अहले सुन्नत के इमामों का तक़लीद पे मौकुफ !!
1. हज़रत मुआज़ बिन जबल रज़ी० ने फरमाया:
أما العالم فإن اهتدى فلا تقلدوه دينكم
"अगर आलिम हिदायत पर भी हो तो अपने दीन में उसकी तक़लीद ना करो।"
(جامع بیان العلم وفضلہ ۲/ ۲۲۲ ۷ ، حدیث: ۹۵۵ ، وسند حسن )
2. हज़रत अब्दुल्लाह इब्ने मसूऊद रज़ी० ने फरमाया:
أغـد عـالـمـا أو متعلما ولا تعد إمعة بيـن ذلك
"आलिम बनो या मुताअल्लिम (तालीब ए इल्म), इन दोनो के दरमियान (यानी इन दोनो के अलावा) मुकल्लिद ना बनो।"
( جامع بیان العلم وفضلہ ۱/ ۱۷- ۷۲ ، حدیث: ۱۰۸ ، وسندہ حسن)
3. हज़रत अब्दुल्लाह इब्ने मसूऊद रज़ी० ने फरमाया:
لا تقلدوا دينكم الرجال
"अपने दीन में मर्दों (यानी लोगों) की तक़लीद ना करो।"
(सुनन अल कुबरा बैहकी: 2/10, सनद: सही)
"अपने दीन में मर्दों (यानी लोगों) की तक़लीद ना करो।"
(सुनन अल कुबरा बैहकी: 2/10, सनद: सही)
4. हाफ़िज़ इब्ने अब्दुल बर रह० फरमाते हैं,
وَالْمُقَلِّدُ لَا عِلْمَ لَہٗ، وَلَمْ یَخْتَلِفُوا فِي ذٰلِکَ
"अहले इल्म का इसमें कोई इख्तेलाफ नहीं की मुकल्लिद जाहिल ए मुतलक़ होता है।"
(جامع بیان العلم وفضلہ : 992/2)
दुआओं में याद रखें,
आपका दीनी भाई
मुहम्मद अज़ीम
मुहम्मद अज़ीम
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