Qur'an and modern science

 
quran and mordern science in hindi

कुरान और आधुनिक विज्ञान

قرآن اور جدید سائنس


कुरआन वास्तव में एक आसमानी और एक पैगम्बर की ओर अवतरित ग्रंथ है। इस्लाम में आधुनिक वैज्ञानिक ज्ञान और ईश्वर पर आस्था रखने में कोई विवाद नहीं है।  कुरान पाक "14 सौ साल” पहले से ही वैज्ञानिक तथ्यों को अपने अंदर समाए हुए है। इन सभी तथ्यों को वैज्ञानिकों ने अनुसंधान (research) के बाद माना भी है कि जिस वैज्ञानिक तथ्यों को मानव आज खोज रहा है यह सभी तथ्य कुरान में 14 सौ साल पहले से ही उपस्थित है कुरान की अपनी अभिरुचि (interest) यह नहीं कि उसे विज्ञान की एक पुस्तक समझा जाए बल्कि यह एक उत्तम और अतुल्य (incredible) धार्मिक पुस्तक है। कुरान यदि मनुष्य को गोचर प्रकृति पर विचार (transitory nature) करने का आमंत्रण देता है तो इससे उसका उद्देश्य केवल ईश्वर को सर्व शक्तिमान मान होने पर ज़ोर डालना। कुरआन का संबंध वैज्ञानिक ज्ञान के आंकड़ों से  है - यह तथ्य वास्तव में एक और ईश्वरीय उपहार है। 

आधुनिक युग से पूर्व का कोई भी मानव रचित्त ग्रंथ ऐसा नहीं है जो ज्ञान विज्ञान में अपने समय की जानकारी से आगे हो कि उसकी तुलना क़ुरआन से की जा सकती हो। धर्म और विज्ञान इस्लाम में जुड़वा बहनों के सामान है और आज जब विज्ञान ने इतनी तरक्की कर ली है फिर भी दोनो का संबंध बराबर कायम है कि आज वैज्ञानिक जानकारी से ईश्वर की सत्य को समझने में अधिक सहायता मिलती है कि केवल इस्लाम धर्म ही सच्चा धर्म है और कुरआन सच्चा और पवित्र ग्रंथ।


सृष्टि की उत्पत्ति

सृष्टि की उत्पत्ति के संबंध में कुरान के आयतों का अवलोकन:

कुरान के अनुसार:– कुरान की सुर: अल–आराफ (7:54) की एक आयत के अनुसार यह कथन का पता चलता है जो निम्न है–

“तुम्हारा प्रभु अल्लाह है जिसने धरती और आकाशो को छ: दिनों में बनाया।”


सुर: ताहा (20:4) की आयत के अनुसार 

“अवतरण है उसकी ओर से,जिसने पैदा किया धरती और ऊंचे अकाशों को।” 


निश्चित ही कुरान के वर्णन से ऐसा आभास होता है की धरती और आकाश का विकास साथ–साथ हुआ है।

कुरान की सुर:अल फुरकान (25:59) में आकाश और धरती के बीच को अन्य सृष्टि के बारे में कहा गया है। 

जिसने अकाशों और धरती को और जो कुछ उसके बीच में है,छ: दिनों में उत्पन्न किया।


विज्ञान के अनुसार:– यह सब बातें आधुनिक धारणाओं से पूर्ण मेल रखती है सुरह अंबिया में अल्लाह रब्बुल यह प्रकट कर दिया है कि हमने पहले धरती और आकाशों को मिला रखा था जबकि विज्ञान भी इसी बात को अपने अर्थों में यह कहा की पहले सृष्टि आग का गोला थी


खगोल–विज्ञान प्रकाश और गति:– 

जब हम कुरान में वर्णित  खगोल विज्ञान अध्यन करते है हमें पता चलता है की सूर्य और चंद्रमा अपने–अपने मंडल में तैर रहे हैं।

 कुरआन की एक आयत के अनुसार, 

“और वही है जिसने रात और दिन बनाए और सूर्य और चंद्रमा सब तैर रहे है, प्रत्येक एक–एक मंडल में है।

 (21:33)


सूर: अर रहमान (55:33) के अनुसार,

“हे मनुष्य और जिन्न गिरोह के यदि तुममें समाए हो की यदि आकाश और धरती की सीमाओं से बाहर निकल जाओ तो निकलो। तुम बिना शक्ति के नही निकल सकते और यह शक्ति सर्व शक्तिमान ईश्वर से मिलता है।


और इस पूरी सुरह का विषय ही मनुष्य को यह निमंत्रण देना है की मनुष्य के प्रति ईश्वर की जो दयालुता है वह उसे पहचाने और स्वीकार करे।

