क्या नबी नूर थे, या बशर? (पार्ट-1)
Table Of Content
नबी अलैहिस्सलाम बशर है क़ुरआनी आयतें
अल्लाह से बात-वही, फ़रिश्ते और पर्दा
1. नबी अलैहिस्सलाम बशर है नूर नहीं
जदीद दौर के फिरके जिनका अकीदा है कि नबी सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम नूर और बशर (इंसान) दोनों है। इस कुफरिया अक़ीदे का रद्द क़ुरआन से करते चलेंगे। इस नूरियत के अक़ीदे का ताला इंशाअल्लाह आयात ऐ क़ुरानी जैसी चाबी से खोलेंगे। पहली फुर्सत मे साबित करता चलूँगा की नबी अलैहिस्सलाम बशर है नूर नहीं।
(1) आयत मुलाहिजा फरमाए:
قُلْ إِنَّمَآ أَنَا۠ بَشَرٌۭ مِّثْلُكُمْ يُوحَىٰٓ إِلَىَّ
"कह दो मै भी इंसान हु जैसे तुम हो अलबत्ता मुझ पर वही उतरती है।" [सूरह फुसीलत (41) 6]
खुलासा नबी की ज़ुबानी अल्लाह ने कहा, "कह दो जब अल्लाह कहलवाये और रसूल कहे उससे ज़्यादा मज़बूत बात क्या हो सकती है।"
सवाल: कुछ हज़रात कहते है की इस आयत में तो नबी कह रहे हैं कि मैं एक इंसान हूं तुम्हारी तरह तो क्या नबी सल्लल्लाहू अलेही वसल्लम काफिर की तरह थे?
जवाब: यहां पर बात मर्तबा और मकाम की नहीं हो रही है बल्कि स्पीशीज़ (मखलूक) की हो रही है वरना तो क्या अल्लाह को नबी का मर्तबा काफिरों जैसा बराबर लगा था। (अस्तग़्फ़िरुल्लाह)
(2) आयत मुलाहिजा फरमाए:
- قُلْ سُبْحَانَ رَبِّى هَلْ كُنتُ إِلَّا بَشَرًۭا رَّسُولًۭا- وَمَا مَنَعَ ٱلنَّاسَ أَن يُؤْمِنُوٓا۟ إِذْ جَآءَهُمُ ٱلْهُدَىٰٓ إِلَّآ أَن قَالُوٓا۟ أَبَعَثَ ٱللَّهُ بَشَرًۭا رَّسُولًۭا
"कह दो पाक है मेरा रब मैं तो सिर्फ एक इंसान हूं जो रसूल बनाया गया हूं। लोगों के पास हिदायत पहुंचने के बाद ईमान से रोकने वाली सिर्फ वही चीज रही कि इन्होंने कहा की अल्लाह ने एक इंसान को रसूल बनाकर भेजा।" [सूरह बनी इजराइल (17) 93-94]
आगे अल्लाह फरमाता है:
قُل لَّوْ كَانَ فِى ٱلْأَرْضِ مَلَـٰٓئِكَةٌۭ يَمْشُونَ مُطْمَئِنِّينَ لَنَزَّلْنَا عَلَيْهِم مِّنَ ٱلسَّمَآءِ مَلَكًۭا رَّسُولًۭا
"अगर जमीन पर फरिश्ते रहते और चलते फिरते तो हम भी इनके पास किसी आसमानी फरिश्ते को रसूल बनाकर भेजते।" [सूरह बनी इजरायल (17) 95]
खुलासा: अल्लाह ताला ने इतना ठोस और फितरत के मुताबिक जवाब दिया की रहती दुनिया तक के तमाम मुशरिक और बशरियत का इनकार करने वाले नासमझ जाहिल लाजवाब हो गए।
इस कलाम का जवाब ना दे सके और ना कयामत तक दे सकेंगे।
इस आयत में अल्लाह ताला ने साफ-साफ ऐलान कर दिया कि इस जमीन पर नूरी मखलूक अगर रहती बसती तो हम भी नूरी मखलूक में से किसी फ़रिश्ते को नबी बना कर भेजते।
मगर जमीन पर इंसान रहते हैं इसलिए हमने इंसान ही को तुम्हारे दरमियान नबी बनाकर भेजा। इतनी ठोस दलील के बावजूद मुसलमानों के अंदर इतना गंदा अकीदा भर दिया है इन उलेमा ऐ सू ने की उम्मत को शिरकिया अक़ीदो मे खड़ा कर दिया।
इन दो आयातो से पता चला कि नबी अलैहिस्सलाम बशर है।
