Khulasa e Qur'an - surah 29 | surah al ankaboot

Khulasa e Qur'an - surah | quran tafsir

खुलासा ए क़ुरआन - सूरह (029) अल अंकबूत


بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ


सूरह (029) अल अंकबूत 


(i) मोमिनों की आज़माइश

जो ईमान लाने का दावा करते हैं उन्हें ज़रूर आज़माया जाएगा ताकि पता चल सके कि कौन अपने दावे में सच्चा है और कौन झूठा। (03)


(ii) रिसालत 

नूह अलैहिस्सलाम की साढ़े नौ सौ वर्ष दावत फिर भी बहुत कम लोग ईमान लाए और अल्लाह के अज़ाब के शिकार हुए, इब्राहीम अलैहिस्सलाम की अपने क़बीले में दावत सिर्फ़ लूत अलैहिस्सलाम और उनकी पत्नी सारा रज़ियल्लाहु अन्हा ईमान लाए, ऐसे ही लूत, और शुऐब अलैहिमुस्सलाम की अपनी क़ौम को दावत और क़ौम का इंकार और अज़ाब में पड़ना, आद व समूद की हिलाकत। इन वाक़िआत के ज़रिए एक तरफ़ तो नबी को तसल्ली दी गई है तो दूसरी तरफ़ कुफ़्फ़ार व मुशरेकीन को डराया भी गया है कि उन्हीं क़ौमों जैसा तुम्हारा भी अंजाम हो सकता है। (14 से 38)


(iii) घमंड का अंजाम

फ़िरऔन, हामान, और क़ारून ने घमंड किया और अपना अंजाम चख लिया, आख़िरत में उनका अंजाम और भी बुरा होगा। (39)


(iv) शिर्क की मिसाल मकड़ी से

जिन लोगों ने अल्लाह को छोड़कर दूसरे को अपना सरपरस्त बना रखा उनकी मिसाल मकड़ी की सी जो अपना एक घर बनाती है और सबसे कमज़ोर घर मकड़ी का ही होता है काश यह लोग इल्म रखते। (41)

सभी जानते हैं कि मकड़ी का घर कितना कमज़ोर होता है लेकिन आधुनिक विज्ञान ने एक रिसर्च में यह साबित किया है कि मकड़ी sex के बाद मकड़े को जान से मार डालती है फिर जब बच्चे बड़े होते हैं तो वह मां को मार डालते हैं


(v) नमाज़ बेहयाई और बुरे कामों से रोकती है

 यानी अगर एक इंसान नमाज़ भी पाबंदी से पढ़ता है और बुरे व गन्दे कामों में भी पड़ा हुआ है तो इसका मतलब यह कि वह नमाज़ सही ढंग से अदा नहीं करता। वह सिर्फ़ दुनिया वालों की नज़र में नमाज़ी है। उसे अपने पेट में गए लुक़मे से कपड़े व दीगर चीज़ों का जायज़ा लेना चाहिए। (45)


(vi) नबी के उम्मी होने (लिखना पढ़ना न जानने) की दलील

(ऐ नबी) तुम इस क़ुरआन से पहले कोई किताब नहीं पढ़ते थे और न कुछ अपने हाथ से लिख सकते थे। अगर ऐसा होता तो असत्य को पूजने वाले लोग सन्देह में पड़ सकते थे। (48)


(vii) हर जान को मौत का मज़ा चखना है 

मौत से बच कर कोई भाग नहीं सकता। और यह भी तय है कि मौत के बाद भी दूसरी ज़िन्दगी (परलोक) है जहां इस दुनिया में किये गए कामों का हिसाब देना है। (57)


(viii) कुफ़्फ़ार की हठधर्मी

कुफ़्फ़ार को इस बात का ख़ूब ख़ूब यक़ीन है कि दुनिया और दुनिया की हर छोटी बड़ी चीज़ को अल्लाह ने ही बनाया है। यही वजह है कि जब उनसे पूछा जाता है "आसमान और ज़मीन को पैदा करने वाला, सूरज व चांद को कंट्रोल वाला, आसमान से बारिश बरसाने वाला, और मुर्दा पड़ी हुई ज़मीन को हरा भरा करने वाला कौन है? और जब कश्तियाँ भंवर में फंस कर हचकोले खाने लगती हैं तो तुम किसे पुकारते हो तो वह फ़ौरन जवाब देते है "अल्लाह" लेकिन इसके बावजूद ईमान नहीं लाते। (61 से 63)


(ix) दुनिया की ज़िंदगी तो बस खेल तमाशा है

असल जिंदगी तो आख़िरत की है इसलिए उसकी तैयारी हर वक़्त करते रहना चाहिए।(64)


आसिम अकरम (अबु अदीम) फ़लाही

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