Khulasa e Qur'an - surah 41 | surah fussilat

Khulasa e Qur'an - surah | quran tafsir

खुलासा ए क़ुरआन - सूरह (041) फ़ुससिलत 


بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ


सूरह (041) फ़ुससिलत 


(i) क़ुरआन का इंकार अल्लाह का इंकार है

कुफ़्फ़ारे मक्का अक्सर यह रट लगाए रहते थे कि यह क़ुरआन मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ख़ुद घड़ कर लाते हैं तो उन्हें जान लेना चाहिए कि यह कलाम अल्लाह की तरफ़ से नाज़िल हो रहा है, अगर किसी को यह कलाम सुन कर ग़ुस्सा आता है तो मालूम होना चाहिए यह ग़ुस्सा नबी के ख़िलाफ़ नहीं बल्कि अल्लाह के ख़िलाफ़ है अगर इस का इंकार करते हो तो अल्लाह की बात का इंकार करते हो, अगर इस से बेरूख़ी दिखाते हो तो अल्लाह के ख़िलाफ़ मुंह मोड़ते हो। (2 से 4)


(ii) नबी भी इंसान है

अल्लाह के रसूल भी तमाम इंसानों की तरह एक इंसान हैं फ़र्क़ यह है कि उनके पास अल्लाह की जानिब से वही आती है। उस वही का निचोड़ यह है कि अल्लाह एक और सिर्फ़ एक है। (06)


(iii) काएनात की तख़लीक़ के छः दिन

अल्लाह ने दो दिन में ज़मीन, दो दिन में पहाड़ जमाया और ज़मीन के अंदर तमाम चीजें और दो दिन में सात आसमान बनाया और सजाया। यह आयत 9 से 12 तक मुतशाबेहात (unspecific) में से है।


(iv) निहारिका (nebula)

फिर उस ने आकाश की ओर रुख़ किया, जबकि वह मात्र धुआँ था। (आयत 11)

"धुएं से मुराद माद्दे की वह इब्तेदाई सूरत है जिसमें वह काएनात के वजूद में आने से पहले एक बे शक्ल बिखरे हुए ग़ुबार की तरह फ़िज़ा में फैला हुआ था। इस युग के वैज्ञानिक इसी को Nebula का नाम देते हैं"


(v) इंसान के विरुद्ध गवाही

क़यामत के दिन इंसान के शरीर के अनेक भाग जैसे कान,आंख और खालेँ उसके ख़िलाफ़ गवाही देंगे, इंसान आश्चर्यचकित होकर खालों से पूछेगा तुमने हमारे ख़िलाफ़ कैसे गवाही दी तो उनका जवाब होगा हमें उसने बोलने की ताक़त दी है जिसने हर चीज़ को बोलना सिखाया है। (19 से 21) 


(vi) कुफ़्फ़ार की शरारत

जब नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम क़ुरआन मजीद की तिलावत करते तो काफ़िर लोगों को सुनने से मना करते और इतना शोर मचाते कि लोग तिलावत न सुन सकें। (26)


(vii) बेहतरीन बात

उस शख़्स से बेहतर किसकी बात हो सकती है जो लोगों को अल्लाह की तरफ़ बुलाए, नेक अमल करे और कहे कि मैं मुसलमान हूं। (33)


(viii) शैतान का वसवसा

जब शैतान वसवसा डाले (बहकाने की कोशिश करे) तो तत्काल अऊज़ुबिल्लाहि मिनस शैतानिर रजीम पढ़ना चाहिए। (36)


(ix) अल्लाह की निशानियां

रात और दिन, सूरज और चांद अल्लाह की बनाई हुई चीज़ें हैं इसलिए सूर्य, चन्द्रमा और अन्य वस्तुओं के बजाय अल्लाह की ही पूजा करनी चाहिए। वही मुर्दा पड़ी हुई ज़मीन को बारिश के ज़रिए नरम करता है। (37 से 39)


(x) ग़ैब का इल्म केवल अल्लाह के पास है

1, क़यामत का इल्म 

 2, ग़िलाफ़ों, (ख़ोल) में से फल का निकलना 

3, मां के पेट में क्या होगा? 

4, बच्चा कब और कैसे पैदा होगा? (47) 


(xi) क़ुरआन रहती दुनिया तक मुअजिज़ा (चमत्कार) है

سَنُرِيهِمْ آيَاتِنَا فِي الْآفَاقِ وَفِي أَنفُسِهِمْ حَتَّىٰ يَتَبَيَّنَ لَهُمْ أَنَّهُ الْحَقُّ ۗ أَوَلَمْ يَكْفِ بِرَبِّكَ أَنَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ شَهِيدٌ

हम शीघ्र ही अपनी क़ुदरत की निशानियाँ अतराफ़ आलम में (दुनिया में हर तरफ़) और ख़़ुद उनके अंदर भी दिखाएंगे यहाँ तक कि उन पर ज़ाहिर हो जाएगा कि यक़ीनन यही हक़ है क्या तुम्हारा परवरदिगार हर चीज़ पर क़ाबू रखने के लिए काफ़ी है। (53)


आसिम अकरम (अबु अदीम) फ़लाही

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