Namaz ki shartein

Namaz ki shartein


नमाज़ की शर्तें

दुनिया में हर काम को करने के लिए कुछ शर्तें होती हैं जिसे पूरी किए बगैर हम वह काम नहीं कर सकते जैसे हमें डॉक्टर बनना है तो एडमिशन लेने के लिए पहले हमें बायो से सेकेंडरी पास करना पड़ेगा इसी तरह इंजीनियर बनना है तो मैथमेटिक्स से सेकेंडरी पास आउट होना पड़ेगा। इसी तरह नमाज की कुछ शर्तें होती हैं जिनको पूरी किए बगैर नमाज नहीं हो सकते। वह शर्तें यह है-

1. नमाज का वक़्त होना

2. बदन का पाक होना

3. कपड़ों का पाक होना

4. नमाज पढ़ने की जगह का पाक होना

5. सतर छुपा हुआ होना

6. वुजू़ या गुस्ल

7. किबला की तरफ मुंह होना

8. नमाज की नियत करना


1. नमाज का वक़्त होना

नमाज पढ़ने के लिए सबसे पहले नमाज के वक्त का होना जरूरी है यानी पांचो फर्ज नमाज़े अलग अलग वक्त पर पढ़ी जाती है। फज्र के वक्त में फज्र और ईशा के वक्त में ईशा। हम दोनों नमाजो़ को उलटफेर नहीं कर सकते इसलिए जिस नमाज़ का वक्त होगा वही नमाज पढ़ी जाएगी। वक्त शुरू होने से पहले कोई भी नमाज नहीं पढ़ी जा सकती है और वक्त खत्म होने के बाद जो नमाज पढ़ी जाती है वह कज़ा नमाज़ मानी जाती है।

अल्लाह तआला फरमाता है, 

"यक़ीनन नमाज मोमिनो पर मुकर्रर वक्त पर फर्ज है।" [कुरान 4: 103] 


2. बदन का पाक होना

नमाज पढ़ने के लिए बदन का पाक होना बेहद जरूरी है यानी बदन पर किसी तरह की गंदगी ना लगी हो जैसे पेशाब, पखाना, हैज़ का खून, कुत्ते का लुआब वगैरा।


3. कपड़ों का पाक होना

जिस तरह नमाज के लिए बदन का पाक होना जरूरी है उसी तरह कपड़ों का भी पाक होना जरूरी है। कपड़ों के पाक होने का मतलब यह नहीं कि कपड़े अगर पसीने की वजह से गंदे हो तो आप नमाज ना पड़े बल्कि पेशाब, पखाना, हैज़ का खून, कुत्ते का लुआब वगैरा लगा हो तो कपड़े बदल कर नमाज पढ़ लें।


4. नमाज पढ़ने की जगह का पाक होना

घर के जिस हिस्से में भी नमाज पढ़ी जा रही हो वह जगह पाक साफ होनी चाहिए। वहां किसी तरह की कोई गंदगी या नापाकी ना हो और अगर हो तो उसे धोकर साफ कर लेना चाहिए फिर नमाज पढ़े।


5. सतर छुपा हुआ होना

नाफ और घुटने के दरमियानी हिस्से (रान/thigh) को मर्द का सतर कहते हैं। नमाज में सतर का ढका होना जरूरी है इसके साथ ही कंधों का भी ढका होना जरूरी है। 

"जो नाफ और घुटने के दरमियान है वह सतर है।" [ मुस्तदरक हाकिम 6684]

"तुम में से कोई भी हरगिज़ नमाज ना पढ़े एक लिबास में जिसका कोई भी हिस्सा उसके कंधों पर ना हो।" [नसाई 769]


औरत को चाहिए कि वह अपने सर से लेकर पैर तक खुद को ढक कर नमाज़ पढ़े। 

"जो औरत हैज़ की उम्र तक पहुंच चुकी है उसकी नमाज़ अल्लाह नहीं कबूल करता है जब तक कि वह अपना खिमार ना पहनी हो।" [अबू दाऊद 641]

अगर नमाज में मर्द और औरत का सतर दिख जाए तो नमाज नहीं सही नहीं मानी जा सकती।  

"ऐ आदम की औलाद¡ हर (मस्जिद) नमाज़ के वक्त अपनी जी़नत इख्तियार कर लिया करो।" [कुरान 7: 31] 


6. तहारत (वुजू़ या गुस्ल) 

इस्लाम में दो तरह की तहारत है छोटी तहारत जिसे वुजू़ कहते हैं और बड़ी तहारत जिसे गुस्ल कहते हैं। मनी खारिज होना, शौहर बीवी के जिस्मानी ताल्लुकात होने पर गुसल करना वाजिब है जबकि पेशाब पखाने से फारिग़ होना, गहरी नींद में सो जाना, प्राइवेट पार्ट को बगैर आढ़ के छू लेने या हवा खारिज हो जाने पर वुजू़ किया जाएगा। 

"अल्लाह बगैर तहारत के नमाज़ कबूल नहीं करता।" [सहीह मुस्लिम 224]


7. किबला की तरफ मुंह होना

नमाज किबला की तरफ मुंह करके पढ़नी चाहिए। मस्जिद में इस तरह से इंतजाम किया जाता है कि वहां फिक्र करने की जरूरत नहीं होती पर घरों में खास ख्याल रखना होता है। 

"आप अपना चेहरा मस्जिद ए हरम की तरफ फेर लें, और आप जहां कहीं हो अपना चेहरा उसी तरफ फेरा करें।"[कुरान 2: 144]


8. नमाज की नियत करना

कुछ लोग नमाज पढ़ने से पहले जुबान से नियत करते हैं जो कि गलत है नमाज पढ़ते वक्त नमाज पढ़ने का इरादा दिल से होना चाहिए यानी नियत दिल से होती है। 

"तमाम अमल का दारो मदार नियतों पर है और हर शख्स के लिए वही है जो वह नियत करें।" [सहीह बुखारी 01]


Posted By: Islamic Theologies

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