Rasool Allah (saw) ka 9 saal ki ladki se nikah

Rasool Allah (saw) ka 6 saal ki ladki se nikah


नबी करीम ﷺ ने 9 साल की लड़की से निकाह क्यों किया?

इस्लाम पर किए जाने वालें ऐतराज़ में से ये सबसे उपर (top of the list) है। इस बिना पर हम ने ऐतराज़ करने वालों को हद से गुज़रते हुए देखा है। मौजूदा वक्त पर अगर नज़र डालें तो हाल ये है कि लाइव टीवी डिबेट्स में इस तरह से पेश किया गया है जैसे कोई (नाउज़बिल्लाह) बहुत ही सख़्त गुनाह किया हो। और अब ऐसा लगता है लोग इस पर ऐतराज़ करना अपना हक़ समझने लगें हों। तो हम इंशा अल्लाह आप सब के ऐतराज़ को इकरार में बदलने की कोशिश करते हैं।

नबी करीम ﷺ ने एक कम उम्र की लडकी से निकाह क्यों किया? 

कभी कभी उठाए गए सवाल ही और बहुत से सवाल पैदा कर देते हैं।


जैसे:

  • 1. शौहर बीवी के दरमियान कितनी उम्र का फासला होना चाहिए?
  • 2. लड़की की शादी की उम्र क्या होनी चाहिए?
  • 3. क्या जिस लड़की की जिस किसी से शादी हो रही है क्या वो लड़की या औरत उस के लिए राज़ी है?
  • 4. क्या लड़की का वली (male relatives) राज़ी है?

पैदा हुए सवालों में से हर सवाल का जवाब एक मयार (standard) के मुताबिक़ हल होगा। तो अब बताएं आपका क्या मयार है? क्या जो मयार आप है वही पूरी दुनिया का है?

हमारा मयार तो इस्लाम है और नबी करीम ﷺ इस्लाम के इस शरीयत के पैग़म्बर (messenger) और रहनुमा (ideal) हैं। और ऐसा कैसे हो सकता है? वो ख़ुद ही उन बातों पर अमल नहीं करते जो उन्हें आने वाली नस्लों में परवान चढ़ाना था। या ऐसा कैसे हो सकता है? ख़ालिक़ ए कायनात ने उन्हें औरत से निकाह की सही उम्र ना बताई हो। अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त के बताए हुआ क़ानून सबसे पहले नबी करीम ﷺ के लिए होते थें। और नबी करीम ﷺ उन क़वानीन पर अमल करके उम्मत के लिए अमली नमूना पेश किया।


इस्लाम के मयार मुताबिक़ निकाह की उम्र:

وَ ابۡتَلُوا الۡیَتٰمٰی حَتّٰۤی اِذَا بَلَغُوا النِّکَاحَ
"और यतीमों की आज़माइश करते रहो, यहाँ तक कि वो निकाह की उम्र को पहुँच जाएँ।" [क़ुरआन 04.06]

इस आयत अल्लाह इज़्ज़त वाज़ेह तौर पर निकाह की उम्र की तरफ़ इशारा कर रहा है। بَلَغُوا النِّکَاحَ यानि बालूगत के बाद निकाह की सही उम्र होगी।


निकाह के लिए ज़रूरी शरायत

अहले इल्म कहते हैं; निकाह के लिए लड़की के बालिग होने के साथ साथ उसका जिमाह (sexual intercourse) के लिए भी काबिल (capable) होना। और नस्सियाती तौर (psychological) भी तैयार होना।

अब सवाल ये पैदा होता है कि क्या आयशा (रज़ी०) शरायत के मुताबिक़ थी या नहीं?

तो आईए उन्हीं की रिवायत की हुई हदीस को देखते हैं!

