आज़माईश और मुसलमान (पार्ट -2)
आसिया बिन्ते मुज़ाहिम रज़ि अल्लाहु अन्हा
फ़िरऔन के विषय में कौन नहीं जानता वह कितना निर्दयी, ज़ालिम और अल्लाह का नाफ़रमान था, उसकी हुकूमत मिस्र (Egypt) में थी। वह मिस्र आज वाला मिस्र न था, उसका क्षेत्रफल बहुत बड़ा था, फ़िरऔन ख़ुद को ख़ुदा समझता था और घमंड में अपनी जनता से कहता था कि "मैं तुम्हारा सबसे बड़ा रब (पालनहार) हूं"। जनता में कोई उसकी यह बात नहीं मानता तो वह बड़ी भयानक सज़ा देता। जब अल्लाह तआला ने मूसा अलैहिस्सलाम को नबी और रसूल बनाकर फ़िरऔन के पास दावत देने के लिए भेजा तो उसने उनका मज़ाक़ उड़ाया और सख़्त विरोध किया और हर तरीक़े से मूसा को नीचा दिखाने की संभवतः कोशिश करता रहा। वह ढीठ और सरकश व्यक्ति था किसी भी सूरत में मूसा की बात मानने को तैयार नहीं हुआ, उसकी सल्तनत में अल्लाह पर ईमान लाना बहुत बड़ा जुर्म क़रार दिया गया। इन हालात में वह घनिष्ट रिश्तों की भी परवाह नहीं करता था। लेकिन उसके दबदबे और प्रतिबंध के बावजूद उसकी सल्तनत के कुछ लोग ईमान लाये। उसकी बीवी आसिया भी ईमान लाईं उन्होंने ने मूसा अलैहिस्सलाम की दावत क़ुबूल कर ली और तौहीद (एकेश्वरवाद) की वाहक बन गईं। वह एक दृढ़ संकल्प वाली महिला थीं। जब फ़िरऔन को उनके ईमान लाने की सूचना मिली तो उसने डराया, धमकाया, घनघोर अत्याचार किया और तरह तरह से दुख दिया, उन्हें कोड़े मारे गए उन्होंने हर ज़ुल्म सहन किया परन्तु उनके क़दम नही डगमगाए। वह ईमान और अक़ीदे की मज़बूत थीं इसलिए टस से मस न हुईं।
आसिया रज़ि अल्लाहु अन्हा को पहले धूप में खड़ा करके अज़ाब दिया गया। [अल मुस्तदरक लिल हाकिम 3834] जब इस सज़ा से फ़िरऔन उन्हें दीन ए इस्लाम से न फेर सका तो दीवार में खड़ा करके दोनों हाथों और पैरों में चार कीलें ठोंक दीं। फिर उनकी पीठ पर एक भारी पत्थर रख दिया उसी से वह शहीद हो गईं।" (अल मुस्तदरक लिल हाकिम 3929, सूरह अल फ़ज्र आयत 11]
आसिया रज़ि अल्लाहु अन्हा फ़िरऔन का हर ज़ुल्म बर्दाश्त करती रहीं और यह दुआ की
رَبِّ ٱبۡنِ لِي عِندَكَ بَيۡتٗا فِي ٱلۡجَنَّةِ وَنَجِّنِي مِن فِرۡعَوۡنَ وَعَمَلِهِۦ وَنَجِّنِي مِنَ ٱلۡقَوۡمِ ٱلظَّٰلِمِ
"ऐ मेरे रब! अपने पास जन्नत में मेरे लिए एक घर बना और मुझे फ़िरऔन और उसकी हरकतों से छुटकारा दिला और ज़ालिमों के पंजों से निजात दे।" [सूरह 66 अत तहरीम आयत 11]
अल्लाह ने उनकी दुआ क़ुबूल कर लिया और ने जन्नत में उनका बेहतरीन ठिकाना उन्हें इसी दुनिया में दिखा दिया। [मुसनद अबी या'ला: 4/1521, सहीह: 2508, मुसनद अहमद 11590 के तहत]
आसिया रज़ि अल्लाहु अन्हा की ईमान पर इस इस्तेक़ामत (मज़बूती) की वजह से दुनिया और आख़िरत दोनों में उनका नाम अमर हो गया और वह कमाल को पहुंचीं जहां कोई औरत न पहुंच सकी। और उन्हें जन्नती औरतों की सरदार घोषित किया गया अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने उनके विषय में फ़रमाया,
"मर्दो में कमाल को बहुत लोग पहुंचे हैं लेकिन औरतों में केवल फ़िरऔन की बीवी आसिया, मरयम बिन्ते इमरान ही पहुँची हैं और आयेशा की फ़ज़ीलत औरतों पर ऐसी है जैसे तमाम खानों पर सरीद को फ़ज़ीलत हासिल है।" [सही बुख़ारी 3411, 3433/ किताबुल मनाक़िब अहादीसूल अंबिया , सूरह अत तहरीम आयत 11 की तफ़्सीर में, मिश्कातुल मसाबीह 5724]
जन्नत की औरतों में चार सरदार होंगी मरयम बिन्ते इमरान, फ़ातिमा बिन्ते रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम, ख़दीजा बिन्ते ख़ुवैलिद, और आसिया।" [मुस्तदरक हाकिम 4853, मुसनद अहमद 10412/ मुसनद बनी हाशिम अब्दुल्लाह बिन अब्बास]
फ़िरऔन की दासी माशिता रज़ि अल्लाहु अन्हा
फ़िरऔन की एक दासी माशिता रज़ि अल्लाहु अन्हा ने भी मूसा अलैहिस्सलाम की दावत क़ुबूल किया और अल्लाह पर ईमान लाई,शुरू शुरू में अपने ईमान को छुपाये रखा लेकिन जब उसे ज़ाहिर करने का समय आया तो न हिचकिचाई न डरी और न सहमी बल्कि बड़ी दिलेरी के साथ उसने अपने ईमान का ऐलान किया उसे आज़माइश की भट्टी में तपाया गया लेकिन उसने उसे ख़ुशी ख़ुशी क़ुबूल किया और अल्लाह व आख़िरत को वरीयता दी और जन्नत को अपना ठिकाना बना लिया उनकी ख़ुशबू रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को मेराज के दौरान महसूस हुई। हदीस में उनका वाकिआ यूँ बयान हुआ है।
मेराज की रात सफ़र के दौरान एक जगह रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को बहुत ही अच्छी ख़ुशबू का एहसास हुआ, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने जिब्रील अलैहिस्सलाम से पूछा यह इतनी अच्छी ख़ुशबू कहां से आ रही है?
