Khulasa e Qur'an - surah 47 | surah muhammad

Khulasa e Qur'an - surah | quran tafsir

खुलासा ए क़ुरआन - सूरह (047) मुहम्मद


بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ


सूरह (047) मुहम्मद 


(i) नेक अमल कब बर्बाद हो जाते हैं?

◆ जब इंसान कुफ़्र करे और अल्लाह के रास्ते से लोगों को रोके, 

◆ अल्लाह की नाज़िल की हुई चीज़ से नफ़रत (घृणा), करे 

 ◆ वह काम करे जो अल्लाह को नापसंद हों या उसको नाराज़ करने वाले हों, 

◆ जब अपनी मनमानी की जाय, 

◆जब रसूल के फ़ैसले को क़ुबूल न किया जाय 

(1, 9, 16 28, 32)


(ii) मुसलमानों को तसल्ली

अल्लाह की मदद और रहनुमाई का यक़ीन, अल्लाह के रास्ते में क़ुरबानी देने पर बेहतरीन बदले की उम्मीद, और हक़ के रास्ते में की गई कोशिशों का दुनिया से आख़िरत तक अच्छा नतीजा और इनआम, जन्नत का वादा। (7, 12, 


(iii) जन्नत की मिसाल

जन्नत में ऐसी नहरें हैं जिसका पानी भूरा (गदला) नहीं होता, दूध की नहर जिसका मज़ा (test) तब्दील नहीं होता, शराब की नहर जो पीने में बहुत ही स्वादिष्ट, ख़ालिस शहद की नहर और तमाम क़िस्म के फल और मेवे और सबसे बढ़ कर रब की बख़्शिश। (15)


(iv) क़ुरआन ग़ौर व फ़िक्र की दावत देता है

मौजूदा दौर में क़ुरआन एक ऐसी मज़लूम किताब हो कर रह गई है कि सबसे ज़्यादा पढ़ी जाती है ख़ास तौर से भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश में जहाँ क़ुरआन को महज़ सवाब की ख़ातिर पढ़ने से ज़्यादा अहमियत नहीं दी जाती। लोग रमज़ान में 5, 5 और 6, 6 बार मुकम्मल पढ़ जाते हैं लेकिन उसके असल मक़सद से नावाक़िफ़ हैं। अफ़सोस तो इसपर है कि समाज में यह मशहूर कर दिया गया है क़ुरआन पढोगे तो गुमराह हो जाओगे। अमेरिका, लंदन और दूसरे देशों में तो non muslim क़ुरआन को समझ कर इस्लाम क़ुबूल कर रहे हैं और यह उम्मत जो इस क़ुरआन की तरफ़ बुलाने वाली और बेहतरीन उम्मत है वह क़ुरआन समझ के गुमराह हो जाएगी। दूसरी तरफ़ अल्लाह क़ुरआन को किताबे हिदायत, ھُدًی لِّلنَّاسِ और وَبَیِّنٰتٍ مِّنَ الْھُدًی وَالْفُرْقَان कहता है और यहां आयत 24 में 

أَفَلَا يَتَدَبَّرُونَ الْقُرْآنَ أَمْ عَلَىٰ قُلُوبٍ أَقْفَالُهَا

तो क्या लोग क़ुरआन में (ज़रा भी) ग़ौर नहीं करते या उनके दिलों पर ताले लगे हुए हैं। (24)


(v) आमाल की बर्बादी

अल्लाह और उसके रसुल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की मुख़ालिफ़त हक़ीक़त में अपने आमाल की बर्बादी है। (25 से 28, 33)


आसिम अकरम (अबु अदीम) फ़लाही

आसिम अकरम (अबु अदीम) फ़लाही

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