Khulasa e Qur'an - surah 68 | surah al qalam

Khulasa e Qur'an - surah | quran tafsir

खुलासा ए क़ुरआन - सूरह (068) अल क़लम 


بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ


सूरह (068) अल क़लम 


(i) नबी के अख़लाक़ की गवाही

ऐ नबी! आप अपने रब के फ़ज़ल से मजनूं नहीं हैं, आपके लिए तो न ख़त्म होने वाला अज्र है, आप तो अख़लाक़ की अज़ीम बुलंदी पर विराजमान हैं। (2 से 4)


(ii) वलीद बिन मुग़ीरह की दस सिफ़ात 

1. झूठा 
 2. बहुत ज़्यादा क़समें खाने वाला 
3. कमीन 
4. ताने देने वाला 
5. चुग़लखोर 
6. भलाई से रोकने वाला 
7. ज़ुल्म व ज़्यादती में हद से आगे बढ़ जाने वाला 
8. बुरे अमल करने वाला 
9.बहुत ज़्यादा मॉल व औलाद वाला, 
10, बद असल (हरामी) 
(8 से 15)

जब यह आयत नाज़िल हुई तो वलीद बिन मुग़ीरह ने अपनी माँ से जाकर कहा कि मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने मेरे बारे में दस बातें बताई हैं। नौ को मैं जानता हूँ कि मुझ में मौजूद हैं लेकिन दसवीं बात बदअस्ल (हरामी) होने की, इसका हाल मुझे मालूम नहीं। अब तू या तो मुझे सच सच बता दे वरना मैं तेरी गर्दन अभी उड़ा दूँगा। इस पर उसकी मां ने कहा कि तेरा पिता मुग़ीरह नपुंसक था मुझे अंदेशा हुआ कि वह मर जाएगा तो उसका माल दूसरे उड़ा ले जाएंगे तब मैंने एक चरवाहे को बूला लिया। तू उसी चरवाहे की औलाद है। (कंज़ुल ईमान फ़ी तरजमतिल क़ुरआन, हाशिया नईमुद्दीन मुरादाबादी तफ़्सीर सूरह अल क़लम)


(iii) बाग़ वालों का वाक़िआ 

कुछ लोग जिन का एक बाग़ था जिसमें ख़ूब फल लगे हुए थे फिर फ़सल पक गई तो उन्होंने आपस में मशविरा किया कि वह कल सुबह फल तोड़ लेंगे। उनको इतना घमंड हो गया था कि इन शा अल्लाह भी नहीं कहा और नीयत इतनी ख़राब हो गई थी कि वह सुबह अंधेरे ही निकले तो एक दूसरे से यह कानाफूसी कर रहे थे कि आज हरगिज़ कोई मिस्कीन खेत में दाख़िल न होने पाए। इसका अंजाम यह हुआ कि अल्लाह ने रातों रात आफ़त भेज दी और वह पूरा बाग़ कटी हुई फ़सल की तरह हो गया। जब उन्होने बाग़ की यह हालत देखी तब उन्हें ख़ुदा याद आया। ऐसे ही अज़ाब आता है और आख़िरत का अज़ाब तो और भी सख़्त होगा। (17 से 33)


(iv) रसूल को नसीहत

◆ सब्र करें, 

◆ मछली वाले (यूनुस अलैहिस्सलाम) की तरह जल्दबाज़ी न करें, 

◆ काफ़िर तुम्हारे क़दम डगमगा न दें। 

(48, 51)


आसिम अकरम (अबु अदीम) फ़लाही

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