ओवैस क़रनी रहिमल्लाह के मुताल्लिक कुछ सवाल और उनके जवाब
सवाल 1. जंग ऐ उहूद मे नबी अलैहिस्सलाम के दाँत शहीद हो गए थे तो ओवैस क़रनी ने खबर मिलने पर अपने दाँत तोड़ लिए?
जवाब: ये रिवायत की ओवैस बिन अमीर क़रनी ने अपने तमाम दाँत तोड़ दिए थे बे असल और झूठी रिवायत है जो की जाहिल आवाम मे मशहूर हो गई है मुहद्दीसीन की किताबों मे इसकी कोई असल नहीं है।
दूसरी बात अपने आपको नुकसान पहुँचाना ना जायेज़ है।
सवाल 2. नबी अलैहिस्सलाम के सहाबा उमर रज़ि अन्हु का ओवैस क़रनी से दुआ कराना साबित है? जबकि मर्तबा मे उमर रज़ि अन्हु ओवैस क़रनी से अफ़ज़ल है?
जवाब: नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया,
إِنَّ خَيْرَ التَّابِعِينَ رَجُلٌ يُقَالُ لَهُ أُوَيْسٌ، وَلَهُ وَالِدَةٌ وَكَانَ بِهِ بَيَاضٌ فَمُرُوهُ فَلْيَسْتَغْفِرْ لَكُمْ
तब्येन मे सबसे बेहतर इंसान वो शख्स है जिसे ओवैस कहते है इसकी वालिदा (ज़िंदा ) है और इसके (जिस्म ) मे सफेदी है इससे कहो तुम्हारे लिए दुआ करें। [मुस्लिम 2542]
इस हदीस से मालूम होता है की ओवैस क़रनी मुस्तजाब उद दावात थे यानी अल्लाह तआला आपकी दुआ खास तौर पर क़ुबूल करता था।
सहीह मुस्लिम की दूसरी रिवायत से मालूम होता है की वो अपनी वालिदा की खिदमत की वजह से नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास हाज़िर ना हो सके जिसमे आप अलैहिस्सलाम की रज़ामंदी शामिल थी।
हज़रत उमर रज़ि अन्हु का इनसे दुआ इस्तग़्फ़िआर कराना साबित है। [देखिये सहीह मुस्लिम 4292]
किसी अफ़ज़ल शख्स का मफज़ूल शख्स से दुआ कराना तोहीन नहीं होती।
हज़रत उमर इब्ने अब्बास रज़ि अन्हुमा से अफ़ज़ल थे मगर इनसे आप का दुआ कराना साबित है। [देखिए सहीह बुखारी 1010,,,2710]
दूसरी बात ओवैस क़रनी का अपने से कम अफ़ज़ल शख्स से दुआ कराना भी साबित है। [देखिये सहीह मुस्लिम 6492]
सवाल 3. ओवैस क़रनी वालिदेन की खिदमत की वजह से नबी सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम का दीदार ना कर सके जबकि हदीस मे आता है की कोई मोमिन नहीं हो सकता जब तक माँ बाप से ज़्यादा नबी अलैहिस्सलाम से मोहब्बत ना कर ले।
जवाब: इसमें कोई शक़ नहीं की कोई कामिल मोमिन नहीं हो सकता जब तक वो मा बाप भाई बहन से सबसे ज़्यादा मोहब्बत नबी अलैहिस्सलाम से ना कर ले। [देखिये बुखारी 15, मुस्लिम 44]
लेकिन इसका ये मतलब नहीं के,
1. नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के ज़माने मे इस्लाम लाने वाले तमाम तब्येइन पर ये फर्ज़ था की वो ज़रूर नबी सल्लल्लाहु अलैहि से मुलाक़ात करते।
2. अगरचे उनके पास हाज़िर ना हो सकने का शरई उजर भी था।
3. और दूसरी बात हदीस के मुताबिक ओवैस क़रनी का मदीना तशरीफ़ न लाना नबी अलैहिस्सलाम की इजाज़त से था वरना आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम इन्हे हुक्म देते की आप मदीना हाज़िर हो जाओ।
आपका दीनी भाई
मुहम्मद
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