Tagut ka inkar (yaani kufr bit-tagut) part-15

Tagut ka inkar (yaani kufr bit-tagut)


ताग़ूत का इनकार [पार्ट-15]

(यानि कुफ्र बित-तागूत)


कैपिटलिज्म (capitalism) आज के दौर का ताग़ूत कैसे है?

इस्लाम के मुताबिक़, "ताग़ूत" वो हर चीज़ है जो अल्लाह के इलाह होने का इंकार करके इंसान को अपनी हुकूमत या फ़िक्र का ग़ुलाम बना लेती है। ताग़ूत सिर्फ़ बुत-परस्ती तक महदूद नहीं, बल्कि हर वो सिस्टम, सोच, या शख्स जो इंसान को अल्लाह की दी हुई हिदायत से दूर करने का ज़रिया बने, ताग़ूत की कैटेगरी में आता है।

कैपिटलिज्म, या पूंजीवाद, एक आर्थिक प्रणाली है जिसमें उत्पादन के साधन व्यक्तिगत स्वामित्व में होते हैं और लाभ को अधिकतम करने के लिए बाजार के नियमों पर आधारित होता है। यह प्रणाली समाज में धन और संसाधनों का असमान वितरण करती है, और अक्सर यह अल्लाह के निर्धारित सिद्धांतों के खिलाफ होती है। इस लेख में हम कुरान और हदीस की रोशनी में समझेंगे कि कैसे कैपिटलिज्म आज के दौर का ताग़ूत है।


कैपिटलिज्म का मूल सिद्धांत

कैपिटलिज्म का आधार व्यक्तिगत स्वामित्व और लाभ पर केंद्रित है। इसमें व्यक्तिगत लाभ को सामाजिक भलाई पर प्राथमिकता दी जाती है। यह आर्थिक असमानता को बढ़ावा देता है, जहाँ कुछ लोग अत्यधिक धन को इकट्ठा (acumulate) करते हैं, जबकि अधिकांश लोग आर्थिक कठिनाइयों का सामना करते हैं।


कैपिटलिज्म और तौहीद का विरोध

इस्लाम का मूल सिद्धांत तौहीद (अल्लाह की एकता) है, जिसमें सब कुछ अल्लाह के आदेश और मर्जी के अनुसार होना चाहिए। लेकिन कैपिटलिज्म में, व्यक्ति अपने व्यक्तिगत लाभ को सर्वोपरि मानता है, जिससे वह अल्लाह की दी हुई व्यवस्थाओं का उल्लंघन करता है।

कुरान में स्पष्टता:

"और तुम लोग न तो आपस में एक-दूसरे के माल ग़लत तरीक़े से खाओ और न हाकिमों के आगे उनको इस मक़सद से पेश करो कि तुम्हें दूसरों के माल का कोई हिस्सा जान-बूझकर ज़ालिमाना तरीक़े से खाने का मौक़ा मिल जाए।" [कुरआन 2:188]

इस आयत में अल्लाह ने स्पष्ट किया है कि धन का सही उपयोग किया जाना चाहिए। कैपिटलिज्म में धन का संचय केवल कुछ लोगों के हाथ में होता है, जो इस आयत का उल्लंघन करता है।


अनैतिकता और हानि का बढ़ावा

कैपिटलिज्म में लाभ अर्जित करने के लिए अनैतिक तरीके अपनाए जाते हैं, जैसे कि धोखाधड़ी, शोषण और अत्यधिक प्रतिस्पर्धा। यह न केवल व्यक्तिगत जीवन को प्रभावित करता है, बल्कि समाज के लिए भी हानिकारक होता है।

हदीस में चेतावनी:

नबी करीम (सल्ल०) ने फरमाया: "जिसने किसी व्यक्ति को धोखा दिया, वह हम में से नहीं है।" [सहीह मुस्लिम : 102]

यह हदीस बताती है कि धोखा देना इस्लाम में बहुत बुरा माना जाता है, जबकि कैपिटलिज्म में ऐसा व्यवहार अक्सर किया जाता है