विज्ञान के अनुसार:– आधुनिक खगोल विज्ञान शास्त्रियों ने आज के युग में यह सिद्ध कर दिया की सभी ग्रह एक निश्चित कदा में चक्कर लगाते है इस बात को कुरान में “14 सौ साल” पहले बता दिया गया था।


पृथ्वी:– 

कुरान की सुरह अज –जुमर (39:21) के अनुसार,

“क्या तुमने नहीं देखा की ईश्वर ने आकाश से पानी बरसाया फिर धरती में उसकी धाराएं चलाई? फिर उसके द्वारा विभिन्न रंग की खेती निकालता है।”


कुरान की सुरा अन–नबा (78:6–7) के अनुसार,

“क्या हमने पृथ्वी  बिछौना और पर्वतों को मेख नही बनाया।”


मेख तंबू को मजबूती से बांधने के लिए जमीन में गाड़े जाते है जिस भूमिय अर्थ परत की गहरी नीव से लिखा जा सकता है इस कथन और आधुनिक ज्ञान में कोई टकराव नहीं है।


विज्ञान:–आज यह सच्चाई हमारे सामने है की आकाश से पानी बरसता है और फिर यही पानी जब धरती पर आता है तो वह फिर धारा बन कर बहता है।


फल–पेड़–पौधे:– 

कुरान की एक सुरा–अर रअद के अनुसार “और हर प्रकार के पैदावार (फलों) की दो–दो किस्में (नर–मादा) बनाया। वही सत को दिन से छिपाता है निसंदेह इसमें उन लोगो के लिए बड़ी निशानियां है जो इसमें सोच विचार करते है।

विज्ञान:–  इस सुरा:में वैज्ञानिकों लिए एक बड़ी निशानियां है की यह सोच विचार करते हुए नए–नए वस्तुओं का अविष्कार करते रहे और आज इस युग में यह बात बिल्कुल सच हो गई है प्राणी जगत में सन्तापस्थिति के विचार मानव–संतानोंत्पत्ति से जुड़े थे अब हम इनका अध्यन करते है।


मानव–सृजन:– 

कुरान के अनुसार मानव सृजन के विषय में कुरान के वाक्तव भ्रूण–विज्ञान के विशेषज्ञों के चुनौती है। जो आगे समझने में लगे हुए है कुरान के द्वारा ही मुझे समझमें आया की बच्चे कैसे पैदा होते है दुनिया की अनेक किताबे इस संबंध में कुरान से पीछे रह गई है। अत: हम कुरान की आयतों के माध्यम से वीर्य की ज़टीलताओ से संबंधित सटीक विचारो पर ध्यान दे और इस बातों पर की इसकी अत्यंत अल्पमागा गर्भधान के लिए जरूरी है स्त्री के जननाग में अंडो के रोपड़ की गई आयतों में अलग–अलग शब्दो से व्यक्त किया गया है।

“ईश्वर ने मनुष्य को उस चीज से बनाया जो चिपक जाती है (96:2) भ्रूण मां के गर्भास्य में बढ़ने के बारे में संक्षिप्त रूप में प्रकाश डाला गया है यह बात हमे सुरा–मोमिनून (23:14) में मिलती है। फिर हमने उस बूंद (वीर्य) को चिपकने वाली चीज का रूप दिया फिर उस चिपकने वाली चीज के मांस के लोथड़े का रूप दिया तथा हमने मांस को हड्डियों में बदला फिर उन हड्डियों पर मांस बदला फिर उसे एक दूसरा ही सृजन रूप देकर खड़ा किया तो बहुत बरकत वाला है अल्लाह सबसे उत्तम सृष्टि कर्ता है ।

विज्ञान की दृष्टि:– मांस की लुगदी की परिभाषा भ्रूण के विकास के विशेष चरण के प्रकटन के यथातथ्य अनुरूप है। यह ज्ञात है की इस पुंज के भीतरी हिस्से में हड्डियां उभरती है और फिर उनपर  मांस पेशियां चढ़ती है यही मांस पिंड या लोथड़े (लहम) का अर्थ होता है। भ्रूण एक ऐसे से गुजरता है जिसमें कुछ भाग तो समानुपात में होते है कुछ समानुपात में नहीं होते। इसी के बाद में वैथातिक अविभर्व होता है। शायद सुरा अल हज्ज़ (22.5) की आयत का यही अर्थ है, वह अर्थ यह है-

"तो हमने तुम्हें मिट्टी से पैदा किया, फिर वीर्य से, फिर चिपकने वाली चीज, फिर मांस के लोथड़े से, जो समानुपात में होता है और समानुपात में नही भी होता है"।

