खुलासा ए क़ुरआन - सूरह (063) अल मुनाफ़िक़ून
सूरह (063) अल मुनाफ़िक़ून
(i) मुनाफ़ेक़ीन की सिफ़ात
ज़ाहिर और बातिन में फ़र्क़, ज़बान से इस्लाम का दावा और दिल में कुफ़्र, झूठी क़सम खाना, घमंड, लोगों को अल्लाह की राह में ख़र्च करने से रोकना, मौक़ा मिलते ही किसी की इज़्ज़ते नफ़्स पर हमला। (1 से 3, 7)
(ii) मुनाफ़ेक़ीन का अंजाम
अल्लाह मुनाफ़ेक़ीन की हरगिज़ मग़फ़िरत नहीं करेगा चाहे अल्लाह के रसूल ही क्यों न उनके लिए इस्तेग़फ़ार करें। (6) सूरह अत तौबा आयत 80 में है कि अगर नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम उन के लिए सत्तर बार भी मग़फ़िरत की दुआ करेंगे तो भी अल्लाह उन्हें हरगिज़ माफ़ नहीं करेगा।
(iii) इज़्ज़त वाला ज़िल्लत वाले को निकाल बाहर करेगा
ग़ज़वा ए बनी मुस्तलिक़ से वापसी के मौक़ा पर मुनाफ़ेक़ीन के सरदार अब्दुल्लाह बिन उबई ने कहा था कि मदीना पहुंचते ही हम में से इज़्ज़त वाला ज़िल्लत वाले को निकाल बाहर करेगा। उसका जवाब दिया है कि इज़्ज़त तो अल्लाह और उसके रसूल और मोमिनीन के लिए है। (8)
(iv) माल व औलाद आज़माइश हैं
माल व औलाद इंसान को अल्लाह के ज़िक्र से ग़ाफ़िल न कर दे जो ऐसा करेगा वह नुक़सान में होगा। (9)
(v) मौत से पहले मौत की तैयारी
मौत से पहले मौत की तैयारी करें क्योंकि जब मौत का वक़्त आ जायेगा तो फिर मुहलत नहीं मिलेगी। (11)
आसिम अकरम (अबु अदीम) फ़लाही
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