Ramzan mein sadqe ki ahmiyat, ajr, sawab aur fayde

 

Ramzan mein sadqe ki ahmiyar, ajr, sawab aur fayde

रमज़ान में सदक़ा की अहमियत

(ये रोज़े) "गिनती के चंद दिन है फिर तुम में से जो बीमार हो या सफर पर हो तो दूसरे दिनों में गिनती पूरी कर ले और जो लोग रोजा रखने की ताकत रखते हो (मगर न रखे) तो इसका फिदिया एक मिस्किन का खाना है जो शख़्स अपने खुशी से ज़्यादा भलाई करे तो इसके लिए बेहतर है अगर तुम रोज़े रखो तो ये तुम्हारे लिए बेहतर है अगर तुम समझो।"
[कुरान: 2.184]

▪️ जैसा कि हमनें देखा हर नेकी सदक़ा है और इस आयत अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त फ़रमा रहा है जो ज़्यादा भलाई के काम करे उसके लिए बेहतर है। 

▪️ एक हदीस के मुताबिक़;

 नबी करीम ﷺ ने फ़रमाया, "जब रमज़ान की पहली रात आती तो शैतानों को और सरकश जििन्नों को जकड़ दिया जाता। जहन्नुम के दरवाज़े बंद कर दिय जाते हैं, इनमें से कोई दरवाज़ा खोला नहीं रहता और जन्नत के दरवाज़े खोल दिय जाते हैं, इनमें से कोई दरवाज़ा बंद नहीं रहता और एक ऐलान करने वाला मुनादी करता है: ए नेकी के तलबगार, आगे बढ़ और बुराई के तलबगार रुक जा। और अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त जहन्नुम से बाज़ लोगों को आज़ाद करता है।(रमज़ान में) हर रात इसी तरह होता है।" [सुन्न इब्ने माजा:1642]

▪️ रमज़ान के जितने भी दिन हमें मिल जाएं, हमें चाहिए कि उसे हम ख़ुद के लिए बा' ईस ए अज्र बना लें।

▪️ जन्नत के आठ दरवाजों में से एक दरवाज़ा सदका का है जिस हम खुद के लिए जन्नत में जानें का रास्ता बना सकते हैं।

अब्दुल्लाह बिन अब्बास (रज़ी०) ने कहा नबी करीम ﷺ सख़ावत और ख़ैर के मामले में सबसे ज़्यादा सखी थे आप (ﷺ) की सख़ावत इस वक्त और बढ़ जाती थी जब जिब्राइल (अ०) आप ﷺ से रमज़ान में मिलते, जिब्राइल (अ०) नबी करीम ﷺ से रमज़ान की हर रात में मुलाकात करते यहां तक की रमज़ान गुज़र जाता नबी करीम ﷺ जिब्राइल (अ०) से कुरआन का दौरा करते थे जब जिब्राइल (अ०) आप ﷺ से मिलने लगते तो आप ﷺ चलती हवा से ज़्यादा भलाई पहुंचाने में सखी हो जाया करते थें।" [सहीह बुखारी:1902]

▪️ नबी करीम ﷺ हमेशा ही ख़ैर और भलाई का काम करते लेकिन रमज़ान के दिनों और भी ज़्यादा इन कामों की तरगीब देते। 

▪️ नबी करीम ﷺ ने कभी ज़कात नहीं दिया उसकी वजह ही यही थी कि आप ﷺ कभी भी अपने कोई माल जमा नहीं करते थें बल्कि उसे सदक़ा कर देते थें। जबकि आप ﷺ के वहां खाने की तंगी होती थी।

नबी करीम ﷺ ने फ़रमाया, "मुझे इससे बिल्कुल खुशी नहीं होगी कि मेरे पास इस उहद के बराबर सोना हो और उस पर तीन दिन इस तरह गुज़र जाए कि इसमें से एक दिनार बाक़ी रह जाए, सिवाय उस थोड़ी सी रकम के जो मैं क़र्ज़ की अदायगी के लिए छोड़ दूं बल्कि मैं उस अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त के बंदों में इस तरह खर्च करूं अपनी दाईं तरफ से, बाईं तरफ से और पिछे से। फिर नबी करीम ﷺ ने फ़रमाया ज़्यादा माल जमा रखने वाले ही क़यामत के दिन मुफ्लिस होगें। सिवाय उस शख़्स के जो खर्च करे और ऐसे लोग कम हैं।" [सहीह बुखारी:6444)

▪️ ये हदीस नबी करीम ﷺ औसाफ (attribute) को बयान करती है कि आप ﷺ के पास सोने का पहाड़ होता तो आप ﷺ उसे तीन दिन में सदका कर देते।


सदक़ा करने का अज्र और सवाब

सदक़ा करने का अज्र और सवाब उस हदीस से ही लगाया जा सकता है, सदक़ा करने वाले का अमाल नामा उसके मरने के बाद भी खुला रहता है और मुसलसल उसकी नेकियों में इज़ाफ़ा होता रहता है।

