Khulasa e Qur'an - surah 59 | surah hashr

Khulasa e Qur'an - surah | quran tafsir


खुलासा ए क़ुरआन - सूरह (059) अल हशर


بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ


सूरह (059) अल हशर 


(i) बनी नज़ीर का निष्कासन

मदीने में यहूदियों के तीन क़बीले आबाद थे, बनी क़ैनक़ाअ, बनी नज़ीर और बनी क़ुरैज़ा, बनी क़ैनक़ाअ का निष्कासन 2 हिजरी में जंगें बदर में मुआहिदे तोड़ने के कारण हो चुका था, अब बनी नज़ीर ने सिर उठाना शुरू किया और नबी अलैहिस्सलाम के क़त्ल की साज़िश करने लगे तो आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने उनपर चढ़ाई की। क़ई दिनों की घेराबंदी के बाद वह लोग वहां से निकलने पर मजबूरन तैयार हुए चुनाँचे उन्हें निष्काषित कर दिया गया। यह पहली जिलावतनी थी वह ख़ैबर की तरफ़ गए। बाद में उमर रज़ियल्लाहु अन्हु के दौर में उन्हें शाम (सीरिया) की तरफ़ निकाल दिया गया। (2 से 3)


(ii) माले फ़ै

जंग में लड़ाई के दौरान दुश्मन का जो माल हाथ लगे उसे माले ग़नीमत, और जो बेग़ैर जंग लड़े हाथ आ जाये उसे "माले फ़ै" कहते हैं। माले फ़ै पर केवल अल्लाह, रसूल, रसूल के क़रीबी, यतीम, मिस्कीन, और मुसाफ़िर का हक़ है। (6, 7)


(iii) रसूल के हुक्म के विषय में

जो कुछ रसूल तुम को दें उसे ले लो और जिस से रोक दें उस से रुक जाओ। (7)


(iv) मुहाजिर और अंसार की तारीफ़

मुहाजिर जिन्होंने अल्लाह की रज़ा और उसकी ख़ुशी के लिए घर बार छोड़ा और अंसार ने तंगदस्त होने के बावजूद मुहाजिरीन को अपने पर तरजीह दी। यह कामयाब लोग हैं। अबु तल्हा अंसारी ने अपने बीवी बच्चों को भूखा रख कर नबी अलैहिस्सलाम के एक मेहमान को खाना खिलाया उसपर यह आयत "वह खुद पर दूसरों को तरजीह देते है अगरचे तंगदस्त हैं" नाज़िल हुई क्योकि ईसार (preference) का यह अमल अल्लाह को बहुत पसंद आया। (ब हवाला सही मुस्लिम 5359 से 5361) (8, 9)


(v) शैतान इंसान के लिए एक धोखा है

शैतान इंसान को कुफ़्र के लिए उभारता है लेकिन जब इंसान कुफ़्र कर बैठता है तो वही शैतान यह कह कर अलग हो जाता है कि मैं तो अल्लाह रब्बुल आलमीन से डरता हूँ। (16)


(vi) एहतेसाब (अपना जायज़ा लेना) ज़रूरी है

इंसान को हर समय अपने आमाल का जायज़ा लेते रहना चाहिए कि उसने आने वाले कल यानी आख़िरत के लिए क्या सामान किया है। (17) 


(vii) क़ुरआन कोई मामूली किताब नहीं है 

इंसान क़ुरआन को मामूली किताब समझता है और उसके नुज़ूल के मक़सद से नावाक़िफ़ है। अल्लाह तआला तो फ़रमाता है कि क़ुरआन ऐसी अज़ीम किताब है कि अगर उसे हम किसी पहाड़ पर नाज़िल कर देते तो वह अल्लाह के डर से टुकड़े टुकड़े हो कर गिर पड़ता। (21)


(viii) अल्लाह की मुख़्तलिफ़ सिफ़ात का बयान

अल्लाह की 14 सिफ़ात यहां बयान की गई हैं-

(i) अर रहमान, 
(ii) अर रहीम, 
(iii) अल मलिक, 
(iv) अलकुद्दूस, 
(v) अस्सलाम, 
(vi) अल मोमिन 
(vii) अल मुहैमिन, 
(viii) अल अज़ीज़, 
(ix) अल जब्बार, 
(x) अल मुतकब्बिर, 
(xi) अल ख़ालिक़, 
(xii) अल बारी, 
(xiii) अल मुसव्विर, 
(xiv) अल हकीम 

(22 से 24)


आसिम अकरम (अबु अदीम) फ़लाही

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