खुलासा ए क़ुरआन - सूरह (051) अज़ ज़ारियात
सूरह (051) अज़ ज़ारियात
(i) आख़िरत
क़यामत क़ायम होगी, हिसाब किताब हो कर रहेगा, उस से कोई भाग नहीं सकेगा। जो लोग अल्लाह और आख़िरत के मुनकिर हैं उन्हें आग पर तपाया जाएगा जबकि नेक लोग जन्नत में ऐश कर रहे होंगे।(5, 6 और 11 से 16)
(ii) नेक लोगों की सिफ़ात
◆ रात को कम ही सोते हैं,
◆ सहर के वक़्त तहज्जुद में माफ़ी मांगते हैं,
◆ अपने माल में मांगने वालों और ग़रीब मजबूर का हिस्सा रखते हैं। (17 से 19)
(iii) इब्राहीम अलैहिस्सलाम और मेहमान
इब्राहीम अलैहिस्सलाम के पास कुछ फ़रिश्ते इंसानों की शक्ल में आए, उन्होंने ने उनके लिए एक भुना हुआ बछड़ा पेश किया जब फ़रिश्तों ने हाथ नहीं लगाया तो इब्राहीम अलैहिस्सलाम को डर लगा फ़रिश्तों ने कहा डरो नहीं हम तुम्हे एक बच्चे की ख़ुशख़बरी देने आए हैं यह सुन कर उनकी बीवी सारा ने हैरत से अपना चेहरा पीट लिया और कहा मैं तो बुढ़िया भी हूं और बांझ भी, फ़रिश्तों ने कहा यह तो तेरे रब का फ़ैसला है जो हकीम भी है और अलीम भी। (24 से 30)
(iv) पिछली क़ौमों पर अज़ाब
क़ौमे लूत, फ़िरऔन, उसके दरबारी और उसका दरया में डूबना, क़ौमे आद और उनपर आंधी का अज़ाब, क़ौमे समूद और उन पर बिजली और कड़क का अज़ाब, क़ौमे नूह की गुमराही, (32 से 46)
(v) कुछ अहम बातें
◆ अल्लाह की तरफ़ दौड़ पड़ो और शिर्क से बचो, (50, 51)
◆ एक दूसरे को नसीहत करते रहना चाहिए इस से मोमिन बंदों को फ़ायदा पहुंचता है,(55)
◆ इंसान और जिन्नात की तख़लीक़ का मक़सद अल्लाह की इबादत है न कि माल समेटना, अल्लाह किसी का मोहताज नहीं है, वह तो ख़ुद लोगों को रिज़्क़ देने वाला है। (56 से 58)
आसिम अकरम (अबु अदीम) फ़लाही
0 टिप्पणियाँ
कृपया कमेंट बॉक्स में कोई भी स्पैम लिंक न डालें।