Khulasa e Qur'an - surah 32 | surah as sajda

Khulasa e Qur'an - surah | quran tafsir

खुलासा ए क़ुरआन - सूरह (032) अस सज्दा


بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ


(4) सूरह (032) अस सज्दा मकम्मल 

 

(i) क़ुरआन की अज़मत

क़ुरआन तमाम दुनिया के पालनहार की जानिब से नाज़िल की गई किताब है जिसमें शक की कोई गुंजाइश नहीं, और यही तेरे रब की जानिब से हक़ है। (2, 3)


(ii) तैहीद

● आसमान व ज़मीन और उसके दरमियान मौजूद तमाम चीज़ों का ख़ालिक़ अल्लाह ही है और ग़ैब व हाज़िर का मालिक भी। 

● हर काम की तदबीर वही करता है। 

● इंसान की तख़लीक़ पहले मिट्टी से फिर पानी के एक हक़ीर क़तरे (वीर्य) से की, उसको परवान चढ़ाया, रूह फूंकी,और कान आंख और दिल देकर उसे इन्तेहाई आकर्षक सूरत और मुनासिब क़द व क़ामत वाला बनाया। (4 से 9)


(iii) क़यामत

मुजरिम उस दिन सिर झुकाए खड़े होंगे, उनपर ज़िल्लत छाई हुई होगी। वह दुनिया में वापस आने की तमन्ना करेंगे और मोमिन जो दुनिया में अल्लाह के लिए अपने आराम को क़ुर्बान करते हैं अल्लाह के पास उनके लिए ऐसी नेअमतें हैं जिसका तस्व्वुर भी दुनिया में लोग नहीं कर सकते। (12)


(iv) मोमिन कौन?

● जब अल्लाह का ज़िक्र किया जाता है तो सज्दे में गिर पड़ते हैं। 

● अपने रब की हम्द व सना (तारीफ़) बयान करते हैं। 

● घमंड नहीं करते 

● जिनके पहलू बिस्तर से दूर रहते हैं और दुआ करते हैं और अपने रब को ख़ौफ़ व उम्मीद के दरमियान पुकारते है। 

● अल्लाह ने जो माल उन्हें दिया है उसमें से ख़र्च करते हैं। (15, 16)


आसिम अकरम (अबु अदीम) फ़लाही

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