खुलासा ए क़ुरआन - सूरह (035) फ़ातिर
सूरह (035) फ़ातिर
(i) तौहीद के दलाएल
● ज़मीन व आसमान की तख़लीक़ (creation), फ़रिश्तों की ताख़ीक़ और उनके अक़्साम (दो दो, तीन तीन, चार चार और उस से भी ज़्यादा बाज़ुओं वाले), जिसके लिए रहमत के दरवाज़े खोल दे कोई बंद नहीं कर सकता और जिसका रोक ले कोई खोल नहीं सकता (1 से 3) ● इंसान की तख़लीक़ और ज़िन्दगी के मुख़्तलिफ़ मराहिल, (11)
● जो लोग अल्लाह के साथ किसी को शरीक करते हैं तो वह शरीक खुजूर की गुठली की झिल्ली के बराबर भी इख़्तियार नही रखते। (13)
● हक़ीक़त में अल्लाह ही आसमान और ज़मीन को थामे हुए है कि कहीं वह झूल ही न जाएं और अगर यह अपनी जगह से झूल जाएं तो फिर उसके सिवा कौन है जो उसे थाम सके। बेशक अल्लाह बड़ा बुर्दबार (और) बड़ा बख़्शने वाला है। (आयत 41)
(ii) रिसालत
नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को तसल्ली दी गयी है कि आप काफ़िरों के इंकार से घबराएं नहीं क्योंकि आप से पहले जितने रसूल आये हैं वह भी झुठलाए जा चुके हैं। इसलिए आप अपना काम जारी रखिये और रंजीदा मत हों। (4)
(iii) कभी एक जैसे नहीं हो सकते
जिस तरह मीठा और खारा पानी, अंधे और देखने वाले, अंधेरे और उजाले, धूप और छाया, ज़िन्दा और मुर्दा बराबर नहीं हो सकते ऐसे ही ईमान और कुफ़्र का बराबर होना भी कभी संभव नहीं। (12, 19 से 21)
(iv) अल्लाह की निशानियां
हवा, बारिश, मुर्दा ज़मीन को ज़िंदा करना, समुद्र में मीठे और खारे पानी को मिलाने के बावजूद अलग अलग रखना, ताज़ा गोश्त और ज़ेवर का हुसूल, रात को दिन में और दिन को रात में दाख़िल करना, सूरज और चांद को एक दायरे में कंट्रोल में रखना, वगैरह (12, 19, 21)
(v) उलेमा कौन हैं
● जो अल्लाह से डरते हैं।
● अपने नफ़्स का तज़किया करते (पाक साफ़ रखते) हैं।
● अल्लाह की किताब की तिलावत (क़ुरआन को पढ़ते, समझते, उसे लोगों में फैलाते और उसी के अनुसार फ़ैसला) करते हैं।
● नमाज़ क़ायम करते हैं।
● अल्लाह ने जो कुछ दिया है उसमें से अल्लाह के रास्ते में खुले और छुपे तौर पर ख़र्च करते हैं। (18, 28, 29)
आसिम अकरम (अबु अदीम) फ़लाही
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