क़यामत की निशानियां सीरीज-2
क़यामत के क़ायम होने पर कुछ अक़ली दलाईल:
(01) बहुत से हवास परस्त और अक़्ल परस्त लोगो ने हयात बाद उल मात (मौत के बाद ज़िन्दगी ) क़यामत आख़िरत हिसाब व जज़ा वगेरा से इसलिए इंकार कर दिया है के यें उनके ज़राये उलूम यानी महसूस व मुशाहिदात और अक़्ल व ख़्यालात से दूर है हालांकि हवास परस्त और अक्ल परस्त बहुत सी ऐसी चीज़ो को तस्लीम भी कर लेते हैं जो उनके हवास और अक्ल से दूर होती है मसलन रूह,अख़लाक़यात वगेरा तो फिर इन चीज़ो का इंकार क्योंकर किया जाए??
क़यामत के मुंकिर की सज़ा:
अल्लाह तआला फ़रमाता है:
"नहीं, बल्कि बात यह है कि वे लोग क़ियामत की घड़ी को झुठला चुके हैं। और जो उस घड़ी को झुठला दे, उस के लिए दहकती आग तैयार कर रखी है।"
[सूरह फुरक़ान 11]
"(उस वक़्त हम कहेंगे कि) आज तुममें से कोई न किसी को फ़ायदा पहुँचा सकता है, न नुक़सान और ज़ालिमों से हम कह देंगे कि अब चखो इस जहन्नम के अज़ाब का मज़ा जिसे तुम झुठलाया करते थे।"
[सूरह सबा 42]
"और अगर आप तअज्जुब करो तो तअज्जुब के क़ाबिल उनकी यह बात है कि जब हम मिट्टी हो जाएंगे तो क्या हम नए सिरे से पैदा किए जाएंगे, ये वह लोग हैं जिन्होंने अपने रब का इनकार किया और ये वे लोग हैं जिनकी गर्दनों में तौक़ पड़े हुए हैं, वे आग वाले लोग हैं, वे उसमें हमेशा रहेंगे।"
[सूरह राद 05]
"और जिन्होंने कुफ़्र किया है और हमारी आयतों को और आख़िरत की मुलाक़ात को झुटलाया है वो अज़ाब में हाज़िर रखे जाएँगे।"
[सूरह रूम 16]
क़यामत के अलग अलग नाम:
(01) यवमल क़ियामा:
"क़यामत के दिन अल्लाह उनके इस इख़्तिलाफ का फैसला उनके बीच कर देगा।" [सूरह बक़रा 113]
(02) यौमे दीन:
"वह जज़ा (बदले ) के दिन का मालिक है।" [सूरह फातिहा 03]
(03) यवमल बउस:
"यह है उठने का दिन।" [सूरह रूम 56]
(04) यवमल हिसाब:
"यह है जिसका वादा तुमसे हिसाब के दिन के लिए किया जाता था।" [सूरह स्वाद 53]
(05) यावमूल वईद:
"और सूर फूंकने दिया जाएगा वादा अज़ाब दिन यही है।" [सूरह क़ाफ 02]
(06) यवमूल हश्र:
"और उन्हें अफसोस करने वाले दिन से डराओ।" [सूरह मरयम 39]
(07) यवमुल जमाअ:
"जमा वाले दिन से डरांए जिसमें कोई शक नहीं।" [सूरह शूरा 07]
(08) यवमुल तनाद:
"मुझे तुम पर हाँक पुकारने के दिन का भी डर है।" [सूरह ग़ाफ़िर 36]
(09) यवमुल खुरूज:
"जिस दिन चिंघाड़ सुनेंगे हक के साथ यह दिन कब्र से बाहर आने का है।" [सूरह क़ाफ 42]
(10) यवमूल हश्र:
"जिस दिन हम सबको इकट्ठा करेगा।" [सूरह अल अनाम 22]
(11) यवमुल फस्ल:
"यही फैसले का दिन है जिसे तुम झुठला रहे थे।" [सूरह साफ़्फ़ात 21]
(12) अद दारुल आखिर:
"अलबत्ता सच्ची जिंदगी तो आखिरत का घर है।" [सूरह अनकबूत 63]
(13) दारुल क़रार:
"यक़ीन मानो के हमेशगी का घर तो आख़िरत ही है।" [सूरह ग़ाफ़िर 64]
(14) अज़ ज़ाखित:
"और जब कान बहरे कर देने वाली (कयामत) आएगी।" [सूरह अबस 33]
और इसके अलावा बहुत से नाम आये है यें मुख़्तसर आपके सामने पेश किये हैं।
क़यामत की हक़ीक़त:
इसतलाह शराअ में कयामत से मुराद ऐसा वक्त है जब कायनात का मौजूदा निज़ाम दिरहम बिरहम और तबाह बर्बाद हो जाएगा और फिर तीसरा सूर फूंका जाएगा पिछले अगले सारे के सारे लोग जिंदा कर के मैदान ए मेहशर में खड़े हो जाएंगे अलावा अज़ी क़ियामत को तीन मक़ामात पर इस्तेमाल किया गया है-
(01) किसी भी इंसान की मौत के लिए क्योंकि जो इंसान मर जाएगा उसकी कयामत तो कायम होगी और वह अपने आलिम बातिन में छिप गया है।
(02) सहाबा किराम के दुनिया से रुखसत हो जाने के बाद कयामत का इतलाक़ किया गया है जैसा कि हजरत अनस रजि अल्लाह ताला अनहु से रिवायत है:
अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहू अलेही वसल्लम से पूछा गया कयामत कब आएगी?
नबी सल्लल्लाहो अलेही वसल्लम के पास एक बच्चा बैठा था नबी अलैहिस्सलाम ने फरमाया, "अगर यह बच्चा जिंदा रहा तो इसके बुढ़ापे से पहले तुम्हारी क़यामत कायम हो जाएगी।"
[मुसनद अहमद 03/288]
(03) आखिरी बड़ी कयामत जब दुनिया हर्ज़ी रूह का खात्मा हो जाएगा सूरज चांद सितारे बिखर जाएंगे पहाड़ रुई की तरह उड़ जाएगा समुंदर को आग लगा दी जाएगी जमीन खींच दी जाएगी कुरान मजीद में क़यामत क़यामत इसी माना में इस्तेमाल हुआ है।
जुड़े रहें इस अहम टॉपिक से जुड़ी वजाहत अगली पोस्ट में नश्र करेंगे। (इंशाअल्लाह)
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