खुलासा ए क़ुरआन - सूरह (023) अल मुमेनून
सूरह (023) अल मुमेनून
(i) जन्नतुल फ़िरदौस के वारिस
2, नमाज़ में खुशुअ इख़्तियार करने (झुकने) वाले.
3, फ़िज़ूल बातों से परहेज़ करने वाले.
4, ज़कात अदा काने वाले.
5, शर्मगाह की हिफ़ाज़त करने वाले.
6, अमानत को हिफ़ाज़त के साथ लौटाने वाले.
7, वादा को पूरा करने वाले.
8, नमाज़ों की हिफ़ाज़त करने वाले।
(1 से 11)
(ii) इंसान की तख़लीक़ के नौ मराहिल
2, मनी (वीर्य)
3, जमा हुआ ख़ून (भ्रूण)
4, मांस का लोथड़ा
5, हड्डी
6, गोश्त का लिबास
7, सर्वश्रेष्ठ मख़लूक़ (इंसान)
8, मौत
9, दोबारा ज़िंदगी
(12 से 16)
(iii) तौहीद के दलाएल
एक के बाद एक सात आसमान की तख़लीक़, एक नियमित रूप से बारिश, बाग़ात, मेवे और ग़ल्ला, चौपाए और उनके अनेक फ़ायदे, कश्ती (17 से 22)
(iv) अंबिया के वाक़िआत
● नूह अलैहिस्सलाम, उनकी कश्ती और इंकार करने वालों पर पानी का अज़ाब। (23 से 27)
● हूद अलैहिस्सलाम की दावत और क़ौमे आद पर तेज़ हवा का अज़ाब। (आयत 33)
● मूसा और् हारून अलैहिमस्सलाम का बयान।
● ईसा अलैहिस्सलाम और उनकी वालिदह मरयम का ज़िक्र (45 से 49)
तमाम रसूलों की एक ही दावत कि अल्लाह की बंदगी करो क्योंकि वही तुम्हारा माबूद है लेकिन तमाम क़ौमों ने एक जैसा ही काम किया कि दीन को टुकड़े टुकड़े करके फ़िरक़ों में बंट गए। और हर फ़िरके के पास जो कुछ है उसी में मगन है। (52, 53)
(v) नेक लोगों की पांच सिफ़ात
● अल्लाह से डरते हैं
● शिर्क और दिखावे से बचते हैं
● नेकी की वजह से दिल ही दिल में अल्लाह से डरते हैं कि उन्हें अल्लाह के पास जाना है,
● भलाई के कामों में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेते हैं।
(57 से 61)
(vi) दावत के इंकार की असल वजह
कुफ़्फ़ार के इंकार करने और झुठलाने की वजह न तो यह है कि आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) पिछले अंबिया से अलग कोई नई बात लेकर आए हैं न आप के बुलंद अख़लाक़ उन लोगों से छुपे हुए हैं, और न सच मुच आप को (मुआज़ अल्लाह) मजनुं समझते हैं और न इंकार की वजह यह है कि आप उनसे कोई बदला चाह रहे हैं। बल्की असल वजह तो यह है कि जो दीन आप लेकर आए हैं वह उनकी ख़्वाहिशात के ख़िलाफ़ है। इसलिए झुठलाने के मुख़्तलिफ़ बहाने बना रहे हैं। (68 से 74)
(vii) अल्लाह को संसार का ख़ालिक़ तो मानते हैं मगर तस्दीक़ नहीं करते
कुफ़्फ़ार से अगर पूछा जाय कि ज़मीन और ज़मीन में जो कुछ है वह किसका है? सात आसमानों, और अर्शे अज़ीम (महा सिंहासन) का स्वामी कौन है? तमाम चीज़ों का अधिकार किसके हाथ में है और कौन है जो शरण देता है और उसके मुक़ाबले में कोई शरण नहीं दे सकता, तो उनका जवाब यही होगा कि "वह तो अल्लाह ही है" (84 से 89)
(viii) अंबिया पर तमाम क़ौमों के एक ही जैसे इल्ज़ाम
● वह भी तुम्हारे जैसा खाता पीता है,
● थोड़ा पाग़लपन का शिकार है,
● अल्लाह के नाम पर झूठ बोल रहा है,
● इसकी बातें तो पिछलों की मनघड़ंत कहानियां हैं।
● क्या हम मर कर मिट्टी और हड्डी रह जाएंगे तो दोबारा उठाये जाएंगे।
(33 से 38, 45)
(ix) क़यामत का तज़किरा
क़यामत के दिन इंसान के आमाल वज़न किये जायेंगे, जिसके आमाल का पलड़ा वज़नी होगा वही कामयाब है और जिसके आमाल का पलड़ा हल्का होगा वह फ़ेल होगा। (102 से 105)
आसिम अकरम (अबु अदीम) फ़लाही
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