दाढ़ी रखना फ़र्ज़ है?
"और मैं उन्हें सही रास्ते से भटका कर रहूँगा, और उन्हें ख़ूब आरज़ुएँ दिलाऊँगा, और उन्हें हुक्म दूँगा तो वे जानवरों के कान चीर डालेंगे, और उन्हें हुक्म दूँगा तो वे अल्लाह की तख़्लीक़ (पैदाईश और कारीगरी) में तब्दीली पैदा करेंगे। और जो शख़्स अल्लाह के बजाय शैतान को दोस्त बनाये उसने खुले-खुले घाटे का सौदा किया।" [सूरह निसा-119]
ये अल्फाज शैतान के बारे में आये हैं की वो अल्लाह की बनायीं हुई तख़्लीक़ को बिगाड़ेगा यानी इंसान की फितरत में तब्दीली पैदा करने की कोशिश करेगा।
नोट: मर्द की दाढ़ी प्राकृतिक (natural) है क्योकि ये मर्दों के होती है औरतों के नही लिहाज़ा उसको साफ़ करना तख़्लीक़ को बदलना है।
सवाल: अब बात करते है की क्या दाढ़ी रखना जरुरी यानी फर्ज है?
जवाब: जी हां
क़ुरआन का हुक्म रसूलुल्लाह ﷺ की इताअत करने के लिए अल्लाह तआला क़ुरआन में इरशाद फरमाता है-
"और जो कुछ रसूलुल्लाह ﷺ तुम्हे दे वो ले लो और जिस बात से मना फरमायें उससे रुक जाओ और अल्लाह से डरो बेशक अल्लाह सख्त अज़ाब देने वाला है।" [सूरह हश्र -7]
इस आयात पर अगर गौर किया जाए तो हमें पता चलता है कि अल्लाह के रसूल ﷺ के हुक्मो को मानना असल में अल्लाह के हुक्म को मानना है, और अल्लाह के हुक्म को मानना और उसपर अमल करना हर इन्सान पर फ़र्ज़ है।
और एक जगह अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त इरशाद फरमाता है-
مَنۡ یُّطِعِ الرَّسُوۡلَ فَقَدۡ اَطَاعَ اللّٰہ
"जिसने रसूलुल्लाह ﷺ की फरमाबरदारी की उसने मेरी यानी अल्लाह की फरमाबरदारी की।" [सुरह निसा - 80]
"जिस किसी ने अल्लाह और उसके रसूल की नाफ़रमानी की वह खुली गुमराही में पड़ गया।" [सूरह अह्जाब -36]
यानी जिसने रसूलुल्लाह ﷺ के हुक्म को माना उसने अल्लाह के हुक्म को माना अब चूँकि दाढ़ी बढ़ाने का हुक्म अल्लाह के रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया है इसलिए दाढ़ी रखने में न सिर्फ रसूलुल्लाह ﷺ की फरमाबरदारी है बल्कि अल्लाह की भी फरमाबरदारी है।
दाढ़ी रखने में न सिर्फ हदीस पर अमल करना हुआ बल्कि क़ुरआने पाक पर भी अमल करना हुआ अब इतना जान लेने के बाद भी जो कोई अल्लाह के और रसूलुल्लाह ﷺ के फरमान की मुखालिफत करे उनका कहना न माने या अपनी अकल से अपनी राये को मुआशरे को या दुनिआ वालो को आपके हुक्म से ज़्यादा तरजीह दे तो ऐसे लोगो को अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त से डरते रहना चाहिए की कहीं कोई अज़ाब उनपर न आ जाए।
क्यूंकि अल्लाह तआला ने इरशाद फ़रमाया:
"जो लोग रसूलुल्लाह ﷺ के हुक्म की मुखालिफत करते हैं उन्हें डरना चाहिए की कहीं उनपर कोई जबर्दश्त आफत न आ पढ़े या उन्हें दर्दनाक अज़ाब न पहुंचे।" [सूरह नूर- 63]
"(हारून अलैहिस्सलाम ने) कहा : ऐ मेरी मां के बेटे! आप न मेरी दाढ़ी पकड़ें और न मेरा सर, मैं (सख़्ती करने में) इस बात से डरता था कि कहीं आप यह (न) कहें कि तुमने बनी इसराईल के दरमियान फ़िरका बंदी कर दी है और मेरे क़ौल की निगेहदाश्त नहीं की।" [सूरह ताहा -94]
