Khulasa e Qur'an - surah 22 | surah al hajj

Khulasa e Qur'an - surah | quran tafsir

खुलासा ए क़ुरआन - सूरह (022) अल हज्ज


بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ


सूरह (022) अल हज्ज 


(i) क़यामत

क़यामत की हौलनकियों का दिल दहलाने वाला तज़किरा है, imaginary इतनी ज़बरदस्त है कि ऐसा महसूस होता कि हम अपनी आंखों के सामने देख रहे हों। दूसरी ही आयत है:

"जिस दिन तुम उसे (क़यामत के ज़लज़ले को) देखोगे तो हर दूध पिलाने वाली अपने दूध पीते बच्चे को भूल जायेगी और सभी गर्भवती (pregnant) महिलाएं अपने अपने गर्भ गिरा देंगी और लोग तुझे नशे में धुत लगेंगे हालाँकि वह नशे में नहीं होंगे बल्कि अल्लाह का अज़ाब ही इतना सख़्त होगा (2)


(ii) इंसान की तख़लीक़ (creation) के सात मराहिल (step)

يَا أَيُّهَا النَّاسُ إِن كُنتُمْ فِي رَيْبٍ مِّنَ الْبَعْثِ فَإِنَّا خَلَقْنَاكُم مِّن تُرَابٍ ثُمَّ مِن نُّطْفَةٍ ثُمَّ مِنْ عَلَقَةٍ ثُمَّ مِن مُّضْغَةٍ مُّخَلَّقَةٍ وَغَيْرِ مُخَلَّقَةٍ لِّنُبَيِّنَ لَكُمْ ۚ وَنُقِرُّ فِي الْأَرْحَامِ مَا نَشَاءُ إِلَىٰ أَجَلٍ مُّسَمًّى ثُمَّ نُخْرِجُكُمْ طِفْلًا ثُمَّ لِتَبْلُغُوا أَشُدَّكُمْ ۖ وَمِنكُم مَّن يُتَوَفَّىٰ وَمِنكُم مَّن يُرَدُّ إِلَىٰ أَرْذَلِ الْعُمُرِ لِكَيْلَا يَعْلَمَ مِن بَعْدِ عِلْمٍ شَيْئًا ۚ

लोगो अगर तुमको मरने के बाद दोबारा जी उठने में किसी तरह का शक है तो जान लो कि हमने तुम्हें पहले मिट्टी से, फिर नुत्फ़े (मनी) से, फिर जमे हुए ख़ून से, फिर लोथड़े से जो पूरा (सूडौल हो) या अधूरा हो पैदा किया ताकि तुम पर (अपनी कुदरत) ज़ाहिर करें और हम औरतों के पेट में जिस (नुत्फ़े) को चाहते हैं एक मुद्दत मुअय्यन (specified term) तक ठहरा रखते हैं फिर तुमको बच्चा बनाकर निकालते हैं फिर तुम अपनी जवानी को पहुँचते हो और तुममें से कुछ लोग बुढ़ापे से पहले मर जाते हैं और कुछ उम्र के उस आख़िरी हिस्से में लौटा दिए जाते हैं जहां वह सब कुछ जानने के बावजूद कुछ भी जानने के लायक नहीं रहते। यानी, मिट्टी, मनी, लोथड़ा, बोटी, बच्चा, जवान, बूढ़ा, (5) 


(iii) मिल्लत और धर्म के लिहाज़ से छह गिरोह

मुस्लिम, यहूदी, साबी (सितारों को पूजने वाले), ईसाई, मजूसी (सूरज, चांद और आग के पुजारी), मुशरिक, (17)


(iv) इब्राहीम अलैहिस्सलाम का ऐलाने हज्ज

पहले दिन से ही काबा की बुनियाद तौहीद पर रखी गई है। अल्लाह ने इब्राहीम अलैहिस्सलाम को ख़ाना ए काबा की जगह दिखा दी कि इस घर की तामीर करें और उपदेश दिया गया कि अल्लाह के साथ किसी को शरीक (साझी) न ठहराया जाय। और दूर दूर से आकर तवाफ़, क़याम, रुकूअ और सज्दा करने वालो के लिए साफ़ सुथरा रखें। और लोगों में हज्ज का ऐलान कर दें कि लोग तुम्हारे पास (जूक दर जूक) ज़्यादा और हर तरह की दुबली सवारियों पर (जो दूर दराज़ का रास्ता तय करके आयी होगी चढ़-चढ़ के) आ पहुँचेगें। फिर हज्ज के अरकान भी बताए गए हैं। (26 से 34)


(v) मोमिन (मुख़्बेतीन) की पांच निशानियां

● जब अल्लाह का ज़िक्र हो तो ख़ौफ़ से उनके दिल कांप उठते हैं। 
● मुसीबत पर सब्र करते हैं। 
● नमाज़ क़ायम करते हैं। 
● अल्लाह के रास्ते में दिल खोल कर ख़र्च करते हैं। 
● भलाई का हुक्म देते हैं और बुराई से रोकते हैं। 

(35)


(vi) अल्लाह को तक़वा पसंद है दिखावा नहीं

हज्ज में या वैसे जो क़ुरबानी की जाती है उसका गोश्त और ख़ून अल्लाह को नहीं पहुंचता बल्कि तक़वा (सही नियत) पहुंचता है और यही मामला हर काम के सिलसिले में है अगर नीयत ठीक है तो तक़वा वरना दिखावा में गिनती होगी। (37)


(vii) मुशरेकीन और उनके माबूद कितने कमज़ोर हैं

मुशरेकीन अल्लाह को छोड़ कर जिनके आगे नतमस्तक होते हैं उनका हाल तो यह है कि वह सब मिलकर भी एक मक्खी नहीं बना सकते बल्कि मक्खी उनसे कुछ उड़ा ले जाए तो वह उसे छुड़ा भी नहीं सकते । हक़ीक़त तो यह है कि उन्होंने अल्लाह की कद्र ही न जानी जैसा जानने का हक़ था। (73)


(viii) मुस्लिम नाम रखा

अल्लाह तआला ने तमाम इंसानों में से कुछ को मुन्तख़ब किया कि वह अल्लाह की ज़मीन पर अल्लाह का क़ानून नाफ़िज़ करने के लिए हर मुमकिन कोशिश करें, अल्लाह ने उस गिरोह का नाम पहले से ही मुस्लिम रखा है इसलिए तमाम मुसलमानों को चाहिए कि कोई और title न लगाएं बल्कि ख़ुद को मुस्लिम का ही नाम दें। (78)


आसिम अकरम (अबु अदीम) फ़लाही

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