरुस्त रहता है, दिल और किडनी की बीमारी नहीं होती। 4. एक बार में या एक सांस में पानी पीने से खास तौर पर मांसपेशियां (muscles) और तंत्रिकाएं (nerves) कमजोर पड़ जाती हैं साथ ही यह लीवर और पेट के लिए भी नुक़सानदेह है। इसके अलावह एक बार में पीने से आपका (esophagus/खाने की नली में देर तक पानी ठहरने की वजह से सांस का रुक जाना) दम घुट सकता है।
5. एक गिलास पानी में CO2 छोड़ने से यह प्रतिक्रिया (reaction) करता है और कार्बोनिक एसिड बनाता है जो हमारे आंतरिक वातावरण (internal environment) को परेशान कर सकता है जिससे pH में परिवर्तन हो सकता है। और अगर एसिड की मात्रा और ज़्यादह हुई तो 'एसिडोसिस' (Acidosis) हो सकता है (ऐसी हालत जहां खून में बहुत ज़्यादा एसिड (तेज़ाब) होता है, या बहुत कम, और अक्सर खून के pH में कमी हो जाती है)।
6. एक साथ बहुत ज़्यादा पानी पीना सेहत के लिए नुकसानदेह है क्यूंकि जब कम समय में बहुत ज़्यादा पानी पी लिया जाता है, तो गुर्दे उसे तेजी से बाहर नहीं निकाल पाते हैं और खून में पानी भर जाता है, जिससे मौत हो सकती है। रोज़ाना करीब 1.5-2 लीटर पानी पीना सेहत के लिए फायदेमंद है।
5. पानी पीने से मुताल्लिक़ कुछ अहादीस
रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया,(1) नबी ﷺ जब पानी पीते तो तीन साँस लेते और फ़रमाते, "ये (अन्दाज़) प्यास ख़ूब बुझाता है हज़म को क़ुव्वत देता है और तन्दुरुस्ती की वजह है।" [अबु दाऊद 3727]
(2) "तुम में से कोई अपने बाएं हाथ से न खाए और न पिए, क्योंकि शैतान बाएं हाथ से खाता और पीता है। [मुस्लिम 2020]
(3) हज़रत अब्दुल्लाह-बिन-अब्बास (रज़ि०) से रिवायत है, उन्होंने फ़रमाया, "रसूलुल्लाह ﷺ ने मिश्कीज़ों के मुँह ऊपर की तरफ़ मोड़ कर उन के मूँहों से पानी पीने से मना फ़रमाया। रसूलुल्लाह ﷺ की मनाही के बाद एक आदमी रात को उठा और उसने ( पानी पीने के लिये) मटके का मुँह उलटाया तो उसमें से साँप निकल आया।" [इब्न माजा 3419]
(4) "जब कोई शख़्स (पानी वग़ैरा) पिये तो उसे बर्तन में साँस नहीं लेना चाहिये। अगर दोबारा पीना चाहे तो बर्तन (मुँह से) हटाए फिर चाहे तो दोबारा (मज़ीद) पी ले।" [इब्न माजा 3427]
(5) "रेशम और दीबा न पहनो और न सोने चाँदी के बर्तन में कुछ पियो और न उन की प्लेटों में कुछ खाओ क्योंकि ये चीज़ें उन (काफ़िरों) के लिये दुनिया में हैं और हमारे लिये आख़िरत में हैं।" [बुख़ारी 5426; मुस्लिम 2067]
(5) "रेशम और दीबा न पहनो और न सोने चाँदी के बर्तन में कुछ पियो और न उन की प्लेटों में कुछ खाओ क्योंकि ये चीज़ें उन (काफ़िरों) के लिये दुनिया में हैं और हमारे लिये आख़िरत में हैं।" [बुख़ारी 5426; मुस्लिम 2067]
(6) "जो शख़्स चाँदी के बर्तन में (पानी या और कोई मशरूब) पीता है वो अपने पेट में जहन्नम की आग ग़ट-ग़ट डाल रहा है।" [इब्न माजा 3413]
(7) "रसूलुल्लाह ﷺ ने रोग़नी घड़े में, कद्दू से बने हुए बर्तन में और लकड़ी से बने हुए बर्तन में पीने से मना फ़रमाया।" [इब्न माजा 3403]
(7) "रसूलुल्लाह ﷺ ने रोग़नी घड़े में, कद्दू से बने हुए बर्तन में और लकड़ी से बने हुए बर्तन में पीने से मना फ़रमाया।" [इब्न माजा 3403]
(8) "बर्तन ढाँप दिया करो, मटके का मुँह बाँध दिया करो, चराग़ बुझा दिया करो और दरवाज़ा बन्द कर दिया करो क्योंकि शैतान (मुँह बन्द) मशक को नहीं खोलता, दरवाज़ा नहीं खोलता और (ढाँपे हुए) बर्तन को नहीं खोलता। अगर किसी को बर्तन पर रखने के लिये लकड़ी (पेड़ की पतली शाख़ वग़ैरा) के सिवा कुछ न मिले तो उसे ही अल्लाह का नाम ले कर रख दे। (चराग़ बुझा दिया करो) इस लिये कि नन्ही शरीर चुहिया घर को आग लगा कर (घर को या घर वालों को) जला देती है।" [बुख़ारी 5623; मुस्लिम 2012; इब्न माजा 3410; अबु दाऊद 3732]
(9) "बर्तन ढाँक दो, मटके का मुँह बाँध दो, क्योंकि साल में एक रात ऐसी होती है। जिसमें वबा नाज़िल होती है। फिर वो जिस भी बिना ढके बर्तन और मुँह खुले मटके के पास से गुज़रती है। तो उस वबा में से (कुछ हिस्सा) इस में उतर जाता है।" [मुस्लिम 2014]
(10) हज़रत अनस-बिन-मालिक (रज़ि०) से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ की ख़िदमत में दूध पेश किया गया जिसमें पानी मिलाया गया था। नबी ﷺ के दाएँ तरफ़ एक देहाती सहाबी थे और बाईं तरफ़ अबू-बक्र (रज़ि०) थे। रसूलुल्लाह ﷺ ने पी कर देहाती सहाबी को अता किया और फ़रमाया : दाईं तरफ़ वाला (ज़्यादा हक़ दार है) फिर उसके बाद का दाईं तरफ़ वाला। [बुख़ारी 5619; इब्न माजा 3425; अबु दाऊद 3726]
(11) रसूलुल्लाह ﷺ ने मना फ़रमाया है कि, "प्याले की टूटी हुई जगह से पिया जाए या मशरूब में फूँक मारी जाए।" [अबु दाऊद 3722]
इन शा अल्लाह अगले आर्टिकल में "बैत उल ख़ला (टॉयलेट) जाने की दुआ और सुन्नतों" के बारे में जानेंगे।
Posted By Islamic Theology
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