ज़कात न देने वालों का अंजाम
وَٱلَّذِينَ يَكۡنِزُونَ ٱلذَّهَبَ وَٱلۡفِضَّةَ وَلَا يُنفِقُونَہَا فِى سَبِيلِ ٱللَّهِ فَبَشِّرۡهُم بِعَذَابٍ أَلِيمٍ يَوۡمَ يُحۡمَىٰ عَلَيۡهَا فِى نَارِ جَهَنَّمَ فَتُكۡوَىٰ بِہَا جِبَاهُهُمۡ وَجُنُوبُہُمۡ وَظُهُورُهُمۡۖ هَـٰذَا مَا ڪَنَزۡتُمۡ لِأَنفُسِكُمۡ فَذُوقُواْ مَا كُنتُمۡ تَكۡنِزُونَ
"जो सोना और चाँदी जमा करके रखते हैं और उन्हें अल्लाह की राह में ख़र्च नहीं करते. तो याद रखो, जिस दिन सोने-चाँदी पर जहन्नम की आग दहकाई जाएगी और फिर इसी से उन लोगों की पेशानियों और पहलुओं और पीठों को ( यह कहते हुए) दाग़ा जाएगा कि यही है वह ख़ज़ाना जो तुमने अपने लिए जमा किया था, लो अब अपनी समेटी हुई दौलत का मज़ा चखो।"
[सूरह 009 अत तौबा आयत 34 और 35]
आयत 34 का ही हिस्सा यह भी है:
يَـٰٓأَيُّہَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓاْ إِنَّ ڪَثِيرًا مِّنَ ٱلۡأَحۡبَارِ وَٱلرُّهۡبَانِ لَيَأۡكُلُونَ أَمۡوَٲلَ ٱلنَّاسِ بِٱلۡبَـٰطِلِ وَيَصُدُّونَ عَن سَبِيلِ ٱللَّهِۗ
"ऐ लोगो जो ईमान लाए हो, इन किताब वालों के ज़्यादातर विद्वानों और सन्तों का हाल यह है कि वह लोगों के माल ग़लत तरीक़े से खाते हैं और अल्लाह के रास्ते से रोकते हैं।"
यहां यहूद और ईसाइयों के मज़हबी रहनुमाओं के हराम माल इकट्ठा करने के बारे में बताया गया है लेकिन हमारे वह दुनियादार रहनुमा भी मुख़ातब हैं जो तक़वा का ज़ाहिरी लिबास पहन कर अवाम को उल्लू बनाते हैं। यह ज़ालिम सिर्फ़ यही सितम नहीं करते कि फ़तवे बेचते हैं, रिश्वतें खाते हैं, नज़राने लूटते हैं, ऐसे-ऐसे मज़हबी क़ानून और रस्में घड़ते हैं कि लोग अपनी नजात (मुक्ति) इनसे ख़रीदें और उनका मरना-जीना और शादी व ग़म कुछ भी इनको खिलाये बग़ैर न हो सके और वह अपनी क़िस्मतें बनाने और बिगाड़ने का ठेकेदार इनको समझ लें बल्कि इससे भी आगे बढ़कर अपने इन्हीं मक़ासिद की ख़ातिर यह लोग अल्लाह की मख़लूक़ को गुमराहियों के दलदल में फँसाए रखते हैं और जब भी कोई हक़ की दावत सुधार और इस्लाह के लिए उठती है तो सबसे पहले यही अपनी आलिमाना धोखेबाज़ियों और मक्कारियों के हथियार लेकर उस दावत का रास्ता रोकने खड़े हो जाते हैं।
مَا مِنْ صَاحِبِ ذَهَبٍ وَلَا فِضَّةٍ لَا يُؤَدِّي مِنْهَا حَقَّهَا إِلَّا إِذَا كَانَ يَوْمُ الْقِيَامَةِ صُفِّحَتْ لَهُ صَفَائِحُ مِنْ نَارٍ فَأُحْمِيَ عَلَيْهَا فِي نَارِ جَهَنَّمَ فَيُكْوَى بِهَا جَنْبُهُ وَجَبِينُهُ وَظَهْرُهُ كُلَّمَا بَرَدَتْ أُعِيدَتْ لَهُ فِي يَوْمٍ كَانَ مِقْدَارُهُ خَمْسِينَ أَلْفَ سَنَةٍ حَتَّى يُقْضَى بَيْنَ الْعِبَادِ فَيَرَى سَبِيلَهُ إِمَّا إِلَى الْجَنَّةِ وَإِمَّا إِلَى النَّارِ
"जो भी सोने और चांदी के मालिक हों और वह उसका हक़ (ज़कात) अदा नहीं करते तो क़यामत के दिन उनकी चौड़ी चौड़ी सलाखें बनाई जाएंगी, उन सलाख़ों को जहन्नम की आग में गर्म किया जाएगा और फिर उन सलाख़ों से उनके पहलू उनकी पेशानी और उनकी पीठ को दाग़ा जाएगा। जब वह सलाखें ठंडी हो जाएंगी तो उन्हें फिर से गर्म किया जाएगा और उन्हें फिर से दाग़ने के लिए वापस लाया जाएगा। वहां एक दिन दुनिया के पचास हज़ार वर्ष के बराबर होगा। दाग़ने का यह अमल लगातार जारी रहेगा यहां तक कि बंदों के दरमियान फ़ैसला कर दिया जाएगा फिर वह जन्नत या जहन्नम की तरफ़ अपना रास्ता देख लेगा।"
[सही मुस्लिम हदीस 2290/ किताबुज़ ज़कात, ज़कात ना निकालने का गुनाह]
عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ آتَاهُ اللَّهُ مَالًا فَلَمْ يُؤَدِّ زَكَاتَهُ مُثِّلَ لَهُ مَالُهُ يَوْمَ الْقِيَامَةِ شُجَاعًا أَقْرَعَ لَهُ زَبِيبَتَانِ يُطَوَّقُهُ يَوْمَ الْقِيَامَةِ ثُمَّ يَأْخُذُ بِلِهْزِمَتَيْهِ يَعْنِي بِشِدْقَيْهِ ثُمَّ يَقُولُ أَنَا مَالُكَ أَنَا كَنْزُكَ ثُمَّ تَلَا { لَا يَحْسِبَنَّ الَّذِينَ يَبْخَلُونَ} الْآيَةَ
सैयदना अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु बयान करते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: "जिसे अल्लाह ने माल व दौलत दिया और उसने उसकी ज़कात अदा नहीं की तो क़यामत के दिन उसका माल ज़हरीले गंजे सांप की शक्ल इख़्तियार कर लेगा, उसकी आंखों के पास दो काले बिंदु (Black dots) होंगे जैसे सांप के होते हैं फिर वह सांप अपने दोनों जबड़ों से उसे पकड़ लेगा और कहेगा मैं हूं तेरा माल, मैं हूं तेरा ख़ज़ाना उसके बाद आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इस आयत की तिलावत की।"
وَلَا يَحْسَبَنَّ الَّذِينَ يَبْخَلُونَ بِمَا آتَاهُمُ اللَّهُ مِنْ فَضْلِهِ هُوَ خَيْرًا لَهُمْ ۖ بَلْ هُوَ شَرٌّ لَهُمْ ۖ سَيُطَوَّقُونَ مَا بَخِلُوا بِهِ يَوْمَ الْقِيَامَةِ ۗ وَلِلَّهِ مِيرَاثُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۗ وَاللَّهُ بِمَا تَعْمَلُونَ خَبِير
"जिन लोगों को अल्लाह ने अपने फ़ज़ल से नवाज़ा है और फिर वह कंजूसी से काम लेते हैं, वह यह न समझें कि यह कंजूसी उनके लिये अच्छी है। नहीं, यह उनके लिये बहुत ही बुरी है। जो कुछ वह अपनी कंजूसी से जमा कर रहे हैं वही क़यामत के दिन उनके गले का तौक़ बन जाएगा।"
[सही बुख़ारी, हदीस 1403/ किताबुज़ ज़कात, ज़कात अदा न करने का गुनाह, (सूरह 03 आले इमरान आयत 180]
इस्लामी हुकूमत में अगर कोई ज़कात का इंकार करें तो उससे जंग की जाएगी।
عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَ لَمَّا تُوُفِّيَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَاسْتُخْلِفَ أَبُو بَكْرٍ بَعْدَهُ وَكَفَرَ مَنْ كَفَرَ مِنْ الْعَرَبِ قَالَ عُمَرُ لِأَبِي بَكْرٍ كَيْفَ تُقَاتِلُ النَّاسَ وَقَدْ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أُمِرْتُ أَنْ أُقَاتِلَ النَّاسَ حَتَّى يَقُولُوا لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ فَمَنْ قَالَ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ عَصَمَ مِنِّي مَالَهُ وَنَفْسَهُ إِلَّا بِحَقِّهِ وَحِسَابُهُ عَلَى اللَّهِ فَقَالَ وَاللَّهِ لَأُقَاتِلَنَّ مَنْ فَرَّقَ بَيْنَ الصَّلَاةِ وَالزَّكَاةِ فَإِنَّ الزَّكَاةَ حَقُّ الْمَالِ وَاللَّهِ لَوْ مَنَعُونِي عِقَالًا كَانُوا يُؤَدُّونَهُ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَقَاتَلْتُهُمْ عَلَى مَنْعِهِ فَقَالَ عُمَرُ فَوَاللَّهِ مَا هُوَ إِلَّا أَنْ رَأَيْتُ اللَّهَ قَدْ شَرَحَ صَدْرَ أَبِي بَكْرٍ لِلْقِتَالِ فَعَرَفْتُ أَنَّهُ الْحَقُّ
