खुलासा ए क़ुरआन - सूरह (030) अर रूम
सूरह (030) अर रूम
(i) दो भविष्यवाणीयां
615 ईसवी में ईरान के बादशाह ख़ुसरो परवेज़ ने रोम की ईंट से ईंट बजा दी और एक बड़ी सल्तनत का तक़रीबन ख़ात्मा कर दिया, क़ैसर को भाग कर कर्ताजिन्ना Carthage (जो अब तूनिस Tunisia देश है) में पनाह लेनी पड़ी। यही वह साल था जब हिजरत हब्शा हुई। चूंकि रूमी अहले किताब थे इसलिए मुसलमानों की उम्मीदें उनके साथ थीं दूसरी तरफ़ कुफ़्फ़ारे मक्का ईरान की जीत सुनकर मुसलमानों को यह धमकी दे रहे थे कि जिस तरह ईरानियों ने रूमियों का ख़ात्मा कर दिया है उसी तरह हम भी तुम्हें मिटा देंगे। इन हालात में सूरह रूम नाज़िल हुई जिसमें एक के बजाय दो भविष्यवाणी थी। "अगरचा रूमी परास्त हो गए हैं लेकिन चंद वर्षों के अंदर वह ग़ालिब हो जाएंगे और उस दिन मुसलमान भी खुशियां मना रहे होंगे। (आयत 02 से 05) चुनाँचे 624 ईसवी में जब क़ैसर ने आज़रबाईजान में घुसकर ज़रतुस्त (Zoroaster) के मुक़ाम पैदाइश अरमिया (Clorumia) को तबाह कर दिया। यही वह साल है जिसमें मुसलमानों को बद्र के मुक़ाम पर ज़बरदस्त फ़तह नसीब हुई। और जब क़ैसर ने पूरे ईरान पर क़ब्ज़ा कर लिया और ख़ुसरो परवेज़ अपने ही घर में अपने बेटों के हाथ क़त्ल हुआ उसी साल मक्का फ़तह हुआ।
(ii) तौहीद के संदर्भ में अल्लाह की अज़मत की दस निशानियां
● अल्लाह ही ज़िन्दा को मुर्दा से और मुर्दे को ज़िन्दा से निकालता है, मुर्दा ज़मीन को ज़िन्दा करता है और आख़िरत के दिन इस ज़मीन से तुम्हें निकाल खड़ा करेगा। (19)
● उस की निशानियों में ये भी है कि उसने तुमको मिट्टी से पैदा किया फिर तुम आदमी बनकर चलने फिरने लगे। (20)
● उस की निशानियों में से एक यह है कि उसने तुम्हारे वास्ते तुम्हारी ही जिन्स की बीवियाँ पैदा की ताकि तुम उनके साथ रहकर चैन करो और तुम लोगों के दरमियान प्यार और उलफ़त पैदा कर दी। (21)
● उस की निशानियों में आसमानों और ज़मीन का पैदा करना और तुम्हारी ज़बानों और रंगों का एख़तेलाफ़ भी है। (22)
● रात को तुम्हारे लिए नींद और दिन को अपने फ़ज़ल व करम (रोज़ी) की तलाश के लिए बनाया। (23)
● उस की निशानियों में से यह भी है कि वह तुमको डराने और उम्मीद दिलाने के वास्ते बिजली दिखाता है और आसमान से पानी बरसाता है और उसके ज़रिए से ज़मीन को उसके परती (मुर्दा) होने के बाद आबाद करता है। (24)
● उस की निशानियों में से एक यह भी है कि आसमान और ज़मीन उसके हुक्म से क़ायम हैं फिर (मरने के बाद) जिस वक़्त तुमको एक बार बुलाएगा तो तुम सबके सब ज़मीन से (ज़िन्दा हो होकर) निकल पड़ोगे। (25)
● अल्लाह ही है जिसका रिज़्क़ चाहता है बढ़ा देता है और जिसका चाहता है तंग कर देता है। (37)
● उसकी निशानियों में से एक यह भी है कि वह हवाओं को (बारिश) की ख़ुशख़बरी के वास्ते भेज दिया करता है ताकि तुम्हें अपनी रहमत की लज्ज़त चखाये और इसलिए भी कि कश्तियां उसके हुक्म से चल खड़ी हों ताकि तुम उसके फज़ल व करम से (अपनी रोज़ी) की तलाश करो। (आयत 46)
● अल्लाह ही है जिसने तुमको कमज़ोर (दुर्बल) पैदा किया फिर ताक़त बख़्शी। और फिर ताक़त के बाद दुर्बल और बुढ़ापे की हालत में पहुंका देता है। वह जो चाहता है पैदा करता है। (54)
आसिम अकरम (अबु अदीम) फ़लाही
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