जिब्रील अलैहिस्सलाम ने जवाब दिया "यह फ़िरऔन की बेटी की दासी माशिता और उसकी औलाद की ख़ुशबू है।
जो रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इसे विस्तार से जानने की इच्छा जताई तो जिब्रील अलैहिस्सलाम ने बताया कि एक दिन माशिता फ़िरऔन की बेटी के बालों में कंघी कर रही थी कि अचानक उसके हाथ से कंघी छूट कर गिर गई, उसने "बिस्मिल्लाह" कहकर उसे उठा लिया।
फ़िरऔन की बेटी ने फ़ौरन पूछा, "क्या तुम्हारे इस जुमले से मुराद मेरे पिता हैं या कोई और है?
माशिता ने जवाब दिया, "नहीं! तुम्हारे पिता नहीं बल्कि अल्लाह से मुराद मेरा रब है जो तुम्हारा और तम्हारे पिता का भी रब है।
फ़िरऔन की बेटी ने धमकी दी कि, "यह सूचना मैं अपने पिता को अवश्य बताऊँगी?"
माशिता ने निडर होकर जवाब दिया शौक़ से बताओ मुझे कोई परवाह नहीं है।
फिर क्या था फ़िरऔन तक यह सूचना पहुंची, ख़बर मिलते ही तत्काल माशिता को तलब कर लिया गया जब वह आई, तो फ़िरऔन ने कहा, "ऐ माशिता! क्या मेरे इलावा भी तुम्हारा कोई रब है?"
उसने बिना झिझक कहा, "मेरा और तुम्हारा रब अल्लाह है।"
यह सुनकर फ़िरऔन के तन बदन में आग लग गई और उसने उसी समय एक तांबे की गाय बनाने और उसे अच्छी तरह धधकाने का आदेश दिया, जब वह पूरी तरह धधक गया तो फिर उसने आदेश दिया कि माशिता और उसके बच्चों को उसमें फेंक दिया जाए।
माशिता ने ख़्वाहिश ज़ाहिर की कि मेरी और मेरे बच्चों की हड्डियों को एक कपड़े में इकट्ठा रखकर दफ़न किया जाय। फ़िरऔन ने इस ख़्वाहिश को मंजूर कर लिया और फिर आदेश दिया कि पहले उसके बच्चों को इसमें फेंका जाए, माशिता की आंखों के सामने उसके एक एक बच्चे को धधकती भट्टी में फेंक दिया गया, आख़िर में केवल वह और उसका दूध पीता बच्चा रह गया और अब उसी दूध पीते बच्चे की बारी थी, माशिता उसके कारण थोड़ा हिचकिचाई लेकिन तभी अल्लाह का चमत्कार ज़ाहिर हुआ दूध पीता हुआ बच्चा बोल पड़ा, "हे मेरी मां, इसमें बिना किसी डर के कूद जाओ, क्योंकि इस दुनिया की सज़ा आख़िरत की सज़ा के मुक़ाबले में बहुत हल्की है।" फिर क्या था वह बच्चा सहित उसमें कूद गई और अमर हो गई।
इब्ने अब्बास रज़ि अल्ल्लाहु अन्हु ने बयान किया कि चार बच्चे बचपन में बोलते थे:
1, सैयदना ईसा अलैहिस्सलाम,
2 जुरैह के बेगुनाही में बच्चा का बोलना,
3, सैयदना यूसुफ़ अलैहिस्सलाम का गवाह,
4, फ़िरऔन की बेटी की दासी का बेटा जो उसके बालों में कंघी करती थी।
[मुसनद अहमद 2821, 2822]
जारी है.....
आसिम अकरम अबु अदीम फ़लाही
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