अबु हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की वफ़ात के बाद जब अबू बक्र के कंधों पर ख़िलाफ़त का बार पड़ा और अरब के कुछ लोगों ने इस्लाम को छोड़ दिया तो अबू बक्र रज़ियल्लाहु अन्हु ने उनसे जंग करने का इरादा किया इस पर उमर रज़ियल्लाहु अन्हु ने उनसे कहा, आप उन लोगों से जंग कैसे कर सकते हैं हालांकि नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का फ़रमान है "मुझे हुक्म दिया गया है कि मैं उस वक़्त तक लोगों से जंग जारी रखूं जब तक कि वह गवाही न दे दें कि "अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं। जिसने यह शहादत दे दी उसने मुझसे अपना माल और अपनी जान बचा ली सिवाए इसके कि इस्लाम का हक़ उसका ख़ून चाहता हो और उसका हिसाब किताब अल्लाह के ज़िम्मे होगा" अबु बक्र ने फ़रमाया, अल्लाह की क़सम! मैं उन लोगों से ज़रूर जंग करूंगा जिन्होंने नमाज़ और ज़कात के दरमियान जुदाई डाल दी जबकि ज़कात अल्लाह का हक़ है। अल्लाह की क़सम अगर उन लोगों ने मुझ से एक रस्सी भी रोकी जिसे वह नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को दिया करते थे। इस पर उमर रज़ियल्लाहु अन्हु ने कहा, मुझे जल्द ही महसूस हुआ कि अल्लाह ने जंग के लिए अबू बक्र का सीना खोल दिया है और मैं यह भी समझ गया कि वह हक़ पर हैं।
[सही मुस्लिम हदीस 124/किताबुल ईमान और सही बुख़ारी 1399/ (किताबुज़ ज़कात, ज़कात के वाजिब होने का बयान]
इमाम ख़त्ताबी रहमतुल्लाह अलैहि ने इस हदीस को को नक़ल करने के बाद लिखा हैं कि अबु बक्र रज़ियल्लाहु अन्हु ने जिन लोगों से जंग की वह चार तरह के लोग थे।
1, वह जो सिरे से इस्लाम ही से मुर्तद हो गए थे।
2, जिन्होंने पूरे इस्लाम का तो इंकार नहीं किया था लेकिन नमाज़ और ज़कात के मुनकिर हो गए थे।
3, जो नमाज़ तो पढ़ते थे लेकिन ज़कात के मुन्किर हो गए थे।
4, जो ज़कात भी देते थे लेकिन उसको बैतुलमाल में जमा करना नहीं चाहते थे।
[ब हवाला, फ़िक़हुस सुन्ना मुहम्मद आसिम अल हद्दाद पेज नंबर 323, किताबुज़ ज़कात, प्रकाशन मरकज़ी मक्तबा इस्लामी पब्लिशर्स, नई दिल्ली जून 2017]
عن ابن عمر، قال: أقبل علینا النبی صلی اللہ علیہ وسلم فقال: لم یمنع قوم زکاۃ أموالہم إلا منعوا القطر من السماء ، ولولا البہائم لم یمطروا (المعجم الکبیر للطبرانی۱۲/۴۴۶)
والحاكم والبيهقي في حديث؛ إلا أنهما قالا: "ولا مَنَعَ قومٌ الزكاةَ؛ إلا حَبَسَ اللهُ عنهم القَطْرَ".
وقال الحاكم: "صحيح على شرط مسلم
इब्ने उमर रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हमारे पास आए और फ़रमाया: "जो लोग ज़कात अदा नहीं करते उनसे बारिश रोक ली जाती है और अगर जानवर न होते पानी का एक क़तरा भी न बरसता।"
[अल मुअजम अल कबीर तबरानी, सुनन इब्ने माजा हदीस 4019 किताबुल फ़ितन, सज़ाओं का बयान,, सही अत तरग़ीब वत तरहीब लिल अल्बानी 763/ज़कात न देने का अंजाम]
عن أنس بنِ مالكٍ رضي الله عنه قال: قال رسول الله - صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ -: "مانعُ الزكاة يومَ القيامة في النار". - [حسن صحيح: الترهيب من منع الزكاة، وما جاء في زكاة الحلي]
अनस बिन मालिक रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: "ज़कात न देने वाला क़यामत के दिन आग में होगा।"
[सही अत तरग़ीब वत तरहीब लिल अल्बानी 762/ज़कात न देने का अंजाम]
عن بُريدة رضيَ الله عنه قال: قال رسول الله - صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ -: "ما منعَ قومٌ الزكاةَ؛ إلا ابْتَلاهم الله بالسنين". رواه الطبراني في "الأوسط"، ورواته ثقات،
बुरैदा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: "ज़कात न देने वालों को अल्लाह क़हत में मुब्तिला कर देता है।"
[सही अत तरग़ीब वत तरहीब लिल अल्बानी 763/ज़कात न देने का अंजाम]
इन शा अल्लाह अगली किस्त में "ज़कात देने के फ़ायेदे" के बारे में जानेंगे।
आसिम अकरम (अबु अदीम) फ़लाही
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