खुलासा ए क़ुरआन - सूरह (046) अल अहक़ाफ़
सूरह (046) अल अहक़ाफ़
(i) कायनात की तख़लीक़ बे मक़सद नहीं
अल्लाह ने कायनात को बेमक़सद (खिलौना) नहीं बनाया है बल्कि यह एक बामक़सद हकीमाना निज़ाम है जिसमें अवश्य नेक व बद और ज़ालिम व मज़लूम का फ़ैसला इंसाफ़ के साथ होना है और कायनात का यह मौजूदा निज़ाम हमेशा हमेश के लिए नहीं है बल्कि उसकी एक उमर मुक़र्रर है जिसकी समाप्ति पर उसे दरहम बरहम हो जाना है और अल्लाह की अदालत में भी एक वक़्त तय है जिसके आने पर वह ज़रूर क़ायम होगी। (03)
(ii) ज़्यादा गुमराह कौन?
जो अल्लाह को छोड़कर उन्हें पुकारे जो क़यामत तक जवाब नही दे सकते बल्कि वह पुकार ही कब सुनते हैं? उन्होंने ज़मीन व आसमान में पैदा ही क्या किया है? यह शरीक तो क़यामत के दिन उनके दुश्मन हो जाएंगे। (4, 5)
(iii) रसूल को इल्म ग़ैब नहीं होता
“मैं कोई निराला रसूल तो नहीं हूँ, मैं नहीं जानता कि कल तुम्हारे साथ क्या होना है और मेरे साथ क्या, मैं तो सिर्फ़ उस वही (ईश्वरीय आदेश) की पैरवी करता हूँ जो मेरे पास भेजी जाती है और मैं एक साफ़-साफ़ ख़बरदार करनेवाले के सिवा और कुछ नहीं हूँ।” (09)
(iv) जन्नत के हक़दार कौन?
जिन्होंने ने यह ऐलान किया कि हमारा रब अल्लाह है और फिर उसपर जमे रहे। क़यामत के दिन न उन्हें कोई ख़ौफ़ होगा और न कोई तकलीफ़। (13)
(v) हमल (गर्भ) और दूध पिलाने की उम्र
हमल और दूध पिलाने की मुद्दत तीस महीने यानी ढाई वर्ष है, इसमें दूध पिलाने की अधिकतम मुद्दत दो वर्ष और गर्भ की न्यूनतम मुद्दत छः महीने रखी गई है यानी अगर किसी के यहां शादी के छः महीने बाद औलाद होती है तो उसका नसब पिता से ही होगा। औरत पर इसकी वजह से इल्ज़ाम नहीं लगाया जा सकता। (15)
नोट:- अलबत्ता आजकल के वैज्ञानिक अविष्कार ने इस समस्या का बहुत हद तक समाधान कर दिया है, यदि किसी को शक हो तो वह सोनोग्राफ़ी के ज़रिए पता लगा सकता है।
(vi) जिन्नात के क़ुरआन सुनने का बयान
यह वाक़िआ वादी (घाटी) नख़ला में पेश आया था जहां नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने तायफ़ से मक्का वापस होते हुए रास्ते में ठहरे थे। वहां इशा, फ़ज्र, या तहज्जुद की नमाज़ में आप क़ुरआन की तिलावत फ़रमा रहे थे कि जिन्नात के एक गिरोह का उधर से गुज़र हुआ, वह आप की क़िरअत सुनने के लिए ठहर गया। नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जिन्नों की आमद से बेख़बर थे। बाद में अल्लाह ने वही وحی के ज़रिए आप को ख़बर दी। जिन्न ईमान लाये और अपनी क़ौम में जाकर उन्होंने तीन बातें रखीं
◆ हमने मूसा के बाद ऐसा कलाम सुना है जो उसकी तस्दीक़ भी करता है और सिराते मुस्तक़ीम की तरफ़ रहनुमाई भी।
◆ अल्लाह की तरफ़ बुलाने वाले की दावत क़ुबूल कर लो, ईमान लाओ, अल्लाह तुम्हारे गुनाहों को माफ़ कर देगा।
◆ जो ईमान न लाए वह और उसके बनाये हुए देवी देवता अल्लाह को हर्गिज़ आजिज़ नहीं कर सकते (29, से 31)
(vii) अल्लाह को थकान नहीं लगती
यहूदी कहते थे कि अल्लाह ने छह दिनों में कायनात बनाई और सातवें दिन आराम किया। उसका जवाब देते हुए कहा गया कि अल्लाह ने कायनात बनाई और कोई थकावट नहीं आई। (33)
आसिम अकरम (अबु अदीम) फ़लाही
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