Khulasa e Qur'an - surah 53 | surah an najm

Khulasa e Qur'an - surah | quran tafsir

खुलासा ए क़ुरआन - सूरह (053) अन नज्म


بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ


सूरह (053) अन नज्म 


(i) क्या नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने मेअराज में अल्लाह को देखा 

उम्मुल मोमेनीन आएशा सिद्दीक़ा रज़ियल्लाहु अन्हा ने फ़रमाया: जो शख़्स यह दावा करता है कि मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अपने रब को देखा था वह अल्लाह पर झूठ मंसूब करता है। मसरूक़ कहते हैं यह बात सुन कर में उठ बैठा और पूछा, उम्मुल मोमेनीन जल्दी न कीजिए। क्या अल्लाह ने यह नहीं फ़रमाया وَلَقَدْ رَاٰہُ بالْاُفُقِ الْمْبِیْنِ؟  

"उसने उसे रौशन उफ़क़ (क्षितिज) पर देखा" और وَلَقَدۡ رَءَاهُ نَزۡلَةً أُخۡرَىٰ؟ 

"उसने दूसरी बार नाज़िल होते देखा" उम्मुल मोमेनीन ने जवाब दिया इस उम्मत में सबसे पहले मैंने ही अल्लाह के रसूल से सवाल किया था तो उन्होंने फ़रमाया कि वह तो जिब्रील थे। मैंने उनको उनकी असल सूरत में दो बार (नबूवत के इब्तेदाई ज़माने में और मेअराज में सिदरतुल मुंतहा के पास) देखा जिसपर अल्लाह ने उनको पैदा किया है। मैंने उनको आसमान से उतरते हुए देखा कि उनकी अज़ीम हस्ती ज़मीन व आसमान के दरमियान तमाम फ़िज़ा पर छाई हुई थी। उन दो मौक़े के इलावा कभी असली सूरत में नहीं देखा। (ब हवाला सही मुस्लिम हदीस नंबर 439/किताबुल ईमान, आयत 6 से 18)


(ii) कुफ़्फ़ार के दीन की बुनियाद केवल मफ़रूज़े (परिकल्पना= hypothesis) पर क़ायम और अन्यायिक बंटवारा है 

इंसान भी क्या अजीब मख़लूक़ है कि अपने लिए तो बेटे पसंद करता है और फ़रिश्तों को अल्लाह की बेटियां कहता है। मुशरेकीन ने तीन बड़ी मूर्तियां लात, उज़्ज़ा, और मनात के नाम से बना रखी थीं और उन्हें वह ख़ुदा तक पहुंचने का वसीला समझते थे। (18 से 23)


(iii) जैसी कोशिश वैसा फल

इंसान इस दुनिया में जैसा भी अमल करेगा अल्लाह के यहां पूरा पूरा बदला मिलेगा (39)

         

(iv) अल्लाह ही तमाम कायनात (universe) का मालिक व मुख़्तार है

आख़िरी मंज़िल रब की जानिब ही है, अल्लाह ही हंसाता और रुलाता है, मौत और ज़िंदगी देता है, मर्द व औरत के नुत्फ़े को मिलाकर इंसान की तख़लीक़ करता है, मालदार बनाता और दौलत अता करता है, वही शेअरा (Dog Star) का रब है।

[शेअरा Dog Star एक सितारा है जो सूरज से 23 गुना ज़्यादा रौशन है अहले अरब का अक़ीदा था कि यह लोगों की क़िस्मत पर प्रभाव डालता है इसलिए उन्होंने इसे भी अपने माबूदों में शामिल कर लिया था] (49)


आसिम अकरम (अबु अदीम) फ़लाही

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