कुरान से ये साबित हुआ के दाढ़ी रखना पिछले पैगम्बर की सुन्नते भी है।
(पांच चीजे फितरत में से है दस भी आई है एक जगह 10 भी है)
हज़रत अबू-हुरैरा (रज़ि०) से और उन्होंने नबी ﷺ से रिवायत की कि आपने फ़रमाया : "फ़ितरत पाँच हैं (या पाँच चीज़ें फ़ितरत का हिस्सा हैं): ख़तना कराना, नीचे नाभि के बाल मूँडना , नाख़ुन तराशना, बग़ल के बाल उखेड़ना और मूँछ कतरना।" [सहीह मुस्लिम-597] इसमे दाढ़ी का जिक्र नही है।
दस वाली रिवायत:
अब्दुल्ला-बिन-ज़ुबैर (रज़ि०) से और उन्होंने हज़रत आयशा (रज़ि०) से रिवायत की, उन्होंने कहा : रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया : "दस चीज़ें (ख़सलतें) फ़ितरत में से हैं: मूँछें कतरना, दाढ़ी बढ़ाना, मिस्वाक करना, नाक में पानी खींचना, नाख़ुन तराशना, उँगलियों के जोड़ों को धोना, बग़ल के बाल उखेड़ना, नाभि के नीचे के बाल मूँडना, पानी से इस्तिंजा करना।" रावी ने कहा: मुसअब ने बताया: दसवीं चीज़ मैं भूल गया हूँ लेकिन वो कुल्ली करना हो सकता है। क़ुतैबा ने ये बढ़ोतरी की कि वकीअ ने कहा : انتقاض الماء का मतलब इस्तिंजा करना हैं। [सहीह मुस्लिम -604]
मैंने नबी करीम ﷺ से सुना आप ﷺ ने फ़रमाया, ''पाँच चीज़ें ख़तना कराना, नीचे नाफ़ (नाभि) मूँडना, मूँछ कतराना, नाख़ुन तरशवाना और बग़ल के बाल नोचना पैदाइशी सुन्नतें हैं।'' [सहीह बुखारी 5891]
जो एक दूसरे की मुशाबिहत करे उसपे लानत:
"रसूलुल्लाह (सल्ल०) ने उन मर्दों पर लानत भेजी जो औरतों जैसा चाल-चलन इख़्तियार करें और उन औरतों पर लानत भेजीं जो मर्दों जैसा चाल चलन इख़्तियार करें।" ग़न्दर के साथ इस हदीस को अम्र -बिन- मरज़ूक़ ने भी शोबा से रिवायत किया। [सहीह बुखारी 5885]
हज़रत अनस-बिन-मालिक (रज़ि०) से रिवायत है, उन्होंने कहा: "हमारे लिये मूँछें कतरने, नाख़ुन तराशने, बग़ल के बाल उखेड़ने और नाभि के नीचे के बाल मूँडने के लिये वक़्त मुक़र्रर कर दिया गया कि हम उनको चालीस दिन से ज़्यादा न छोड़ें।" [सहीह मुस्लिम-599]
उबैदुल्लाह ने नाफ़ेअ से, उन्होंने हज़रत इब्ने-उमर (रज़ि०) से और उन्होंने नबी ﷺ से रिवायत की कि आपने फ़रमाया: "मूँछें अच्छी तरह तराशो और दाढ़ियाँ बढ़ाओ।" [सहीह मुस्लिम-600]
रसूलुल्लाह (सल्ल०) ने फ़रमाया, ''मूँछें ख़ूब कतरवाया लिया करो और दाढ़ी को बढ़ाओ।" [सहीह बुखारी 5893]
नोट: मूँछें को बिल्कुल (मूँडना) साफ़ करना न रसूलुल्लाह ﷺ से ना किसी सहाबी से साबित नही ना किसी ताबई से।
इमाम मालिक र.अ ने कहा है के ''मूँछें सिर्फ इस तरह कतरवाना चाहिए के जिससे होंटो के किनारे नुमाया हो बिलकुल मूँडना नही चाहिए पस ऐसा करना मुशला है यानि तख़्लीक़ को बदलना है। [अल मोता इमाम मालिक पेज.1013, हदीस 1710]
सवाल: अब देखते है की दाढ़ी की लम्बाई कितनी रख सकते है?
