खुलासा ए क़ुरआन - सूरह (064) अत तग़ाबुन
सूरह (064) अत तग़ाबुन
(i) चार वास्तविकताएँ
◆ यह ब्रह्माण्ड जिसमें मानव रहते हैं इसका का एक ख़ुदा है और वह ऐसा है कि जिसके पूर्ण और बेऐब होने की गवाही इस कायनात की हर वस्तु दे रही है।
◆ यह कायनात बेकार और बग़ैर हिकमत के नहीं बनाई गई है अल्लाह ने इसे बरहक़ (सच) पैदा किया है।
◆ मानव को अल्लाह ने सर्वश्रेष्ठ सुरत दी है और कुफ़्र व ईमान के इख़्तियार की आज़ादी दी है इसका उद्देश्य यह है कि मानव अपने इख़्तियार को कैसे इस्तेमाल करता है।
◆ मानव इस धरती पर बे नकेल का ऊंट नहीं है। उसे अल्लाह की तरफ़ पलट कर जाना ही है। जो खुले छुपे तमाम कामों से भलीभांति वाक़िफ़ है। (1 से 7)
(ii) कमी बेशी का दिन (یَوۡمُ التَّغَابُنِ)
क़यामत के दिन का ज़िक्र मुख़्तलिफ़ नामों से हुआ है उसमें एक "यौमुत तग़ाबुन" भी है जो सबसे ज़्यादा भरपूर लफ़्ज़ है कि वहां जाकर पता चलेगा कि कौन नुक़सान में है और किसने फ़ायदा उठाया, किसका हिस्सा किसे मिल गया और कौन अपने हिस्से से महरूम रह गया, धोखा किसने खाया और कौन होशियार निकला। (9)
(iii) बीवियां और औलाद तुम्हारे दुश्मन
तुम्हारी बीवियां और औलाद तुम्हारे दुश्मन हैं उन से बचो, यानी अल्लाह के हुक़ूक़ की अदायगी में यह रुकावट न बनें। माल व औलाद तो इंसान की आज़माइश के लिए है। (14)
(iv) क़र्ज़े हसन
जो किसी ज़ाती ग़रज़ के बग़ैर ख़ालिस नियत के साथ दिया जाय, किसी क़िस्म का दिखावा और शुहरत व नामवरी की तलब शामिल न हो, उसे दे कर किसी पर एहसान न जताया जाय, सिर्फ़ अल्लाह की रज़ा के लिए हो उसके इलावा किसी और से अज्र व ख़ुशी की उम्मीद न की जाय। इस क़र्ज़ के मुतअल्लिक़ अल्लाह के दो वादे हैं। 1, उस को कई गुना बढ़ा कर वापस करेगा, 2, अपनी तरफ़ से बेहतरीन अज्र अता फ़रमाएगा। (18)
(v) कुछ अहम बातें
◆ हर मुसीबत अल्लाह के हुक्म से होती है इसलिए सब्र किया जाय।
◆ अल्लाह और उसके रसूल की इताअत शर्त है, रसूल पर तो केवल पैग़ाम पहुंचा देने की ज़िम्मेदारी है। (11, 12)
आसिम अकरम (अबु अदीम) फ़लाही
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