Sadqa kya hai aur iski kismein, ye kise aur kaise dein?

Sadqa kya hai aur iski kismei? kise aur kaise dein?


सदक़ा charity (صدقہ)

आम तौर पर अपने माल में से अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त की रज़ा और खुशनुदी की खातिर निकाला गया माल सदक़ा कहलाता है।

नबी करीम ﷺ ने फ़रमाया, "हर नेक काम सदक़ा है।" [सहीह बुखारी:1621]

जैसे:

1. "मुस्कुरा कर अपने भाई (मुसलमान) को देखना।" [तिर्मिज़ी: 1956]

2. "नेकी का हुक्म देना और बुराई से रोकना।" [सहीह मुस्लिम: 1006 & 2329]

3. "भूले हुए को राह दिखाना।" [तिरमिज़ी: 1956]

4. "नाबीना की मदद करना।" [तिरमिज़ी: 1956]

5. "रास्ते से पत्थर, कांटे और हड्डी को हटा देना।" [तिर्मिज़ी: 1956]

6. "अपने डोल से किसी भाई की डोल में पानी डालना।" [तिर्मिज़ी: 1956]


कुछ और मिसालें देख लेते हैं!

1. "लोगों के दरमियान इंसाफ़ करना।" [सहीह बुखारी: 2891]

2. "किसी की सवारी के मामले में मदद करे।" [सहीह बुखारी: 2891]

3. "अच्छी बात कहना।" [सहीह बुखारी: 2891]

4. "जो क़दम नमाज़ की तरफ़ जाने के लिए उठता है।" [सहीह बुखारी: 2891]

5. "रास्ते से कोई तकलीफ़ देह चीज़ हटा देना।" [सहीह बुखारी: 2891]

ये हैं नेक अमाल की मिसालें जिन्हें सदक़ा कहा गया।


अब जान लेते हैं सदक़ा लफ्ज़ कहां से आया!

सदक़ा लफ्ज़ बुनियादी तौर पर "सिदिक़" (صدق) से निकला है जिसका माना "सच्चाई" होता है। यानि जो कोई पूरी नेक नियत और सच्चाई के साथ अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त की राह में उसके अता किए हुए माल में से खर्च करे, उसे "सदका" कहते हैं। 


सदक़ा दो किस्म का होता है:

1. फ़र्ज़ सदका, जिसे ज़कात कहते हैं जो साल में एक बार अदा किया जाता है। इसे इंशा अल्लाह अलग से जानने की कोशिश करेंगे।

2. नाफिल सदका, जिसे हम कभी भी और हमेशा करते रहना चाहिए।


"जो रिज़्क़ हमने तुम्हें दिया है उसमें से ख़र्च करो इससे पहले कि तुम में से किसी की मौत का वक़्त आ जाए और उस वक़्त वो कहे कि ऐ मेरे रब, क्यों न तू ने मुझे थोड़ी सी मोहलत और दे दी कि मैं सदक़ा देता और नेक लोगों में शामिल हो जाता।" 
[कुरान 63.10]

▪️ जो माल अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त ने हमें अता किया उस में से उसकी राह में खर्च करना चाहिए इससे पहले कि मौत हमें आ पकड़े और फिर हम सदका करने की मोहलत मांगे ताकि नेकोकार शामिल हो सकें।


सदका देने का तरीक़ा:

"अगर अपने सदक़े खुले तौर पर दो तो ये भी अच्छा है, लेकिन अगर छिपाकर मुहताजों को दो तो ये तुम्हारे लिये ज़्यादा अच्छा है। तुम्हारी बहुत-सी बुराइयाँ इस तरीक़े से मिट जाती हैं। और जो कुछ तुम करते हो, अल्लाह को हर हाल में उसकी ख़बर है।"
[कुरान 2.271]

▪️ खुला और पोशीदा दोनों तरह से सदका किया जा सकता है लेकिन पोशीदा सदका ज़्यादा बेहतर है।

▪️ सदका अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त की राह में दे रहें हैं और अज्र भी उसी ज़ात ने देना है बेहतर होगा हमारे इस अमल का गवाह भी वही हो, जब हर सूरत उसे हमारे हर अमल की ख़बर है।

नबी करीम ﷺ ने फ़रमाया, "इस तरह सदका करे हाथ बाएं को ख़बर ना हो कि दाएं हाथ ने ख़र्च किया।" [सहीह बुखारी: 1423]

▪️सदका की फज़ीलत में बयान हुई ये हदीस, सदका करने का तरीक़ा भी बताती है।

▪️ खुला सदका इस लिए किया जा सकता है कि लोग अच्छे कामों से मुतास्सिर हो कर करे ये तरह की नेकी की दावत होगी।


सदका किन लोगों को दें?