"नबी करीम ﷺ से मेरा निकाह जब हुआ तो मेरी उमर छः साल की थी, फिर हम मदीना (हिजरत करके) आए और बनी-हारिस-बिन-ख़ज़रज के यहाँ क़ियाम किया। यहाँ आकर मुझे बुख़ार चढ़ा और उसकी वजह से मेरे बाल गिरने लगे। फिर मूँढ़ों तक ख़ूब बाल हो गए, फिर एक दिन मेरी माँ उम्मे-रूमान (रज़ि०) आईं। उस वक़्त मैं अपनी कुछ सहेलियों के साथ झूला झूल रही थी, उन्होंने मुझे पुकारा तो मैं हाज़िर हो गई। मुझे कुछ मालूम नहीं था कि मेरे साथ उनका क्या इरादा है। आख़िर उन्होंने मेरा हाथ पकड़कर घर के दरवाज़ा के पास खड़ा कर दिया और मेरा साँस फूला जा रहा था। थोड़ी देर मैं जब मुझे कुछ सुकून हुआ तो उन्होंने थोड़ा-सा पानी लेकर मेरे मुँह और सिर पर फेरा। फिर घर के अन्दर मुझे ले गईं। वहाँ अंसार की कुछ औरतें मौजूद थीं जिन्होंने मुझे देखकर दुआ दी कि ख़ैर और बरकत और अच्छा नसीब लेकर आई हो। मेरी माँ ने मुझे उन्हीं के हवाला कर दिया और उन्होंने मेरी सजावट की। उसके बाद दिन चढ़े अचानक नबी करीम ﷺ मेरे पास तशरीफ़ लाए और उन्होंने मुझे आप ﷺ के सिपुर्द कर दिया मेरी उम्र उस वक़्त नौ साल थी। [सहीह बुखारी: 3894]

उन्हें रूखसती के लिए उनकी मां के कहने पर बाक़ायदा सजाया सवारा जा रहा है अंसार की औरतें दुआएं और मुबारक बाद दे रही हैं।

  • क्या इन बातों से आपको कहीं से ये पता चला कि वो नाबालिग थी?
  • अगर अब भी आपको लगता है तो आपका source of information क्या है?

उसके बाद लड़की के वली की इजाज़त, लड़की के निकाह के लिए उसके वली की इजाज़त ज़रूरी है वरना निकाह बातिल हो जाएगा।

तो अब ये सवाल पैदा होता है क्या आयशा (रज़ी०) के वालिद [अबू बकर सिद्दीक़ (रज़ी०)] इस रिश्ते के लिए राज़ी नहीं थें? अगर नहीं होते तो क्या मज़ीद वो नबी करीम ﷺ के साथी होते? जबकि अबु बकर (रज़ी०) नबी करीम ﷺ के मर्ज़ी के मुताबिक़ उनके successor बने।


लड़की की रज़ामंदी

नबी करीम ﷺ ने फ़रमाया: 

"यतीम लड़की से उस की रज़ामन्दी हासिल की जाएगी अगर वो ख़ामोश रही तो यही उसकी रज़ामन्दी है। और अगर उसने इंकार किया तो उस पर (ज़बरदस्ती करने का) कोई जवाज़ नहीं।" [सुन्न तिरमिज़ी: 1109]

लड़की यतीम हो या कुंवारी उसकी रज़ामंदी ज़रूरी है। अहले इल्म कहते हैं रज़ामंदी उसी से ली जाएगी जिसे पता हो ये क्या होता है? और रज़ामंदी का मतलब भी यही होगा।

तो अब सवाल पैदा होता है क्या नबी करीम ﷺ ने किसी नाबालिग लड़की से शादी की?

तो शुरु में ख़ुद से पैदा हुए सवाल का जवाब तो इस्लाम के मयार के मुताबिक़ अल्हमदुलिलाह हल कर लिया। जिससे ये साफ़ वाज़ेह हो गया। उम्र के फासले से अम्मा आयशा को कोई मसला नहीं था। नबी करीम ﷺ निकाह पर राज़ी थी। रूखसती के वक्त बालिग और बाशाऊर थीं। उनके वालिद राज़ी।

ये है इस्लाम का मयार 👆🏻 अब हम आपका मयार जान लेते हैं, जिस बिना पर ऐतराज़ किया जाता है।


अगर अम्मा आयशा (रज़ी०) की रुखसती 9 साल की उम्र में सही नहीं है तो फिर क्यों नहीं? आपने किस बिना पर ये तय किया? 

अब आप बताएं, 

  • लड़कियां बलूगत तक किस उम्र को पहुंचती हैं? 
  • ये किन बातों (factor) पर मुनहासिर (depend) करता है?

आईए मेडिकल साइंस के मुताबिक़ देख लेते हैं!

Factors influencing menarcheal (first menstrual period) age: इस को 20 factors influence करते हैं यानि 20 बातों पर मुंहासिर करता है। जैसे genetics, environmental conditions, geographic location, nutrition, physical activity and psychological factors सब को बताना मुमकिन नहीं है लेकिन ये factors ज़्यादा असर डालते हैं। तो अब बताएं क्या सारी दुनिया में एक जैसे हालात हैं या दुनिया की सारी लड़कियों पर कारक एक सा असर डालते हैं?