इससे यह स्पष्ट होता है की कुरान और विज्ञान समानुपाती है। फिर हमें कुरान में ज्ञानेंद्रियों और अंदरूनी अंगो के प्रसंग में सुरह अस सज्दा (32:9) में यह उल्लेख मिलता है। “उसने (ईश्वर ने) तुम्हारे लिए देखने सुनने के और अंदर के अंगो को बनाया”। इसमें ऐसा नहीं है जो आधुनिक तथ्यों के विरुद्ध हो यही नहीं बल्कि कुरान में कही कोई भ्रान्ति नही पाई जाती।

उपसंहार:– 

जब मानव जाति अंधकारमय युग की गहराई में पड़ी हुई थी तब ईश्वर ने अपने अंतिम संदेशवाहक, पैगंबर हजरत मुहम्मद को मानवता के उद्धार के लिए भेजा जो ईश्वरीय संदेश पैगंबर मुहम्मद (ﷺ) पर अवतारित हुआ वह मनुष्य जाति के लिए बड़ी अंतिम एवं स्थाई मार्ग दर्शन है। 

हम यह कैसे जाने की कोई प्रकाशन या संदेश उधारण कुरान ईश्वरीय वाणी है सत्य के माय–दंड को हर व्यक्ति आसानी से समझ सकता है जैसे की उपयुक्त कथनों को दर्शन गया है और अल्लाह ने अपने पवित्र ग्रंथ में यह सब बातें "चौदह सौ साल” पहले ही अपने संदेश वाहक मुहम्मद (ﷺ) के द्वारा बता दी थी जो वैज्ञानिकों ने हमारे सामने आज प्रस्तुत किया है। 

आज के युग में मानव अंतरिक्ष पर जा कर खुद को बहुत बुद्धिमान मानता है। जबकि अल्लाह इस बात की पुष्टि अपने पवित्र पुस्तक कुरान की सुरह अर–रहमान के आयत (55:33) में किया है अल्लाह ने जो कुरान में नहीं कही वह बात अपने संदेश वाहक आप (ﷺ) के द्वारा कहलवाया वह यह बात है आप (ﷺ) ने समय–समय पर कुछ भविष्यवाणी की जो की निम्न है– 

आप (ﷺ) ने फरमाया एक समय आएगा जब तेजाब की बारिश होगी और एक बार फरमाया की लोग कुरान की आयत लिख कर स्वयं मिटा देंगे और बार यह भी फरमाया की एक समय वह आयेगा जब हर समय घर में नाच गाने में होंगे। यह बात इस कथन की पुष्टि करता की आज के युग में विज्ञाने द्वारा वैज्ञानिकों ने दुनिया को उन्नत किया की आप (ﷺ) के फरमाई हुए सारे कथनों पुष्टि है। 

 वह कुछ इस तरह है की आज के युग में इतना ईधन का प्रयोग होता की सारा वातावरण दूषित होता है और नदियों तालाबों समुंद्रो का भी इस प्रदूषण से बच सका जिसके कारण एसिड वर्षा होना सिद्ध होगा और जो लोग कुरान को मिटाएंगे वह इस तरह की आज मोबाइल जोन के द्वारा लोग एक दूसरे को कुरान व हदीस लिख कर भेजते है और दूसरा उसे डिलीट कर देता है इसी तरह यह भी सिद्ध हो गया और आपने फरमाया की लोग के घर में नाच गाने होंगे तो यह सभी जानते है की हर घर में शैतान का भाई टी०वी है यह विज्ञान की देन हैं। 

अल्लाह ताला ने यह फरमाया था की मानव से पानी बना है तो लोगो को मानने में कुछ अजीब लगा जबकि आज विज्ञान यह बात बिल्कुल साफ–साफ व्यक्त करती है।  हमने 2006 ई० में एक प्रोफेसर ने यह बात सुनी थी की वैज्ञानिकों ने कुरान की 220 आयतों पर विचार किया गया है यह बात इस कथन की पुष्टि करती है की विज्ञान का जन्म दाता कुरान है।  आज दुनिया कुरान के द्वारा ही इतना उन्नत विकास शील हुई है। 

 मेरा विचार यह की यदि कुरआन न होता तो शायद दुनिया इतनी उन्नति नहीं करती और अगर इसका सही तरह लाभ उठाया जाए तो दुनिया की सारी समस्या दूर हो जाए बहुत से वैज्ञानिकों ने कुरआन पढ़ कर इस्लाम को सच्चा धर्म स्वीकार किया। जैसे एक स्कूल बिना प्रधानाचार्य के नहीं चलता तो इतनी बड़ी दुनिया कैसे बिना प्रधानाचार्य के चल सकती इस बात को बड़े–बड़े  वैज्ञानिकों ने स्वीकार किया और इस्लाम के प्रकाश में जीवन व्यतीत कर रहे है।

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