Khulasa e Qur'an - surah 67 | surah al mulk

Khulasa e Qur'an - surah | quran tafsir

खुलासा ए क़ुरआन - सूरह (067) अल मुल्क 


بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ


सूरह (067) अल मुल्क 


(i) मौत और ज़िंदगी का मक़सद

मौत और ज़िंदगी का मक़सद इंसान की आज़माइश है कि कौन अच्छे अमल करने वाला है। (2)


(ii) सोचने व ग़ौर करने की दावत

सात आसमान की अनोखी तख़लीक़, उसको सितारों से सजाना, शैतान की पहुंच से दूर रखना, ज़मीन को वश में करना, पक्षियों का पर फैला कर उड़ना और उन्हें समेट लेना, इंसान की पैदाइश और उसके कान, आँख और दिल जैसे अहम पार्ट। (3, 15, 19, 23)


(iii) जहन्नम के दारोग़ा का सवाल

जब कोई गिरोह जहन्नम में डाला जाएगा तो दारोग़ा उस से पूछेगा कि तुम्हारे पास कोई डराने वाला नहीं आया फिर वह ख़ुद अपने ख़िलाफ़ गवाही देंगे। (8)


(iv) कौन है जो समस्याओं का समाधान कर सके

अगर अल्लाह तुम्हारे साथ ज़मीन को धंसा दे, आसमान से पत्थर बरसा दे, रिज़्क़ को रोक ले, पानी को ज़मीन की सतह से ग़ायब कर दे तो फिर कौन है जो इन समस्याओं का समाधान कर सके। (16, 17, 21, 30)


आसिम अकरम (अबु अदीम) फ़लाही

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