Khulasa e Qur'an - surah 10 | surah younus

Khulasa e Qur'an - surah | quran tafsir


खुलासा ए क़ुरआन - सूरह (001) यूनुस


بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ


सूरह (010) यूनुस 


(i) तौहीद 

राज़िक़, मालिक, हाकिम, ख़ालिक़ और हर क़िस्म की तदबीर करने वाला अल्लाह ही है। यही वजह है कि जब इंसान पर कोई बला आती है तो वह अपने तमाम बनाये हुए देवी देवताओं को छोड़ कर लेटे, बैठे और खड़े होकर अल्लाह को ही पुकारता है। (2 से 12)


(ii) रिसालत

इस हवाले से नूह, मूसा, हारून और यूनुस अलैहिमुस्सलाम के वाक़िआत बयान हुए हैं। क़ौमे यूनुस एकलौती ऐसी क़ौम थी जिस पर अज़ाब आकर टल गया था। (90)


(iii) क़यामत

उस दिन तमाम इंसानों को जमा किया जायेगा, कुफ़्फ़ार भले ही इसका यक़ीन न करें। और किसी पर ज़र्रा बराबर भी ज़ुल्म न होगा बल्कि सबको न्याय मिलेगा।


(iv) क़ुरआन की अज़मत और तख़लीक़ ए कायनात (universe)

सूरज, चांद, उनकी सीमाएं, साल और महीनों का हिसाब, रात और दिन का उलटफेर, आसमान और ज़मीन और उनसे रिज़्क़ का हासिल होना, जल और थल, सुनने और देखने की सलाहियत अता करना, मौत और ज़िंदगी, रात को सुकून और दिन को रौशन बनाना आदि। (5, 31)


(v) अंबिया की दावत में तीन ख़ास बातें

◆ शिर्क से बचने की नसीहत, 
◆ मैं तुमसे दावत का कोई बदला नहीं माँगता मेरा अज्र तो अल्लाह के ज़िम्मे है, 
◆ मुझे मुसलमान रहने का हुक्म दिया गया है। 

(72)


(vi) काफ़िरों के इंकार के मुख़्तलिफ़ पहलू

(1) आख़िरत का इंकार, (2) उन्होंने अल्लाह को छोड़ कर इसलिए देवी देवता बना रखा है कि वह अल्लाह के सिफ़ारिशी हैं। (3) नबूवत का इंकार। (4) क़ुरआन नबी ख़ुद घड़ लाए हैं। (5) यह दीन बाप दादा के दीन के ख़िलाफ़ है। 


(vii) काफ़िरों को क़ायल करने के लिए मुख़्तलिफ़ दलाएल 

◆ निशानियां याद दिला कर 
 ◆ चैलेंज के ज़रिए 
◆ आख़िरत के अंजाम की सूचना के ज़रिए, 
◆ बलाओं और मुसीबत के वक़्त देवी देवता क्यों नहीं याद आते?


(viii) अंबिया के वाक़िआत

(1) नूह अलैहिस्सलाम का वाक़िआ

नूह अलैहिस्सलाम ने अपनी क़ौम को अपने रब की तरफ़ बुलाया, लेकिन केवल कुछ लोगों को छोड़ कर किसी ने उन की बात नही मानी। अल्लाह तआला ने मानने वालों को कश्ती में सवार करके बचा लिया और बाक़ी सभी नाफ़रमान लोगों को डुबो दिया। उन नाफ़रमानों में नूह अलैहिस्सलाम का एक बेटा भी था। (71 से 73)

(2) मूसा व हारून अलैहिमुस्सलाम का वाक़िआ

अल्लाह ने मूसा व हारून अलैहिमुस्सलाम को फ़िरऔन की तरफ़ भेजा कि वह उसे अल्लाह के रास्ते की तरफ़ बुलाएं लेकिन फ़िरऔन और उसके दरबारियो ने बात न मानी बल्कि फ़िरऔन ने उल्टा ख़ुदाई का दावा कर दिया, मूसा अलैहिस्सलाम को जादूगर बताया और उनके मुक़ाबले में मुल्क के जादूगरों को बुला लिया। जादूगर मूसा अलैहिस्सलाम पर ईमान लाए। फ़िरऔन जब इंकार पर डटा रहा तो अल्लाह ने उसे समुद्र में डुबो दिया फिर अल्लाह ने मूसा और हारून अलैहिमस्सलाम को हुक्म दिया कि अपनी क़ौम के लिए घर और मस्जिद बनाएं और मस्जिदों में सब नमाज़ अदा करें। (75 से 92)


(3) यूनुस अलैहिस्सलाम का वाक़िआ 

इस सूरह का नाम उनके नाम पर "सूरह यूनुस" रखा गया है। यूनुस अलैहिस्सलाम का नाम कुरआन में चार बार सूरह (अन निसा, अल अनआम, यूनुस और अस साफ्फ़ात) में आया है, और दो जगहों पर जुन नून ذو النون अल अंबिया में और साहेबुल हूत صاحب الحوت (यानी मछली वाले) सूरह अल क़लम में आया है।

यूनुस अलैहिस्सलाम के वाक़िए के दो पहलू हैं।

1, मछली के पेट मे जाना इसका तफ़सीली बयान सूरह 37 अस साफ्फ़ात में है।
2, उनकी ग़ैर मौजूदगी में क़ौम का इस्तेग़फ़ार करना इस सूरह में इसकी तरफ़ इशारा है।

दरअस्ल यूनुस अलैहिस्सलाम अपनी क़ौम के ईमान न लाने के कारण निराश हो कर और अल्लाह के अज़ाब को यक़ीनी (सुनिश्चित) देख कर "नैनवा" की ज़मीन छोड़कर चले गए। आगे जाने के लिए जब वह कश्ती में सवार हुए तो समुद्र में तूफ़ान आगया और कश्ती डूबने लगी। तो लोगों में चर्चा होने लगी कि ज़रूर कोई गुनहगार आदमी है, यूनुस अलैहिस्सलाम को उसी वक़्त अपनी ग़लती का एहसास हुआ और उन्होंने समुद्र में छलांग लगा दी ताकि कश्ती के और मुसाफ़िर महफूज़ रहें। जैसे ही उन्होंने छलांग लगाई एक बड़ी मछली ने निगल लिया। अल्लाह ने उन्हें मछली के पेट मे भी सही सालिम रखा। मछली के पेट में ही उन्होंने दुआ की जिसका ज़िक्र सूरह अल अंबिया में है।

 لَّا إِلَـٰهَ إِلَّا أَنتَ سُبْحَانَكَ إِنِّي كُنتُ مِنَ الظَّالِمِينَ

"तेरे इलावा कोई माबूद नहीं, पाक है तेरी ज़ात बेशक मैं ही ज़ालिम था" (सूरह 21 अल अंबिया 87)

अल्लाह ने उनकी दुआ क़ुबूल कर ली और कुछ दिन बाद मछली ने उन्हें साहिल पर उगल दिया। उधर यह हुआ कि यूनुस अलैहिस्सलाम की क़ौम के मर्द, औरतें, बच्चे और बूढ़े सभी सहरा (रेगिस्तान) में निकल गए और रोना धोना और इस्तेग़फ़ार करना शुरू कर दिया और सच्चे दिल से ईमान लाए जिसकी वजह से अल्लाह का अज़ाब उन से टल गया। (98)


आसिम अकरम (अबु अदीम) फ़लाही

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