2. नबी अलैहिस्सलाम बशर है क़ुरआनी आयतें
नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम बशर है क़ुरआनी आयतें आपके सामने पेश कर रहा हूँ।
(1)
مَا كَانَ لِبَشَرٍ أَن يُؤْتِيَهُ ٱللَّهُ ٱلْكِتَـٰبَ وَٱلْحُكْمَ وَٱلنُّبُوَّةَ ثُمَّ يَقُولَ لِلنَّاسِ كُونُوا۟ عِبَادًۭا لِّى مِن دُونِ ٱللَّهِ
"किसी इंसान (बशर) की ये शान नहीं की अल्लाह उन्हें किताब और हुक़ूमत और नुबूवत अता करें और वो लोगों से कहे की अल्लाह को छोड़ कर मेरे बन्दे हो जाओ।" [सूरह इमरान (3) 79]
खुलासा: इस आयत मे दो बातें गौर करने की है,
1. किसी बशर (इंसान) की ये शान नहीं की अल्लाह उसको किताब और हुक़मत और नुबूवत दे तो वो बंदा कहे की अल्लाह को छोड़ कर मेरी इबादत करो।
2. नबी अलैहिस्सलाम को नुबवत मिलने के बाद सिर्फ अल्लाह ही की इबादत करने की रेहनुमाई फरमाई, कभी नहीं कहा कि मेरी इबादत करो।
नबी अलैहिस्सलाम को किताब भी दी गई लेकिन ये नहीं कहा की मेरी इबादत करो। नबी अलैहिस्सलाम को हुक़ूमत भी दी गई लेकिन ये नहीं कहा की मेरी बंदगी करो।
आयत के शुरू के अल्फाज़ की किसी बशर की ये शान नहीं की हिक़मत किताब नुबुवत मिलने के बाद वो अपनी इबादत कराये। ये तीनो शाने नबी अलैहिस्सलाम पर खरी उतरती है। इससे साबित हुआ बशर की ये शान नहीं की वो तीन मे से एक चीज मिलने के बाद अपनी इबादत कराये।
साबित हुआ ये बशर की शान है और ये तीनो शाने नबी अलैहिस्सलाम मे मौजूद थी साबित हुआ नबी बशर हैं।
(2)
खुलासा: अल्लाह इस आयत मे फरमा रहा है की हमने आपसे पहले किसी बशर को हमेशा रहने वाला नहीं बनाया और हम जानते है नबी अलैहिस्सलाम भी हमेशा नहीं रहे; सहाबाओ को, फातिमा रज़ि अन्हा को और अम्मा आयेशा को छोड़ कर चले गए। यानि आयत के अल्फाज़ की किसी बशर को हमने दुनिया मे हमेशा ना रहने दिया क्यूंकि नबी अलैहिस्सलाम भी हमेशा ना रहे, गोया आयत के हिसाब से बशर (इंसान) हुए।
3. अल्लाह से बात- वही, फ़रिश्ते और पर्दा
बड़ा अफ़सोस है आज के लोगो पर जो दावे करते है हम आशिक़ ऐ रसूल है लेकिन वही लोग शिरकिया अक़ीदा रखते हैं की नबी नूर से बने है जबकि अल्लाह खोल खोल कर क़ुरआन मे नबी अलैहिस्सलाम को और तमाम अम्बियाओ को बशर कह रहा है लेकिन जिस तरह क़ुरआन को मुशरिक सुनते नहीं थे आज के अहले बिदअती भी पढ़के मनचाहा मतलब निकाल कर उम्मत के अंदर समो बैठे है।
(1) अल्लाह तआला इरशाद फरमाता है:
۞ وَمَا كَانَ لِبَشَرٍ أَن يُكَلِّمَهُ ٱللَّهُ إِلَّا وَحْيًا أَوْ مِن وَرَآئِ حِجَابٍ أَوْ يُرْسِلَ رَسُولًۭا فَيُوحِىَ بِإِذْنِهِۦ مَا يَشَآءُ ۚ إِنَّهُۥ عَلِىٌّ حَكِيمٌۭ
"किसी बशर (इंसान) के लिए मुमकिन नहीं के अल्लाह इससे बात करें मगर इलहाम (के ज़रिये) से या परदे के पीछे से या कोई फरिश्ता भेज दे तो वो जो चाहे इलक़ा (हुक्म) करे बेशक़ वो आला रुतबा वा हिकमत वाला है।" [सूरह शूरा (42) 51]