जवाब: तीन सहाबी ने दाढ़ी बढ़ाने की रिवायत की लेकिन वो तीनो ही मुठी के बराबर दाढ़ी रखते थे। [मुसन्नाफ़ इबे अबी शैबा -25991, 25992, 25999]
अब्दुल्लाह-बिन-उमर (रज़ि०) से रिवायत है के नबी करीम (सल्ल०) ने फ़रमाया, ''तुम मुशरेकीन के ख़िलाफ़ करो दाढ़ी छोड़ दो और मूँछें कतरवाओ।" अब्दुल्लाह-बिन-उमर (रज़ि०) जब हज या उमरा करते तो अपनी दाढ़ी (हाथ से) पकड़ लेते और (मुट्ठी) से जो बाल ज़्यादा होते उन्हें कतरवाए देते। [सहीह बुखारी 5892]
दाढ़ी को ख़िज़ाब इस्तेमाल करना डाई काली करना:
जब हुसैन (रज़ि०) का सिर मुबारक उबैदुल्लाह-बिन-ज़ियाद के पास लाया गया और एक थाल में रख दिया गया तो वो बद-बख़्त उस पर लकड़ी से मारने लगा और आप के हुस्नो-ख़ूबसूरती के बारे में भी कुछ कहा (कि मैंने इससे ज़्यादा ख़ूबसूरत चेहरा नहीं देखा) इस पर अनस (रज़ि०) ने कहा, हुसैन (रज़ि०) रसूलुल्लाह ﷺ से सबसे ज़्यादा मुशाबेह थे। उन्होंने ( وسمة ) का ख़िज़ाब इस्तेमाल कर रखा था। [सहीह बुखारी – 3748; मिस्कात-6179]
अबू हुरैरा रजिअल्लाह अन्हु से रिवायत है की रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया की, "यहूद और नसारा ख़िज़ाब नहीं लगाते तुम उन के ख़िलाफ़ करो यानी ख़िज़ाब लगाया करो।" [सहीह बुखारी- 5899]
क्या बुजुर्ग आदमी काले रंग से न रंगे?
जाबिर बिन. 'अब्दुल्ला ने बताया कि मक्का की विजय के दिन अबू क़ुहाफा़ (अबू बकर के वालिद) का नेतृत्व किया गया था (पवित्र पैगंबर की आज्ञाकारिता के लिए) और उसका सिर और दाढ़ी जूफा की तरह सफेद थे, जिस पर रसूलुल्लाह ﷺ ने कहा: "इसे इसके साथ बदलो कुछ लेकिन काले रंग से बचें।" [सुनन नसाई – 5076 ,5244; सही मुस्लिम 5509]
रसूलुल्लाह (सल्ल०) की दाढ़ी मुबारक:
आप रसूलुल्लाह ﷺ का ये मोजिजा था के आपकी वफात तक आप के बाल मुबारक काले थे।
रसूलुल्लाह ﷺ बहुत लम्बे नहीं थे और न आप छोटे क़द के ही थे (बल्कि आपका बीच वाला क़द था) न आप बिल्कुल सफ़ेद भूरे थे और न गेहूँए ही थे आप के बाल घुँघराले थे, मगर उलझे हुए नहीं थे और न बिल्कुल सीधे लटके हुए थे। अल्लाह तआला ने आप को चालीस साल की उमर मैं नुबूबत का ऐलान किया दस साल आप ने (नुबूवत के बाद) मक्का मुकर्रमा में क़ियाम किया और दस साल मदीना मुनव्वरह में और लगभग साठ साल की उमर मैं अल्लाह तआला ने आप को वफ़ात दी। वफ़ात के वक़्त आप के सिर और दाढ़ी में बीस बाल भी सफ़ेद नहीं थे। [सहीह बुखारी- 5900]
हज़रात अब्बास कहते थे की अगर में हुजुर के सर व दाढ़ी के बाल गिनता तो 20 भी नही होते। [सहीह मुस्लिम-6091]
क्या बालो को सफ़ेद भी रख सकते है?
इस्माइल बिन खालिद कहते के सहाबी से पूछा गया के आपने उम्मतुल मोमिनीन हजरत अली बिन अबी तालिब (रज़ि०) को देखा है उन्होंने कहा जी हाँ मैने उनकी जियारत की है आप के सर और दाढ़ी मुबारक ले बाल सफ़ेद थे, यह (लम्बी हदीस है)। [मुस्तरदक अल हाकिम -8087]
हज़रत अम्र-बिन-शुऐब अपने वालिद से और अपने दादा से रिवायत करते हैं कि रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया : "सफ़ेद बाल ख़त्म न करो क्योंकि वो मुसलमान का नूर है। जिसका हालते-इस्लाम में बाल सफ़ेद होता है, तो उसके बदले में अल्लाह उसके लिये एक नेकी लिख देता है। उसके बदले में उसकी एक ग़लती ख़त्म कर देता है और उसके बदले में उसका एक दर्जा बुलन्द कर देता है।" [मिस्कात शरीफ-4458; अबू-दाऊद 4202]
अल्लाह हमें रसूलुल्लाह ﷺ की सुन्नत पर अमल करने की तौफिक दे अमीन
अब्दुल कादिर मंसूरी
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