सामाजिक असमानता का निर्माण

कैपिटलिज्म में गरीब और अमीर के बीच की खाई बढ़ती जाती है। जब धन केवल कुछ हाथों में होता है, तो यह समाज में संघर्ष और असमानता को बढ़ावा देता है।

कुरान में कहा गया कि:

"ताकि वह (धन) तुम्हारे अमीर लोगों के बीच ही चक्कर न लगाता रहे।" [कुरआन 59:7]

इस आयत में यह स्पष्ट रूप से बताया गया है कि धन केवल कुछ लोगों के हाथों में केंद्रित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसे समाज में न्यायपूर्ण तरीके से वितरित किया जाना चाहिए ताकि अमीर और गरीब के बीच की खाई न बढ़े। इस्लाम में संपत्ति की उचित और समान वितरण की शिक्षा दी गई है ताकि समाज में संघर्ष और असमानता को रोका जा सके।


उपभोक्तावाद और आत्मनिर्भरता का अभाव

कैपिटलिज्म उपभोक्तावाद को बढ़ावा देता है, जिससे लोग अनावश्यक चीजों के लिए पैसे खर्च करते हैं और अपने वास्तविक आवश्यकताओं से दूर होते हैं। इससे व्यक्ति का ध्यान सिर्फ भौतिक चीजों की ओर जाता है, जिससे उसकी आत्मनिर्भरता खत्म होती है।


हदीस में साधारणता का महत्व:

नबी करीम (सल्ल०) ने फरमाया: "दुनिया में इस तरह हो जा जैसे तो मुसाफ़िर या रास्ता चलने वाला हो।'' [सहीह बुखारी : 6416]

इस हदीस में सादा जीवन की प्रशंसा की गई है, जबकि कैपिटलिज्म में भौतिक सुखों का पीछा करना एक सामान्य बात बन गया है।


धन का दुरुपयोग और नैतिकता का ह्रास

कैपिटलिज्म में, धन का दुरुपयोग अक्सर होता है, जहाँ धन का इस्तेमाल सामाजिक भलाई के बजाय व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए किया जाता है। इससे नैतिकता का ह्रास होता है और समाज में अराजकता बढ़ती है।


कुरान में नैतिकता की आवश्यकता:

"दर्दनाक सज़ा की ख़ुशख़बरी दो उनको जो सोने और चाँदी जमा करके रखते हैं और उन्हें अल्लाह की राह में ख़र्च नहीं करते।" [कुरआन 9:34]

इस आयत में अल्लाह ने उन लोगों की निंदा की है जो अपने धन को समाज की भलाई के लिए खर्च नहीं करते और केवल उसे इकट्ठा करते रहते हैं। यह बताता है कि धन का दुरुपयोग करना, उसे समाज के लाभ के बजाय स्वार्थी उद्देश्यों के लिए रखना, गंभीर गुनाह है।

धन को अल्लाह की राह में, ज़रूरतमंदों की मदद करने, और सामाजिक भलाई के कार्यों में लगाने का आदेश दिया गया है ताकि समाज में नैतिकता बनी रहे और अराजकता से बचा जा सके।

यह आयत हमें बताती है कि धन का सही उपयोग और दूसरों की मदद करना चाहिए, जबकि कैपिटलिज्म में यह अक्सर नजरअंदाज किया जाता है।

कैपिटलिज्म आज के दौर का ताग़ूत है, क्योंकि यह अल्लाह के आदेशों के खिलाफ है और समाज में असमानता, धोखाधड़ी और नैतिकता के ह्रास को बढ़ावा देता है। इस्लाम एक ऐसी प्रणाली की मांग करता है जो न केवल व्यक्तिगत लाभ के लिए हो, बल्कि समाज की भलाई को भी ध्यान में रखे। एक सच्चे मोमिन को चाहिए कि वह कैपिटलिज्म के ताग़ूत से दूर रहे और अल्लाह के आदेशों के अनुसार अपनी ज़िंदगी को ढाले।


- मुवाहिद


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