Moosa Alaihisalam ki lathi ka sach



मूसा अ० की लाठी का सच क्या है?


चमत्कारी लाठी 

क़ुरान ऐ करीम में मूसा अ० की लाठी के 3 मोअज़ज़्ज़ात का जिक्र आया है...

  1. लाठी का साँप बन जाना और सारे जादुओ को निगल जाना (7:117, 26:45, 20:69, ...)
  2. लाठी का समुन्दर पर पड़ना और उसमें से रास्ता निकल आना  ( 2:50, 26:63...)
  3. लाठी का पत्थर पर पड़ना और उसमें से 12 चश्मों का फूट पड़ना  (2:60, 7:160,...)

इन मोअज़ज़्ज़ात को पेश करके गोया अल्लाह पाक बनी आदम को ये संदेश दे रहे है कि हालात चाहे जितने भी गैर मुनासिब क्यों ना हो, बन्दे को अल्लाह की जात से कभी भी मायूस नही होना चाहिए बल्कि उसकी जात से हुस्न ए जन (नेक गुमान) रखना चाहिए।

उपरोक्त तीनों मोअज़ज़्ज़ात में हमनें देखा कि लाठी के जरिये ये नामुमकिन बातें वज़ूद में आ रही है...

इससे आम लोग जो बचपन से जादू के किस्से-कहानियाँ सुन-सुन कर परवरिश पाए है, ये नतीजा निकालते है कि गोया अल्लाह पाक ने अपने नबी मूसा अ० को एक चमत्कारी लाठी अता की थी. 

  • जो हर मुश्किल को आसान कर देती थी. 
  • जो नामुमकिन को मुमकिन बना देती थी.

गोया लाठी, लाठी ना हो बल्कि एक काल्पनिक अलादीन का चिराग हो, जिसे जब घिसो, इससे एक ताक़तवर जिन्न निकले और घिसने वाले की तमाम मुश्किलो को आसान कर दे। (ना आऊज़ो बिल्लाह मिन ज़ालिक)

और लोगो की इस मनोदशा के असली जिम्मेदार वो मुल्ला वा मौलवी है जो मिम्बरे रसूल स० पर खड़े होकर क़ुरानी किस्सो को नसीहत के अंदाज़ में नही बल्कि इंटरटेनमेंट के अंदाज़ में बयान करते है।

जबकि अल्लाह पाक ने ये किस्से अपनी किताब में इसलिए बयान किये है ताकि बनी आदम उनसे दर्स, नसीहत और सबक ले। लेकिन क़ुरान के मर्म को ना समझने वाले ये मौलवी क़ुरान बयानी के इस मक़सद को कत्ल कर डालते है और उम्मत के अक़ीदों में ये काल्पनिक और झूठी बातो की मिलावट करके उनको सही इल्म से कोसो दूर ले जा रहे है।

【अल्लाह इन दज़्ज़ाल सिफ़त मौलवियो से इस भोली-भाली उम्मत को अपनी पनाह में रखे !】

इसी मनोदशा को दर्शाता है मुश्रिकीन ऐ मक्का और अहले किताब का नबी स० के बारे में किया गया ये ऑब्जेक्शन...

"मगर जब हमारे यहाँ से हक़ उनके पास आ गया तो वे कहने लगे, “क्यों ना दिया गया इसको वही कुछ जो मूसा को दिया गया था?”  क्या ये लोग उसका इनकार नहीं कर चुके हैं जो इससे पहले मूसा अ० को दिया गया था?  उन्होंने कहा, “दोनों जादू हैं, जो एक-दूसरे की मदद करते हैं।” और कहा, “हम किसी को नहीं मानते।” 

कुरआन 28:48

अब आते है हम अपने असल सवाल पर कि

सच क्या है

इस बात को समझने के लिए हम आपको क़ुरान की पनाह में ले चलते है।

अल्लाह पाक से मूसा अ० की  कोहतूर पर जब पहली मुलाकात हुई तो अल्लाह पाक ने उनसे पूछा...

"और ऐ मूसा! यह तेरे दायें हाथ में क्या है?” 

कुरआन 20: 17


"मूसा अ० ने जवाब दिया, “यह मेरी लाठी है, इस पर टेक लगाकर चलता हूँ, इससे अपनी बकरियों के लिये पत्ते झाड़ता हूँ, और भी बहुत-से काम हैं जो इससे लेता हूँ।" 

कुरआन 20:18


यानी मूसा अ० ने खुद अपनी लाठी का दुनियावी  सच बयान किया। 

अमूमन दुनियाँ लाठी से यही काम लेती है...

  • टेक लगा कर चलना।
  • मवेशियों के लिए पेड़ से पत्ते झाड़ना।
  • कोई हमला कर दे तो इसे अपनी हिफाज़त के लिए हथियार बना लेना।

इत्यादि...