एक मेडिकल रिसर्च के मुताबिक़, 7 साल की उम्र में भी 10% लड़कियां बलूगत तक पहुंच जाती हैं। लेकिन 86% 11 साल की उम्र में बलूगत को पहुंच जाती हैं और इनमें sexual intercourse की ability भी पाई जाती है। 

अब आपका सवाल होगा तो क्या हम 11 साल की उम्र में उनकी शादी कर दें? 

हम ये नहीं कह रहें हैं कि आप शादी कर दें बल्कि सवाल कर रहे हैं आप किस बिना पर marriageable age तय कर रहे हैं? 

तो शायद आपका जवाब होगा हम भारतीय नागरिक हैं तो उसके मुताबिक़ 18 साल के बाद होनी चाहिए। अभी कुछ अर्से पहले marriegeable age बढ़ाने की बात हो रही थी अगर वो bill pass हो जाता तो आज के बहुत से लोग अपने ही बच्चों की नज़र में peodophiles बन जाते। तो क्या ये मयार सब पर और आने वाली पीढ़ी पर भी लागू होगा? 

  • चाइना में age of consent 14 साल है जबकि शादी की उम्र 20 साल है। 
  • अंग्रेजो के वक्त में अपने मुल्क में age of consent 12 साल होती थी।
  • America के ज़्यादातर states में 14 से 16 साल तक age of consent है।

इन कम उम्र लड़कियों के साथ ज़िना होता है, क्या फिर उनसे कोई मर्द शादी करता होगा उनके मुस्तकबिल का हामी और नासिर कौन है?

इस्लामी क़ानून में तो कोई illigal activity को आज़ादी के नाम पर legal करके औरतों को tools/objects नहीं बनाता है। ये सब 21 वीं सदी में हो रहा जहां हर दूसरा मुफादपरस्त इन्सान women empowerment के झंडे बुलंद करता है।

चाइना के मुताबिक़ हम और हमारे (Indians) मुताबिक़ बहुत से मुल्क के लोग लड़कियों के साथ child sexual abuse कर रहे हैं। यानि सब peodophiles हैं।

नबी करीम ﷺ ने तो अम्मा आयशा (रज़ी०) निकाह किया था। जिससे उन्हें वो मकाम हासिल हुआ, कि हम और आप उन पर बातें कर रहें हैं। सवाल और कश्मोकश का पैदा होना आम बात है लेकिन इस बिना पर, बिना किसी तहकीक के किसी की भी शख्सियत को सवालिया निशान बना देना? कभी कभी ये अमल हमारे किरदार को ही मशकूक बना देती है। 

जैसे: 

नबी करीम ﷺ ने फ़रमाया:

"जो अपने लिए पसंद करो वही दूसरों के लिए पसंद करो।" [बुखारी 13]

अगर आप इस बात पर अमल कर लें तो आपकी ज़िंदगी में ऐतदाल (balance) पैदा कर देगा। किसी के लिए बुरे ख्याल आपको अपने लिए लगने लगेगा जो आपको पसंद नहीं आएगा।


क्या बलूगत के बाद लड़की अज़दावाजी (married life) के लिए suitable नहीं होती?

हां, ज़रूर नहीं सब लड़कियां हो जाए लेकिन ज़्यादातर हो जाती हैं। Medical science भी यही कहती है कि puberty के बाद लड़की लड़को का opposite gender पर attraction होता है।

कुछ और पहलुओं पर नरज़ डाल लेते हैं!


i. नबी करीम ﷺ का अम्मा आयशा (रज़ी०) से शादी का मक़सद

इस बात का जवाब तो google पर भी मौजूद है। लेकिन हम नबी करीम ﷺ की ज़िंदगी में अम्मा आयशा (रज़ी०) के किरदार के ज़रिए जानने की कोशिश करेंगे। (इंशा अल्लाह) नबी करीम ﷺ के हर निकाह की तरह ये निकाह भी अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त की रज़ा से हुआ था। अम्मा आयशा (रज़ी०) बहुत ज़हीन और समझदार थीं। 

▪️वो नबी करीम ﷺ के हर अमल पर गौर करती फिर उसी के मुताबिक़ उम्मत की तरबियत और इस्लाह करती। 

▪️अम्मा आयशा (रज़ी०) ने 2210 अहदीसों को रिवायत किया।

▪️ अम्मा आयशा (रज़ी०) ने अपने और नबी करीम ﷺ के रिश्ते के ज़रिए उम्मत को एक बेहतरीन अज़्दावाजी ज़िंदगी का जीता जागता नमूना पेश किया। जिसमें उन्होंने रोमानियत को भी वाज़ेह किया। 


ii. नबी करीम ﷺ और अम्मा आयशा (रज़ी०) के रिश्ते में रूमानियत की झलकियां:

"नबी करीम ﷺ मेरी गोद में सिर रख कर क़ुरआन मजीद पढ़ते हालाँकि मैं उस वक़्त हैज़ वाली होती थी।" [सहीह बुखारी: 297]

महवारी में नबी करीम ﷺ का मामूल ये होता था और अब अपने घर में नज़र डालें आपके घरों इस हालत में औरतें किचन में नहीं जा सकती उनके पति उनके हाथों से पानी नहीं पीते हैं। 


iii. अम्मा आयशा (रज़ी०) का नबी करीम ﷺ से नाराज़ होना

नबी करीम ﷺ ने मुझसे फ़रमाया: 

"मैं ख़ूब पहचानता हूँ कि कब तुम मुझसे ख़ुश होती हो और कब तुम मुझ पर नाराज़ हो जाती हो। बयान किया कि इस पर मैंने कहा आप ﷺ ये बात किस तरह समझते हैं? आप ﷺ ने फ़रमाया: जब तुम मुझसे ख़ुश होती हो तो कहती हो नहीं मुहम्मद ﷺ के रब की क़सम ! और जब तुम मुझसे नाराज़ होती हो तो कहती हो नहीं इब्राहीम (अलैहि०) के रब की क़सम ! बयान किया कि मैंने कहा जी हाँ अल्लाह की क़सम या रसूलुल्लाह! (ग़ुस्से में) सिर्फ़ आपका नाम ज़बान से नहीं लेती।" [सहीह बुखारी: 5228]

अब आप बताएं क्या 1400 साल पहले आपके किसी मज़हबी रहनुमा से उनकी बीवी को नाराज़ होने का हक़ था? मेरी इल्म के मुताबिक़ बराबर में बैठने का तो हक़ था नहीं नाराज़गी क्या शय है? शायद ही पता हो।


iv. दौड़ में एक दुसरे से मुक़ाबला करना:

हज़रत आयशा से रिवायत है के वह एक सफर में नबी करीम ﷺ के साथ थीं, अभी वह कम उम्र थीं, नबी करीम ﷺ ने अपने सहाबा से कहा: तुम लोग आगे चले जाओ (वह आगे चले गए) फिर आप ﷺ ने मुझ से फरमाया, "आओ, दौड़ का मुकाबला करें मैंने मुकाबला किया तो तेज़ रफ्तारी की वजह से मैं आपसे जीत गई, फिर इसके बाद एक मौका आया और एक रिवायत में है: आप ﷺ खामोश रहे, हत्ता के जब मुझ पर गोस्त चड़ गया और मैं भारी बदन वाली हो गई और मैं वो वाकया भूल चुकी थी। एक सफर में मैं आप ﷺ के साथ चली, आप ﷺ ने अपने सहाबा से कहा: आगे चले जाओ (वह चले गए), फिर फरमाया, "आओ दौड़ का मुकाबला करें।" 

मैं पिछला वाकया भूल चुकी थी और मुझ पर गोश्त भी चढ़ चुका था (यानी बदन भारी हो चुका था), मैंने कहा: " ऐ अल्लाह के रसूल ﷺ! मैं किस तरह आपका मुकाबला कर सकती हूं, मेरा ये हाल हो चुका है?

नबी करीम ﷺ ने फ़रमाया, "तुम्हे मुकाबला तो करना पड़ेगा।"

मैंने आप ﷺ से मुकाबला किया, आप ﷺ मुझसे सबकत ले गए (और हसने लगे) फरमाया, "ये उस जीत का बदला है।" [अस सिलसिला तुस सहीहा हदीस: 1945]

अब इस तरह की वाज़ेह दलील मौजूद होने के बाद भी एक निहायत ही खूबसूरत रिश्ते को सवालिया निशान लगा कर आप ख़ुद के बारे में क्या साबित कर रहें हैं? बराए करम सोचें ज़रूर।

▪️ अम्मा आयशा (रज़ी०) उस वक्त की औरतों की रहनुमाई किया करती थीं। यानि उन्हें उनके मसले मसाईल समझती थीं और वो तालीमात आज भी मौजूद है।

▪️ और उन्हें उम्मत की मां की हैसियत से वो सब कुछ किया जिससे आज भी लोग इल्म हासिल कर रहें हैं।