आम तौर पर सदके का मुस्ताहिक भी वही लोग हैं जो ज़कात के मुस्ताहिक हैं। 

"और अल्लाह की मुहब्बत में अपना दिल पसन्द माल रिश्तेदारों और यतीमों पर, ग़रीबों और मुसाफ़िरों पर, मदद के लिये हाथ फैलाने वालों पर और ग़ुलामों की रिहाई पर ख़र्च करे।"
[कुरान 2.177]


सदका ख़ालिस अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त के लिए

▪️ सदका ख़ालिस अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त के लिए करना चाहिए जिसके ज़रिए उसकी रज़ा हासिल किया जा सके।

"जो पाकीज़ा होने की ख़ातिर अपना माल देता है।"
"उस पर किसी का कोई एहसान नहीं है जिसका बदला उसे देना हो।"
"वो तो सिर्फ़ अपने रब्बे-बरतर की रज़ाजूई के लिये ये काम करता है।"
[कुरान: 92.18, 19 & 20]

▪️सदका से बंदा अपने नफ्स को पाकीज़ा कर सकता है।

"और अल्लाह की मोहब्बत में मिसकीन और यतीम और क़ैदी को खाना खिलाते हैं।"
(और उनसे कहते हैं कि) "हम तुम्हें सिर्फ़ अल्लाह की ख़ातिर खिला रहे हैं, हम तुमसे न कोई बदला चाहते हैं न शुक्रिया।"
[कुरान:76.8-9]

▪️सदका ख़ालिस अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त के लिए करके अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त की मोहब्बत हासिल किया जा सकता है।

▪️ और जो लोग अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त की मोहब्बत की ख़ातिर सदका करते हैं किसी से तो शुक्रिया की भी नहीं रखते हैं।

▪️इस आयत में अपने दिल पसन्द माल को अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त की मोहब्बत खातिर किन किन लोगों को देना उसे अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त वाज़ेह कर दिया है।


अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त की राह में कैसा माल सदका करना चाहिए?

"जब तक तुम अपनी पसंददीदा चीज़ को अल्लाह की राह में खर्च न करोगे हरगिज भलाई न पाओगे और तुम जो कुछ भी खर्च करोगे अल्लाह इसे खूब जानता है।"
[कुरान: 3.92]

▪️ अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त हर पोशीदा और ज़ाहिर को जानने वाला है हम क्या और कैसा खर्च करते हैं उसके पास हमारे हर अमल का हिसाब है। अज्र भी हमारी नियत और अमल के मुताबिक़ उसी रब से मिलना है 

नबी करीम ﷺ ने फ़रमाया, "तुम से कोई उस वक्त तक मोमिन नहीं हो सकते जब तक अपने (मोमिन) भाई के लिए वही पसंद ना करे जो ख़ुद के लिए पसंद करता है।" [सहीह बुखारी:13]

▪️ ये हदीस हर पहलू (aspect) से एक इंसान को दुसरे इंसान के बराबर ला खड़ा करती है। 

▪️ हम सदके में वही माल देंगे जो ख़ुद हमें अज़ीज़ होगा।

▪️या उस तरह से देंगे जो तरीक़ा हमें हमारे लिए अच्छा लगेगा।

▪️बदतरीन माल सदका करना गोया देने वालों को दुःख और तकलीफ़ पहुंचाना।


सदक़ा तकलीफ़ पहुंचा कर या अहसान जतला कर ना दो

"ऐ ईमान वालो! अपने सदकात को एहसान जतला कर और दुख पहुंचा कर जाया मत करो जैसे वो शख्स (ज़ाया करता है) जो अपना मालजो लोगो को दिखाने के ख़ातिर ख़र्च करता हैं।"
[कुरान 2.264]

▪️ अगर हम लोगों को खुद पहुंचा कर या अहसान जतला सदका देंगे तो हमें उसका कोई अज्र नहीं मिलने वाला है।

एक हदीस के मुताबिक़;

नबी करीम ﷺ ने फ़रमाया, "तमाम अमाल का दारो मदार नियतों पर है। और हर अमाल का नतीजा हर इन्सान को इसकी नियत के मुताबिक़ मिलेगा।" [सहीह बुखारी:01]

हम जिस भी नियत से कोई अमल करेंगे नितीजा हमें वैसा ही मिलेगा।

जैसे: अगर हम अपना सदका लोगों की वाह वाही लूटने के लिए करेंगे तो, हमें बदले में लोगों की वाह वाही ही मिलेगी।

