Khulasa e Qur'an - surah 54 | surah al qamar

Khulasa e Qur'an - surah | quran tafsir

खुलासा ए क़ुरआन - सूरह (054) अल क़मर


بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ


सूरह (054) अल क़मर 


(i) चांद के दो टुकड़े होने का बयान

शक़्क़ुल क़मर (चांद के दो टुकड़े होना) आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के नबी होने की निशानी और खुला हुआ मुअजिज़ा था। यह हैरत अंगेज़ वाक़िआ इस बात का प्रमाण था कि वह क़यामत जिसके आने की ख़बर आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम दे रहे थे वह वास्तव में होकर रहेगी और उसका वक़्त क़रीब ही है। हिजरत से पांच साल पहले चांद के महीने की चैदहवीं तारीख़ थी, चांद अभी निकला ही था यह महाविराट वृत्त (Sphere) उनकी आंखों के सामने फटा और उसके दोनों टुकड़े अलग अलग होकर एक दूसरे से इतनी दूर चले गए थे कि एक टुकड़ा मिना पहाड़ के एक तरफ़ और दूसरा दूसरी तरफ़ नज़र आया था। फिर वह दोनों टुकड़े कुछ समय बाद आपस मे मिल भी गए थे।

इस हवाले से अवाम में एक बात मशहूर कर दी गई है कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की उंगली के इशारे से चांद दो टुकड़े हो गया था, और यह भी कि चांद का एक टुकड़ा आप के दामन में दाख़िल हो कर आस्तीन से निकल गया। यह बेबुनियाद बात है किसी विश्वसनीय (authentic) तारीख़ या रिवायत में ऐसा कहीं कोई ज़िक्र नहीं है। (1, 2)


(ii) क़ुरआन आसान है नसीहत हासिल करने वालों के लिए

क़ुरआन को अल्लाह ने आसान बनाया है और हमारे दरमियान यह मशहूर कर दिया गया है कि क़ुरआन आम इंसानों के लिए नहीं बल्कि सिर्फ़ उलेमा के लिए है। नतीजा यह हुआ कि लोगों ने क़ुरआन को किताबे हिदायत व नसीहत के बजाय सिर्फ़ सवाब और तावीज़ गंडों की किताब तक महदूद कर दिया। उसे ख़ूब चूमा गया, फ़ातिहा ख़ानी की गई, जुज़दान रेशमी और क़ीमती बनाये गए लेकिन उसका हक़ अदा नहीं किया गया जबकि क़ुरआन में आयत 17, 22, 32 और 40 में एक ही आयत दुहराई गई है 

وَلَقَدۡ يَسَّرۡنَا ٱلۡقُرۡءَانَ لِلذِّكۡرِ فَهَلۡ مِن مُّدَّكِرٖ 

हमने क़ुरआन को नसीहत के लिए आसान बना दिया है। है कोई नसीहत हासिल करने वाला।


(iii) कुछ अहम बातें

◆ जब इंसान ज़ालिमों के दरमियान घिरा हुआ हो तो नूह अलैहिस्सलाम की तरह दुआ करे 

 رَبَّی اَنِّىْ مَغْلُوْبٌ فَانْتَصِرْ 

(मेरे रब मैं विवश हूं तू मेरी मदद कर और उनसे बदला ले। (10)

◆ प्रत्येक वस्तु एक तक़दीर के साथ क़ायम की गई है। (49)

◆ अल्लाह का हर आदेश पलक झपकने में ही लागू हो जाता है। (50)

◆ पांच क़ौमों (क़ौमे नूह, क़ौमे आद, क़ौमे समूद, क़ौमे लूत और फ़िरऔन) के करतूत और उनपर आने वाले दुनियावी अज़ाब का बयान इबरत के लिए हुआ है कि अगर किसी और ने भी वही करतूत किए तो उनका अंजाम भी उन्हीं क़ौमों जैसा होगा (51) 

◆ आख़िरत में बुरे लोगों के लिए जहन्नम और अज़ाब होगा जब कि नेक लोगों के लिए जन्नत और नेअमतें होंगी। (47,48 व 54,55)


आसिम अकरम (अबु अदीम) फ़लाही

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