▪️ वो उस्तादाें की उस्ताद थीं और हैं और रहती दुनिया तक रहेंगी। और वो सिर्फ़ नबी करीम ﷺ के साथ 9/10 साल साथ रहीं। यानि 18 साल की उम्र में बेवा हो गईं। उस वक्त को आज से अगर जोड़ कर देखेंगे तो ये नाइंसाफी होगी।


vi. अम्मा आयशा (रज़ी०) का ख्याल नबी करीम ﷺ के बारे में

"ऐ नबी! अपनी बीवियों से कहो, अगर तुम दुनिया और उसकी ज़ीनत (चाहती हो तो आओ, मैं तुम्हें कुछ दे-दिलाकर भले तरीक़े से रुख़सत कर दूँ।" [क़ुरान 33.28]

कुरआन की ये आयत तभी नाज़िल हुई जब आप ﷺ मेरे पास थें आप ﷺ ने मुझ ही से शुरु किया और फ़रमाया: 

"मैं तुम से एक बात कहता हूँ और ये ज़रूरी नहीं कि जवाब फ़ौरन दो बल्कि अपने माँ-बाप से भी मशवरा कर लो। आयशा (रज़ि०) ने बयान किया कि आप ﷺ को ये मालूम था कि मेरे माँ-बाप कभी आप ﷺ से जुदाई का मशवरा नहीं दे सकते। मैंने कहा अब इस मामले में भी मैं अपने माँ-बाप से मशवरा करने जाऊँगी! इसमें तो किसी शुबह की गुंजाइश ही नहीं है कि मैं अल्लाह और उसके रसूल और दारे-आख़िरत को पसन्द करती हों। उसके बाद आप ﷺ ने अपनी दूसरी बीवियों को भी इख़्तियार दिया और उन्होंने भी वही जवाब दिया जो आयशा (रज़ि०) ने दिया था।[सहीह बुखारी: 2468]

कुरआन के ज़रिए जब अम्मा आयशा (रज़ी०) को ये इख्तियार दिया गया तो उन्होंने आप ﷺ का साथ पसन्द किया। क्या अब भी कोई शक और शुबह की गुंजाइश बचती है?

हज़रत आयशा (रज़ी०) फरमाती हैं:

خُلُقُ نَبي اللِه صلى الله عليه وسلم القرآن

"नबी करीम ﷺ का अख़लाक़ तो क़ुरआन ही था।" [सहीह नसई शरीफ: 1600]

इस हदीस में ख़ुद अम्मा आयशा (रज़ी०) नबी करीम ﷺ के अख्लाक की गवाही दे रही हैं। मिसालें और भी बहुत हैं लेकिन उम्मीद इतने से आप सब का शक और शुबह दूर हो जाय।


vii. नबी करीम ﷺ निकाह के बाद अम्मा आयशा (रज़ी०) की हैसियत

▪️अबु बकर (रज़ी०) की एक और बेटी थीं क्या आपको उनका नाम पता है? नहीं ना तो अब बताएं अम्मा आयशा (रज़ी०) को आप कैसे जानते हो?

▪️ रहती दुनिया तक के लोगों लिए वो मां है।

▪️ जिससे अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त सबसे ज़्यादा मोहब्बत करता है जब उनसे ये पूछा गया आप (नबी करीम ﷺ ) किससे मोहब्बत करते तो उन्होंने फ़रमाया आयशा (रज़ी०) से फिर लोगों ने पूछा और किससे तो फ़रमाया आयशा के वालिद से यानि अबु बकर (रज़ी०)।

(वाज़ेह रहे लोगों का सवाल मखलूक की मोहब्बत के ताल्लुक से था।)

▪️ अम्मा आयशा (रज़ी०) को फरिश्तों के सरदार हज़रत जिब्राईल अलैहिससलाम ने सलाम कहा है।

▪️ अम्मा आयशा (रज़ी०) के दिफा में अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त ने क़ुरआन की एक सूरह नाज़िल कर दी।

देखें! ज़हनो में सवालों का पैदा एक फितरी बात है लेकिन सवाल को सवाल रहने देना ये ख़ुद के साथ नाइंसाफी है क्योंकि ये सवाल इस्लाम पर है या नहीं इस बहस नहीं पड़ते हैं बल्कि ये जान लें कहीं किसी के लिए tool tik तो नहीं बन रहे हैं। क्योंकि यही मीडिया हमें (Muslims) नबी करीम ﷺ की तलीमात याद दिला कर सब्र और बर्दाश्त की तलकीन करती नज़र आती है। दुआ है आप इंशा अल्लाह इन बातों पर ज़रूर गौर करेंगे।


आपकी ख़ैर ख़्वा 
बिन्ते हव्वा

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