▪️ और अगर हम सदका अहसान जतला कर देगें तो सदका लेने वाला शख़्स हमेशा हमारा अहसान मंद होगा गोया उसका अहसान मंद होना हमारे अमल का नतीजा है।


खुलासा ए कलाम: हमनें अपने सदके को अपने हाथों से ज़ाया कर दिया। जो एक तरह का investment था।


सदक़ा आखिरत का सरमाया (investment) है

नबी करीम ﷺ ने फ़रमाया, "जब इंसान फौत हो जाता है तो तीन कामों, सदका जरिया, वो इल्म जिससे इस्तेफादा किया जाए और नेक औलाद जो इसके लिए दुआ करे, के सिवा इसके अमल के सिलसिला मुनकता हो जाता है।" [मिश्कात शरीफ़:203]

▪️ यानि इन तीन अमाल की वजह से हमारे अमाल की किताब खुली रहती है और हमारी नेकियों में इज़ाफ़ा होता रहता है।

नबी करीम ﷺ ने फ़रमाया, "जो शख़्स हलाल कमाई से एक खजूर के बराबर सदका करे और अल्लाह सिर्फ़ हलाल कमाई के सदके को कुबूल करता है तो अल्लाह इसे अपने दाहिने हाथ से कुबूल करता है फिर सदका करने वाले के फायदे के लिए इससे ज़्यादती (बढ़ाना) करता है। बिलकुल उसी तरह जैसे कोई अपने जानवर के बच्चे को खिला पिला कर बढ़ाता है ताकि उसका सदका पहाड़ के बराबर हो जाए।" [सहीह बुखारी:1410]

▪️ इस हदीस से ये बात भी वज़ेह होती है कि अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त के वहां सिर्फ़ हलाल की कमाई का सदका क़ुबूल होता है।

▪️ एक खजूर के बराबर सदके को अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त एक जानवर के बच्चे की तरह बड़ा करता है।

"और जो भी तुम अल्लाह की राह में खर्च करोगे अल्लाह उसका पूरा पूरा बदला देगा।" [कुरान: 34.39]

▪️ हम जो अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त की राह में खर्च करते हैं उसका पुरा पुरा अज्र मिलेगा। (बशर्ते ये कि हमारी नियत अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त की राह में खर्च करने की ही हो)

नबी करीम ﷺ ने फ़रमाया, "अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त फरमाता है ऐ इंसान खर्च करो मैं तुम पर खर्च करूंगा। आप ﷺ ने ये भी फरमाया कि अल्लाह का हाथ भरा हुआ है रात दिन के मुस्लसल गुज़रने से मुतासिर नहीं होता आप ﷺ ने ये भी कहा कि क्या तुम देखते हो की जब से इस ने आसमानों और ज़मीनों को पैदा किया है उसने क्या क्या खर्च किया है उसके बावजूद जो कुछ उसके हाथ में है वो कम नहीं हुआ और इसका अर्श पानी पर था और इसके हाथ में मिज़ान है जिसके ज़रिए वो (लोगों को) बुलंद और पस्त करता है।" [सहीह बुखारी:4684]

▪️ खर्च करने वाले के माल में अल्लाह रब्बुल बरकत देता है और साथ ही उसका अज्र आखिरत में भी देगा।

▪️ अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त अपने इंसाफ़ से लोगों को बुलंदी और पस्ती (नीचे) पर पहुंचता है।

"ईमान लाओ अल्लाह और उसके रसूल ﷺ पर और ख़र्च करो उन चीज़ों में से जिन पर उसने तुमको ख़लीफ़ा बनाया है। जो लोग तुममें से ईमान लाएँगे और माल ख़र्च करेंगे उनके लिये बड़ा अज्र है।" [कुरान 57.7]

▪️ जिन पर उसने तुमको ख़लीफ़ा बनाया है। यानि अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त इंसानों को जिन जिन चीज़ों के उसे ताक़त (जान, माल औलाद और ज़हानत) बख़्शी उन सब को अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त की राह में लगा दो।

▪️ माल ख़र्च करेंगे उनके लिये बड़ा अज्र है। माल ख़र्च करने वालों के अज्र अलग से बयान फ़रमाया।


अहमद बज़्मी

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

क्या आपको कोई संदेह/doubt/शक है? हमारे साथ व्हाट्सएप पर चैट करें।
अस्सलामु अलैकुम, हम आपकी किस तरह से मदद कर सकते हैं? ...
चैट शुरू करने के लिए यहाँ क्लिक करें।...