Khulasa e Qur'an - surah 45 | surah al jasiyah

Khulasa e Qur'an - surah | quran tafsir

खुलासा ए क़ुरआन - सूरह (045) अल जासिया


بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ


सूरह (045) अल जासिया 


(i) अल्लाह की निशानियां 

◆ मानव और अन्य जानवरों की पैदाइश, 

◆ रात और दिन का एक दूसरे के पीछे आना, 

◆ आसमान से रिज़्क़, 

◆ मुर्दा ज़मीन की दोबारा ज़िंदगी, 

◆ हवाओं का उलट फेर, 

◆ व्यापार में कश्ती का महत्व, 

◆ समुद्र और आसमान व ज़मीन के दरमियान की तमाम चीज़ों पर कंट्रोल, 

 (2 से 6, 12, 13, 22)


(ii) तबाही व बर्बादी है

◆ जो अल्लाह की आयत के मुक़ाबले में घमंड करते हैं, 

◆ अल्लाह की आयात का मज़ाक बनाते हैं,

◆ शिर्क करते हैं, 

◆ आयात और आख़िरत का इंकार करते हैं। 

(8 से 11 और 24, 32)


(iii) अपनी ख़्वाहिशात के पीछे चलने वालों का अंजाम

भला तुमने उस शख़्श के हाल पर ग़ौर किया जिसने अपनी नफ़सानी ख़्वाहिशात को ख़ुदा बना लिया और अल्लाह ने उसे इल्म के बावजूद गुमराही में फेंक दिया और उसके कान और दिल पर मुहर लगा दी, ऑंखों पर पर्दा डाल दिया। अब अल्लाह के इलावा कौन है जो उसे हिदायत दे?। (आयत 23)


(iv) हर गिरोह घुटनों के बल खड़ा होगा 

क़यामत के दिन हर गिरोह घुटनों के बल खड़ा होगा। उसको पुकारा जाएगा कि अपना आमाल नामा (कर्मपत्र) देखे, आज सब को उनके कर्म का बदला दिया जाएगा। और कहा जायेगा "यह हमारा तैयार कराया हुआ आमाल नामा है जो तुम्हारे बारे में बिल्कुल सटीक गवाही दे रहा है। जो कुछ भी तुम दुनिया में करते थे हम उसे लिखवाते जा रहे थे। (आयत 28, 29)


(v) अल्लाह की आयात का मज़ाक़ उड़ाने वालों का अंजाम

क़यामत के दिन अल्लाह की आयात का मज़ाक़ उड़ाने वाले उसी तरह भुला दिए जाएंगे जैसे उन्होंने क़यामत के दिन को भुला रखा था। उनका ठिकाना जहन्नम होगा और कोई उनकी मदद करने वाला नहीं होगा। (34)


आसिम अकरम (अबु अदीम) फ़लाही

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