kya ramzaan mein har nek kaam ka sawab 70 guna badh jata hai?

 
70 Guna sawab ramazaan me

क्या रमजान में हर नेक काम का सवाब 70 गुना बढ़ जाता है?

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70 गुना सवाब वाली रिवायत अहले इल्म के नजदीक ज़इफ है सहीह मसला यही है की रमजान हो या ग़ैर ए रमजान नेक आमाल का अज्र इंसान के खुलूस इखलास और तकवा की वजह से 10 गुना से 700 गुना बल्कि उससे भी बढ़ा दिया जाता है |


अल्लाह फरमाता है :-

مَن جَاءَ بِالْحَسَنَةِ فَلَهُ عَشْرُ‌ أَمْثَالِهَا ۖ وَمَن جَاءَ بِالسَّيِّئَةِ فَلَا يُجْزَىٰ إِلَّا مِثْلَهَا وَهُمْ لَا يُظْلَمُونَ

और जो कोई (अल्लाह के हुज़ूर ) नेकी लेकर आएगा उसको वैसे ही 10 नेकियां मिलेगी और जो बुराई लेकर आएगा उसे सज़ा वैसे मिलेगी और उन पर जुल्म नहीं किया जाएगा |

[सुरह अनाम 160]


एक और जगह अल्लाह फरमाता है :-

مَّثَلُ الَّذِينَ يُنفِقُونَ أَمْوَالَهُمْ فِي سَبِيلِ اللَّـهِ كَمَثَلِ حَبَّةٍ أَنبَتَتْ سَبْعَ سَنَابِلَ فِي كُلِّ سُنبُلَةٍ مِّائَةُ حَبَّةٍ ۗ وَاللَّـهُ يُضَاعِفُ لِمَن يَشَاءُ ۗ وَاللَّـهُ وَاسِعٌ عَلِيمٌ

जो लोग अपना माल अल्लाह की राह में खर्च करते हैं इन (के माल ) की मिसाल उस दाने की सी है जिसके 07 बांले आगे और हर एक बाल में सो सो दाने हो और अल्लाह जिस (के माल ) को चाहता है ज़्यादा करता है वो बड़ी वुसअत वाला और सब कुछ जानने वाले है

[सुरह बक़रा 261]



इसके मुताल्लिक बयान की जाने वाली हदीस

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हजरत सलमान फारसी रजिअल्लाह अन्हु रिवायत है कि नबी सल्लल्लाहो अलेही वसल्लम ने हमे शाबान के आखिरी दिन खुतबा दिया और फ़रमाया लोगों तुम पर अजमत और बरकत वाला महीना साया फगन हो रहा है ऐसा महीना जिसमें एक रात ऐसी है जो हजार महीनों से बेहतर है उसके रोजे अल्लाह ने फर्ज करार दिया और उसकी रात का क़ियाम नफिल है जिसने भी इस महीने में नेकी की वह ऐसा है जैसा आम दिनों में फर्ज अदा किया जाए और जिसने रमजान में फर्ज अदा किया होगा उसने रमजान के अलावा 70 फर्ज अदा किए यह सा महीना है जिसका अव्वल रहमत और बीच का मगफिरत  और आखिरी हिस्सा जहन्नम से आजादी है |

[इब्ने खुजैमा हदीस 1887]


  1. हदीस ज़इफ है इमाम इब्ने खुज़ेमा बाब (चैप्टर ) बाँधते है कि अगर ये हदीस सहीह है तो रमजान के फज़ाईल का बयान----->>यानी इमाम इब्ने खुज़ेमा भी इस हदीस को ज़इफ मान रहे हैं जब साहिब ए किताब (Author) इसमें मशक़ूक है तो बाकी बात ही ख़त्म हो गयीं |
  2. इस हदीस एक रावी है अली बिन ज़ैद बिन जुदआन ये ज़इफ है [ तकरीब उत तहज़ीब 4743]
  3.  जमहूर मुहद्दासीन ने इस रावी को ज़इफ क़रार दिया है
  4. इमाम नसई और इब्ने हजर रहीमल्लाह ने इसे ज़इफ कहा,
  5.  इमाम अहमद बिन हम्बल ने इसे लैस बी शयी (ये कुछ भी शय नहीं यानी फ़िज़ूल ) था
  6. और इमाम अबू ज़ुरआ और अबू हातिम अर राज़ी ने इसे लैस बिल क़वी (मज़बूत नहीं ) था कहा है [अल इलल ला इब्ने अबी हातिम 01/251 अल कामिल ला इब्ने अदी 04/333, तक़रीब 02/43 जरह व तादील 02/249]

इसके अलावा कसीर मुहद्दासीन ने इसको ज़इफ कहा है मुख़्तसर आपके सामने बता दिया हैं


दूसरी बात रमजान का पूरा अशरा ही रहमत का है


नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया :-

जब रमजान आता है जन्नत के दरवाज़े खोल दिए जाते हैं और दोज़ख के दरवाज़े बंद कर दिए जाते हैं और शैतान बेड़ियों मे जकड़ दिया जाता है  [सहीह मुस्लिम 1079 ]


आपका दीनी भाई

मुहम्मद

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