Khulasa e Qur'an - surah 15 | surah hijr

 Khulasa e Qur'an - surah | quran tafsir

खुलासा ए क़ुरआन - सूरह (015) अल हिज्र


بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ


सूरह (015) अल हिज्र


(i) कुफ़्फ़ार की ख़्वाहिश

आख़िरत में जब कुफ़्फ़ार मुसलमानों को मज़े व ऐश में और ख़ुद को अज़ाब में देखेंगे तो यह ख़्वाहिश करेंगे कि काश वह भी दुनिया में मुसलमान हो गए होते। (2)


(ii) क़ुरआन की हिफ़ाज़त

अल्लाह तआला ने क़यामत तक के लिए क़ुरआन की हिफ़ाज़त की ज़िम्मेदारी ली है।

إِنَّا نَحۡنُ نَزَّلۡنَا ٱلذِّكۡرَوَإِنَّا لَهُۥ لَحَٰفِظُونَ 

"हमने ही क़ुरआन को नाज़िल किया है और हम ही इसकी हिफ़ाज़त करने वाले हैं" (आयत 09)


(iii) इंसान और जिन्नात की तख़लीक़

وَلَقَدۡ خَلَقۡنَا ٱلۡإِنسَٰنَ مِن صَلۡصَٰلٖ مِّنۡ حَمَإٖ مَّسۡنُونٖ وَٱلۡجَآنَّ خَلَقۡنَٰهُ مِن قَبۡلُ مِن نَّارِ ٱلسَّمُومِ

अल्लाह तआला ने इंसान को खनखनाती हुई मिट्टी से और जिन्नात को भड़कती हुई आग से पैदा किया। फ़रिश्तों ने आदम को सज्दा किया। शैतान सज्दा न करने की वजह से मरदूद हो (धुत्कार दिया) गया। उसने क़यामत तक की ज़िंदगी की मुहलत मांगी और इंसानों को गुमराह करने की क़सम खाली। (26, 39)


(iv) तीन वाक़िआत 

(1) इब्राहीम अलैहिस्सलाम को फ़रिश्तों ने आकर बेटे (इस्हाक़) की ख़ुशख़बरी सुनाई। उस वक़्त उनकी पत्नी बहुत बूढ़ी थीं, वास्तव में यह pregnancy की उम्र न थी इसलिए आप को बेटे की ख़ुशख़बरी सुन कर ख़ुशी भी हुई और तअज्जुब भी और उनसे भी ज़्यादा तअज्जुब तो उनकी बीवी (सारा) को हुआ उनका तज़किरा सूरह 51 अज़ ज़ारियात आयत 29 में आया है

فَأَقۡبَلَتِ ٱمۡرَأَتُهُۥ فِي صَرَّةٖ فَصَكَّتۡ وَجۡهَهَاوَقَالَتۡ عَجُوزٌ عَقِيمٞ 

तो (यह सुनते ही) इब्राहीम की बीवी (सारा) चिल्लाती हुई उनके सामने आयी और अपना मुँह पीट लिया। कहने लगीं (ऐ है) एक तो (मैं) बुढ़िया (उस पर) बांझ। फ़रिश्तों ने कहा हम आप को सच्ची ख़ुशख़बरी सुना रहे हैं। आप मायूस न हों तो इब्राहीम ने कहा 

وَمَن يَقۡنَطُ مِن رَّحۡمَةِ رَبِّهِۦٓ إِلَّا ٱلضَّآلُّونَ 

मायूस होना तो बस गुमराहों का काम हैं (51 से 56) 

(2) फ़रिश्ते इब्राहीम अलैहिस्सलाम को ख़ुशख़बरी सुना कर लूत अलैहिस्सलाम के पास पहुंचे और उनसे दरख़ास्त की कि रातों रात अपने घर वालों (बीवी को छोड़ कर) और तमाम अहले ईमान को साथ लेकर इस बस्ती से निकल जाएं क्योंकि आपकी बस्ती के लोग सरकशी में हद से आगे बढ़ गए हैं इसलिए अल्लाह तआला ने उनके नापाक वजूद से ज़मीन को पाक करने का फ़ैसला कर लिया है, सुबह होते होते उनकी जड़ काट दी जाएगी। क़ौमे लूत का एक भयानक जुर्म यह था कि वह औरतों को छोड़ कर मर्दो से अपनी ख़ाहिशात पूरी करते थे यानी Homosexual समलैंगिक जैसी गंदगी के शिकार थे इसलिए जब अल्लाह तआला ने फ़रिश्तों को ख़ूबसूरत और हसीन नौजवानों की शक्ल में भेजा तो वह उनके साथ ज़्यादती करने की कोशिश करने लगे। लूत अलैहिस्सलाम डरे लेकिन फ़रिश्तों ने उनसे कहा, यह हम तक पहुंच ही नहीं सकेंगे। उसके बाद फ़रिश्ते चले गए और लूत अलैहिस्सलाम अहले ईमान के साथ बस्ती से निकल गए। और काफ़िरों पर नामनेट पत्थर बरसाए गए और इस क़ौम को अल्लाह ने लोगों के लिए निशाने इबरत बना दिया। मृत सागर (dead sea) वही है जिसमें आज भी कोई जीव जंतु नहीं पाए जाते। (57 से 75)

(3) इस सूरह का नाम अल हिज्र है। हिज्र वालों से मुराद क़ौमे समूद ही हैं। यह लोग ज़ुल्म व ज़्यादती के रास्ते पर चल पड़े थे और बार बार समझाने के बावजूद बुत परस्ती को छोड़ने के लिए किसी क़ीमत पर तैयार न थे, उन्हें मुख़्तलिफ़ मोअजिज़ात दिखाए गए। ख़ास तौर से चट्टान से ऊंटनी के जन्म लेने का वाक़िआ में ही क़ई मोअजिज़े शामिल थे। ऊंटनी का चट्टान से निकलना, निकलते ही गर्भवती (pregnant) होना, उसके आकार की असाधारण वृद्धि, बहुत ज़्यादा दूध देने वाली होना। लेकिन उनकी क़ौम बड़ी बदबख़्त निकली। मोअजिज़े की क़द्र करने के बजाय उल्टे ऊंटनी की दुश्मन हो गई। सालेह अलैहिस्सलाम के समझाने और मना करने के बावजूद एक दिन मौक़ा मिलते ही ऊंटनी को मार डाला। फिर क्या था यह भी अज़ाब की लपेट में आ गए। (80 से 84)


(v) मक्का के मुशरिकीन और नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम

आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को तसल्ली दी गई है कि आप मुशरेकीन की बातों से परेशान न हों बल्कि अपने रब की हम्द व तस्बीह बयान करते रहें, सज्दा करने वालों में शामिल हो जाएं और ज़िंदगी की आख़िरी सांस तक अपने रब की इबादत करते रहें। (94 से 99)


आसिम अकरम (अबु अदीम) फ़लाही

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