खुलासा: अल्लाह ताला ने इस आयत मे बढ़ी गहरी बात कही है की अल्लाह तआला किसी से बग़ैर वही के बात नहीं करता, बग़ैर परदे के बात नहीं करता या इलहाम के ज़रिये।
तीन बातें-
2. फ़रिश्ते (Angels)
हमारे नबी ने अल्लाह से वही के ज़रिये बात की है साबित हुआ नबी बशर हैं क्यूंकि अल्लाह तआला आयत मे फरमा रहा है की अल्लाह बशर से वही के ज़रिये बात करता है।
हमारे नबी ने अल्लाह से परदे के पीछे बात की साबित हुआ नबी बशर है।
अम्मा आयेशा सालामुल्लाह अलैहा कहती है,
"जो ये कहे नबी अलैहिस्सलाम ने अल्लाह को देखा वो झूठा है।" [बुखारी 4855]
(2) अल्लाह तआला इरशाद फरमाता है :-
قُلۡ إِنَّمَآ أَنَا۠ بَشَرٞ مِّثۡلُكُمۡ يُوحَىٰٓ إِلَيَّ"ऐ नबी तुम फरमाओ मै तुम्हारी ही तरह बशर (इंसान) हूँ मगर मुझ पर वही उतरती है।" [सूरह कहफ़ (18) 110]
खुलासा: अल्लाहु अकबर अल्लाह तआला ने खुद नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से खुद कहलवाया की तुम फरमाओ मै तुम्हारी तरह बशर हूँ।
यहाँ मरतबे की बात नहीं हो रही है बल्कि मखलूक की बात हो रही है वरना तो क्या अल्लाह तआला अपने प्यारे नबी को काफ़िरो की तरह कहलवाएगा?
इस आयत की तशरीह करते हुए मुजद्दिद मुफ़्ती अहमद यार खान नईमी साहब नबी अलैहिस्सलाम की गुस्ताखी करते हुए लिखते है-
मुलाहिज़ा फरमाए:
क़ुरआन करीम ने कुफ्फार ऐ मक्का का तरीका बताया है की वो अम्बिया को बशर कहते थे चुनाँचे इस पर एक आयत भी पेश करते है,
“काफिर बोले नहीं हो तुम मगर हम जैसे बशर अगर तुमने अपने जैसे बशर की पैरवी की तो तुम नुकसान वाले हो।“ [अल क़ुरआन]
अब आगे मुफ़्ती साहब लिखते है:
“कह दो मे तुम्हारी तरह बशर हूँ।" [सूरह कहफ़ (18) 110]
इस आयत की तशरीह करते हुए नबी अलैहिस्सलाम की शान मे गुस्ताखी कैसे की देखिये?
इस आयत मे कुफ्फार से ख़िताब है क्यूंकि हर जिंस अपनी ग़ैर जिंस से नफरत करती है लिहाज़ा फ़रमाया गया की ऐ कुफ्फार तुम घबराओं नहीं मैं तुम्हारी तरह तुम्हारी जिंस यानी बशर हूँ।
(अस्तग़्फ़िरुल्लाह)
यानी नबी अलैहिस्सलाम की निस्बत एक शिकारी से दी जैसे वो अपने जानवरो को आवाज़ से अपनी तरफ माईल करता है उसी तरह कुफ्फारो नबी अलैहिस्सलाम ने अपनी तरफ माईल किया और जहालत देखो, पहले तो कह रहे थे की कुफ्फार ऐ मक्का नबी अलैहिस्सलाम को अपनी तरह बशर मानते थे तो मुफती साहब से कोई पूछे की जब कुफ्फार ऐ मक्का अपनी तरह नबी को बशर मानते थे तो मुफ़्ती साहब ने ये क्यों कहा की एक जिंस ग़ैर जिंस से नफरत करती है अरे जब कुफ्फार अपनी जिंस से मानते थे तो इतनी जहालत भरी शरह क्यों की?
आपका दीनी भाई
मुहम्मद
2 टिप्पणियाँ
MashaAllah
जवाब देंहटाएंassalamualaikum Behetreen article likha hai Muhammad Bhai aapne alhamdulillah jajak allah khair waiting for next article
जवाब देंहटाएंकृपया कमेंट बॉक्स में कोई भी स्पैम लिंक न डालें।