Ramzan ki training ke fayde

Ramzan ki training ke fayde


रमज़ान ट्रेनिंग

रमज़ान मे हम हुक्म ए रब्बी पर हलाल से भी रुक जाते हैं, ये हमारे ईमान का सबसे बड़ा टेस्ट है। 

रोज़ा एक प्रोसीजर है, अपने नफ्स को ट्रेंड करने का और अपने नफ्स को मुकम्मल तौर पर अल्लाह पाक की ग़ुलामी मे देने का। इस पूरे प्रोसीजर के पीछे मक़सद है पूरे साल अपनी जिंदगी को अल्लाह पाक के अहकामात पर इसी तरह गुज़ारना, जैसे रमज़ान मे गुजारते हैं। 

पूरे टाइम ये ख्याल रहता है कि अल्लाह देख रहा है। नमाज़ न छुट जाए, दिल नर्म हो जाते हैं, नेकी की तरफ़ माइल होते हैं, और ज़्यादा से ज़्यादा खुद को रब के करीब करने की कोशिश मे लगे रहते हैं। 

ट्रेनिंग है एक आइडियल गुड केरेक्टर बिल्ड करने की। इसमे हम झूट, धोखेबाजी, गी़बत, बदनज़री, हराम, लड़ाई-झगड़े, गर्ज़ ये के हर बुराई से रुक जाते हैं। और फिर बाकी 11 महीने इसे कन्सिसटेंन्सी देनी होती हैं।  

पूरे रमज़ान हम खुद को हलाल चीज़ों से भी रोक लेते हैं बा आसानी। इससे हमे सेल्फ कंट्रोल की नाॅलेज होती है कि हम अगर चाहें, हम अगर ठान लें, तो कुछ नामुमकिन नहीं। अल्लाह पाक ने ये क्वालिटी भी दी है हमे अल्हम्दुलिल्लाह 

रमज़ान मे जब रूह को गिज़ा मिलती है तो किस तरह रूहानियत हमारे अन्दर घर करती है, किस तरह हम अपने रब को हम खुद से करीब तर पाते हैं और फिर रब के अहकामात पर अमल करना आसान होता है।  

रमज़ान मे क़ुरान को ज़्यादा से ज़्यादा पढ़ने की तरग़ीब दी जाती है क्यूंकि इन दिनों दिल नर्म होते हैं और नेकियो की तरफ़ रागिब होते हैं , और नर्म दिल मे अल्लाह के अहकामात बा आसानी जज़्ब हो सकते हैं। 

नोट: कुरान का पहला लफ्ज़ है "इक़रा'' जिसका माना है "समझ कर पढ़ना" और समझ कर पढ़ने से ही कुरान मे अल्लाह क्या कहता है हम बखूबी जान सकते हैं। 

یٰۤاَیُّہَا الَّذِیۡنَ اٰمَنُوۡا کُتِبَ عَلَیۡکُمُ الصِّیَامُ کَمَا کُتِبَ عَلَی الَّذِیۡنَ مِنۡ قَبۡلِکُمۡ لَعَلَّکُمۡ تَتَّقُوۡنَ 

ऐ ईमान वालो! "तुम पर रोज़ा फ़र्ज़ किया गया है, जैसे तुमसे पहले लोगों पर फ़र्ज़ किया गया था, ताकि तुम तक़वा अपनाओ।" [क़ुरआन 2: 183]

इस आयत ए मुबारका से साफ़ व ज़ाहिर है कि हमे रोज़े रखने का हुक्म देने का मकसद हमारे अंदर तक़वा दाखिल करना है। अल्लाह के डर से, अल्लाह की नाराज़गी के डर से , अल्लाह की मुहब्बत के खो जाने के डर से, गुनाहों, बुराईयों से बचा-बचा कर चलना ही तक़वा है। 

तो आइये दिल को साफ़ करते हैं और ये नियत करते हैं कि इस रमज़ान हम अपनी इबादतों को सिर्फ गिनती तक ही मेहदूद नहीं रखेंगे। 

तो इंशा अल्लाह नियत करते हैं कि इस रमज़ान अपने रब की रज़ा हासिल करने के लिए इख्तियार करने की सारी कोशिशें करेंगे और हुजूर की तमामअख़लाक़ी, अमली सुन्नतों पर अमल करते हुए एक गुड एंड आइडिल केरेक्टर बिल्ड करेंगे और इंसानियत की मदद के लिए आगे रहेंगे, जिससे कि उम्मत को फायदा पहुंचे और एक बेहतर समाज बनाने मे मदद मिल सके। और फिर रमज़ान गुज़र जाने के बाद भी एक ट्रेंड मुस्लिम बनकर ही रहेंगे। 

इन शा अल्लाह 

आमीन


आपकी दीनी बहन 
मोमिना ऐजाज़

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