Khulasa e Qur'an - surah 42 | surah ash shuraa

Khulasa e Qur'an - surah | quran tafsir

खुलासा ए क़ुरआन - सूरह (042) अश शूरा


بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ


सूरह (042) अश शूरा 


(i) शिर्क बड़ा ही घोर पाप है

किसी मख़लूक़ का सम्बंध अल्लाह से जोड़कर उसको अपना हिमायती और मददगार समझना इतना बड़ा जुर्म है कि क़रीब है कि आसमान उनके ऊपर फट पड़े और फ़रिश्ते शर्म के कारण कान पर हाथ रखकर यह सोचने लगते हैं कि जिसे अल्लाह ने अपनी इबादत के लिए पैदा किया था उस मख़लूक़ ने अल्लाह की धरती पर क्या कोहराम मचा रखा है? भला किसकी हैसियत है कि संसार के पालनहार की ख़ुदाई में किसी प्रकार भी शरीक हो सके। (5)


(ii) तमाम ख़ज़ानों का मालिक अल्लाह ही है

 لَهُۥ مَقَالِيدُ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِۖ يَبۡسُطُ ٱلرِّزۡقَ لِمَن يَشَآءُ وَيَقۡدِرُۚ

आसमानों और ज़मीन के ख़ज़ानों की कुंजियाँ अल्लाह के पास हैं वह जिसे चाहता है छप्पर फाड़ कर देता है और जिसे चाहता है नपा तुला देता है। (12)


(iii) दीन को क़ायम करने और फ़िरक़ों में तक़सीम न होने की नसीहत

अल्लाह ने नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के लिए वही तरीक़ा (दीन इस्लाम) मुक़र्रर किया है जिसका हुक्म नूह, इब्राहीम, मूसा और ईसा को इस ताकीद के साथ दिया जा चुका है कि أَقِيمُواْ ٱلدِّينَ وَلَا تَتَفَرَّقُواْ فِيهِۚ दीन को क़ायम करो और फ़िरक़ों में तक़सीम न हो। (13)


(iv) अल्लाह की क़ुदरत

◆ बारिश का नाज़िल होना, 

◆ रिज़्क़ का इंतेज़ाम, 

◆ आसमान और ज़मीन की तख़लीक़, 

◆ जानवरों की पैदाइश, 

◆ जानवरों को एक जगह अनेक परिस्थितियों में इकट्ठा कर देना, 

◆ समुद्र में हवा के सहारे कश्ती का चलना, हर चीज़ के जोड़े जोड़े, 

(11, 27, 28, 29, 32, 33)


(v) मोमिन का काम

◆ अल्लाह के दीन की दावत, 

◆ इस्तेक़ामत (दीन पर मज़बूती से क़ायम रहना) 

◆ स्वार्थी इच्छाओं से ख़ुद को बचाये रखना, 

◆ अल्लाह की नाज़िल की हुई तमाम किताबों पर ईमान, 

◆ अदल व इंसाफ़ क़ायम करना,

◆ अल्लाह की ज़ात पर ही भरोसा रखना, 

◆ गुनाहे कबीरा (बड़े गुनाह) और गंदे कामों से बचना, 

◆ ग़ुस्से को पी जाना, 

◆ किसी भी मामले को आपस में मशविरे से तय करना, 

◆ नमाज़ क़ायम करना, 

◆ अल्लाह के रास्ते मे ख़र्च करना 

(आयत 13, 15, 36,37,38)


(vi) औलाद देना सिर्फ़ अल्लाह के इख़्तियार में है

आसमान व ज़मीन की हुकूमत ख़ास अल्लाह ही की है जो चाहता है पैदा करता है। जिसे चाहता है केवल बेटियाँ देता है और जिसे चाहता है सिर्फ़ बेटा अता करता है। जिसे चाहता है बेटे बेटियाँ दोनों इनायत करता है और जिसे चाहता है बांझ बना देता है बेशक वह बड़ा वाकिफ़कार (असली पहचान रखने वाला) और क़ादिर है। (49, 50) 


(vii) कलामे इलाही की तीन सूरतें

وَمَا كَانَ لِبَشَرٍ أَن يُكَلِّمَهُ اللَّهُ إِلَّا وَحْيًا أَوْ مِن وَرَاءِ حِجَابٍ أَوْ يُرْسِلَ رَسُولًا فَيُوحِيَ بِإِذْنِهِ مَا يَشَاءُ ۚ إِنَّهُ عَلِيٌّ حَكِيمٌ

किसी आदमी के लिए ये मुमकिन नहीं कि अल्लाह उससे बात करे मगर वही (وحی) के ज़रिए या परदे के पीछे से या कोई फ़रिश्ता भेज दे। ग़रज़ वह अपने इख़्तियार से जो चाहता है पैग़ाम भेज देता है बेशक वह आलीशान हिकमत वाला है। (आयत 51)


आसिम अकरम (अबु अदीम) फ़लाही

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

क्या आपको कोई संदेह/doubt/शक है? हमारे साथ व्हाट्सएप पर चैट करें।
अस्सलामु अलैकुम, हम आपकी किस तरह से मदद कर सकते हैं? ...
चैट शुरू करने के लिए यहाँ क्लिक करें।...