नबी करीम ﷺ ने फ़रमाया, "जो शख़्स अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त की राह में कोई चीज़ खर्च करे तो उसके वो चीज़ सात सौ गुना तक बढ़ा कर लिखी जाती है।" [सहीह बुखारी, मुस्लिम]

▪️ दुनिया के मुताबिक़ नहीं क्योंकि दुनिया में अलग अलग मुमालिक की currency अलग अलग value की है। 

▪️ किसी अमल के नातीजे में फ़र्क सिर्फ़ नियत की बिना पर पड़ता है।

"मर्दों और औरतों में से जो लोग सदक़े देनेवाले हैं और जिन्होंने अल्लाह को क़र्ज़े-हसन दिया है, उनको यक़ीनन कई गुना बढ़ाकर दिया जाएगा और उनके लिये बेहतरीन अज्र है।" [कुरान:57.18]

▪️इस आयत से पता चलता है अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त की राह में माल खर्च करना गोया अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त को क़र्ज़ देना।

▪️ अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त इस क़र्ज़ बढ़ा कर अपने बंदों को लौटाएगा।


सदके के फ़ायदे या फज़ीलत

1. सदका जहन्नम की आग से बचने का ज़रिया

नबी करीम ﷺ को यह कहते हुए सुना की, "जहन्नम से बचो अगर एक खजूर का एक टुकड़ा दे कर ही सही। (मगर ज़रूर सदका करके जहन्नम की आग से बचने की कोशिश करो।)" [सहीह बुखारी:1417]


2. सदका के ज़रिए रोज़ ए महशर अल्लाह का साया हासिल होगा

नबी करीम ﷺ ने फ़रमाया, "सात किस्म के लोगों को अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त अपने (अर्श के) साए में रखेगा जिस दिन उसके साए के सिवा और कोई साया ना होगा।" [सहीह बुखारी:660]

उन सात लोगों में से छटा वो शख़्स (वो इंसान जो सदका करे और उसे इस दर्जा छिपाए कि बाएं हाथ को ख़बर ना हो कि दाहिने हाथ ने ख़र्च किया) सदका करने वाला होगा।


3. सदका करने वाले के लिए जन्नत का एक ख़ास दरवाज़ा

जन्नत के आठ दरवाज़े हैं जिनमें से एक सदका करने वाले के लिए ख़ास है।

नबी करीम ﷺ ने फ़रमाया, "जो अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त की राह में दो चीज़े ख़र्च करेगा उसे फरिश्ते जन्नत के दरवाजों से बुलाएंगे कि ऐ अल्लाह के बंदे! ये दरवाज़ा अच्छा है।" [सहीह बुखारी:1897]


4. बीमारियों से निजात का ज़रिया

"सदक़े के ज़रिये मरीज़ों का इलाज करो।" [सहीह अल जामे 3358]

▪️ इसका हरगिज़ मतलब ये नहीं होगा कि आप अपना ईलाज ना करवाएं, ईलाज के साथ साथ सदका और अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त पर तवक्कुल करें।


5. सदका करने वाले के माल में बरकत के लिए फरिश्ते दुआ करते हैं

नबी करीम ﷺ ने फ़रमाया, "कोई दिन ऐसा नहीं जाता की जब बंदे सुबह को उठते है तो दो फरिश्ते आसमान से न उतरते हो। एक फरिश्ता तो ये कहता है की ऐ अल्लाह! खर्च करने वाले को उसका बदला दे। और दूसरा कहता है की ऐ अल्लाह! बखील के माल को तल्फ (destroy)" [सहीह बुखारी:1442]

▪️ इस हदीस में ना ख़र्च करने वाले के लिए फरिश्तों की बद दुआ भी शामिल है।


6. सदका बुरी मौत और अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त के ग़ज़ब से बचाता है

नबी करीम ﷺ ने फ़रमाया, "सदका, अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त के गुस्से को बुझा देता है और बुरी मौत से बचाता है।" [सुन्न तिरमिज़ी:664]


7. सदका गुनाहों का कफ्फारा है

नबी करीम ﷺ फ़रमाया, "सदका गुनाहों को बुझा देता है जैसे पानी आग को बुझा देता है।" [सुन्न तिरमिज़ी:614]

▪️ अब ऐसा ही होना चाहिए कि इसी आस में हम गुनाह पर गुनाह किए चले जाएं।

▪️एक और बात वाज़ेह कर दें कि जब हम कोई अमल ख़ालिस अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त के लिए करते हैं तो उसके बरक्स हमें कुछ और करने को दिल नहीं करता यानि सदका गुनाहों के कफ्फारे के तौर पर करेंगे तो माज़ीद गुनाह करने का ख्याल नहीं आएगा।


अहमद बज़्मी

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