  • यानी लाठी को लोगो ने अपना दुनियाबी सहारा तसव्वुर किया हुआ है।


अब आगे किस्से पे नज़र डालते है-

अल्लाह पाक ने फरमाया, 

“फेंक दे इसको ऐ मूसा अ० !” 

कुरआन 20:19

गोया अल्लाह पाक दर्स दे रहे है कि - ऐ मूसा अ० ! तुझे अब मैंने अपना नबी बनाने के लिए मुन्तख़ब किया है। तू अब दुनिया वालो को मेरे ऊपर तवक्कल करने का दर्स देंगा। ऐसे में लोग ये कह सकते है कि हमसे तो ये नबी अल्लाह को अपना सच्चा सहारा बनाने को कह रहा है और खुद एक लाठी को अपना सहारा बना रखा है।

लिहाज़ा एक नबी के लिए जायज़ नही कि वो अल्लाह के सहारे को छोड़ कर दुनियावी सहारे पर निर्भर रहे। लिहाज़ा फेंक दे इस लाठी को (या छोड़ दे इस दुनियावी सहारे को)।

अल्लाह पाक फरमाते है कि ऐ मूसा अ०! मैं तुम्हे दुनियाबी सहारे की हक़ीक़त अभी दिखाता हूँ...

उसने लाठी को फेंक दिया और यकायक वह एक साँप बन गयी जो दौड़ रहा था।

कुरआन 20:20

इस आयत में ये दर्स है कि दुनिया के असबाब जिनमें मगन होकर आज दुनिया अल्लाह को भूल बैठी है वो जहन्नुम में साँप बन कर ऐसे ही तुमसे चिमटेंगे जैसे आज तू इनसें चिमटा हुआ है।

कहा, “पकड़ ले इसको और डर नहीं, हम इसे फिर वैसा ही कर देंगे जैसी यह थी।

कुरआन 20:21

इसमें ये दर्स है कि अल्लाह पे भरोसा रखोगे तो तुम्हें किसी से भी डरने की जरूरत नही है। दुनिया का कोई भी असबाब अल्लाह पे तवक्कल रखने वालों का कुछ नही बिगाड़ सकता है। तो ऐ मूसा अ०! पकड़ ले इसे (यानी ऐ बन्दे! थाम ले अल्लाह के सहारे को)

मूसा अ० से पहले जो फेंकवाया गया था वो गोया लाठी ना होकर दुनियावी सहारा था।

दुबारा मूसा अ० ने जो उठाया था गोया वो लाठी नही बल्कि अल्लाह का सहारा था। अल्लाह का तवक्कल था।

【ये था इस किस्से को बयान करने का क़ुरान का मक़सद और मूसा अ० की लाठी का सच।】

ये तवक्कल बनाम लाठी सिर्फ मूसा अ० को नही दी गयी बल्कि अल्लाह पाक ने ये हर मोमिन को अता किया है।

【तवक्कलअलल्लाह 】

दुनियाबी असबाब भी रब की मर्जी के बगैर आपके लिए फायदेमंद या नुकसानदेह नही हो सकते...

"अल्लाह के अज़न के बगैर वो इस जरिये से(जादू से) किसी को भी नुकसान नही पहुँचा सकते थे ।" 

कुरआन 2:102 & 58:10


  • आग का काम है जलाना, पर वो इब्राहिम अ० को जला नही सकी
  • चाक़ू का काम है काटना, पर वो इस्माइल अ० की गर्दन को काट नही सका
  • पानी का काम है डुबोना, पर नूह अ० के तूफ़ान में  उनकी कश्ती नही डूबी


इसीलिए नबी स० ने हर मौके पे एक दुआँ का एहतेमाम किया है...

  • किसी काम की इब्तेदा कर रहे तो दुआ
  • सवारी पे चढ़ रहे तो दुआ
  • जंग में जा रहे है तो दुआ...

इत्यादि...

तो मेरे भाइयो!!!

  • असबाबो पे अंधा तवक्कल ना करिये, रब की जात पे कामिल भरोसा कीजिये...
  • असबाबो से मोहब्बत छोड़कर रब से मोहब्बत करिये...
  • असबाबो से ना डरिये, रब से डरिये...

अगर ऐसा कीजियेगा तो आप अपनी जिंदगी में कदम-कदम पे करिश्मे देखयेगा...

ये ही हक़ है।

अल्लाह से दुआ गो हूँ कि अल्लाह हम सब को उसकी जात ऐ बारी से मोहब्बत करने वाला बना दे...उसके मुकाबले में दुनिया को हम पर ग़ालिब ना आने दे...और हमेशा अपनी हिफ्ज़ों अमान में रखे।

आमीन या रब्बुल आलमीन

आपका दीनी भाई

मुहम्मद रज़ा