विज्ञान और क़ुरआन (पार्ट-2)
10. जिंदगी की इब्तिदा (जीवन की उत्पत्ति):
हम सभी इस बात को जानते हैं कि पानी हमारे लिए कितना ज़रूरी है। क़ुरआन में ज़िंदगी की इब्तिदा के बारे में कुछ इस तरह से बयान किया गया है,
"चलने फिरने वाले जान-दार मख़लूक़ को अल्लाह ने पानी से पैदा किया इनमें से बाज़ पेट के बल चलते हैं तो बाज़ पांव के ज़रिये।" [क़ुरआन 21:30]
इस आयत में पानी को सभी की जिंदगी की इब्तिदा बताई गई है।सभी जिंदा मख़लूक़ सेल्स से बने होते हैं पर वो सेल्स 70% पानी से बने होते हैं।
11. झूठ बोलने की हरकत:
सूरह अल-क़द्र आयत 15-16,
"हरगिज़ नहीं, अगर वो बाज़ ना आया तो हम उसकी पेशानी के बाल पकड़ कर घसीट लेंगे यानी हमसे झूठे खता कर पेशानी के बाल।" [क़ुरआन 97:15-16]
ये आयत नाज़िल हुई थी कि अबू जहल नाम का एक इंसान बहुत ज़्यादा झूठ बोलता था इस आयत में दिमाग के आगे वाले हिस्से को झूठा कहा गया है।
आज हमें विज्ञान ये बताता है कि हमारे दिमाग के आगे वाले हिस्सा ही हमसे ऐसे और झूठ बुलवाने का जिम्मेदार होता है।
12. फिंगर प्रिंट:
दुनिया में आदम (अलैहिस्सलाम) से लेकर कयामत तक के लोगों का फिंगर प्रिंट अलग-अलग होता है। यहां तक कि जुड़वा बच्चों का फिंगर प्रिंट मुख्तलिफ होते हैं। ये फिंगरप्रिंट एक इंसान की बहुत महत्वपूर्ण चीज होती है जो आज के वक्त में फॉरेंसिक साइंस इनका इस्तेमाल कर रही है लेकिन क़ुरआन मजीद में 1400 साल पहले यह बयान कर दिया है की:
"क्या इंसान ये ख्याल करता है कि हम उसकी हड्डियां जमा ना करेंगे। हम जरूर करेंगे क्योंकि हम इस पर कादिर हैं कि उसकी पोर-पोर दुरुस्त कर दे।" [क़ुरआन 75:3-4]
इस आयत में अल्लाह ने बताया है कि इंसान मरने के बाद भी उसकी हड्डियों को भी जोड देगा या उंगलियों के निशान भी और वह हर चीज पर कुदरत रखने वाला है।
13. गर्भ में बच्चे के विकास का चरण:
1400 साल पहले विज्ञान ने उतनी प्रगति नहीं की थी कि यह पता लगे कि माँ के गर्भ में बच्चे किस तरह विकसित होते हैं, उसके कितने चरण होते हैं। यह पता लगाना 1400 साल पहले बहुत मुश्किल था। उस वक्त ना माइक्रोस्कोप था, ना और किसी भी तरह की टेक्नोलॉजी लेकिन कुरान में अल्लाह तआला ने इसका जिक्र कर दिया था।
सूरह अल - मोमिन आयत 12 और 14
"और हमने इंसान को मिट्टी के खुलूस से पैदा किया फिर हम ही ने नूतफे को गोश्त का लोथरा बनाया फिर लोथरे की बोटी बनाई फिर बोटी को हड्डियां बनाया फिर हड्डियां पर गोश्त चढ़ाया फिर उसको नई सूरत में बना दिया। तो क्या बड़ी शान है अल्लाह तआला की सबसे बेहतर बनाने वाला है।" [क़ुरआन 23:12-13]
निष्कर्ष
क़ुरआन में पाए जाने कुछ वैज्ञानिक तथ्यों में से है। यह ध्यान रखना बेहद जरूरी है कि यह विज्ञान की किताब नही। क्योंकि विज्ञान अल्लाह के बनाई हुई दुनिया संसार को जानने और समझने का एक छोटा सा जरिया है। और विज्ञान हमेशा नई नई खोज करता रहता है। क्योंकि विज्ञान इस विशाल संसार के एक प्रतिशत को भी नही जान पाया है, जबकि कुरआन इस संसार को बनाने वाले ने ख़ुद इंसान को दिया है। जिसमे कोई कमी नहीं है वो सम्पूर्ण है। जबकि विज्ञान निरंतर बदलता रहेगा, और हमेशा अधूरा ही रहेगा।
इसलिए कुरआन विज्ञान के जैसा है यह दावा करना (क़ुरआन में वैज्ञानिक तथ्य के कारण) सही नहीं होगा। वजाहत ये कि अल्लाह ने पैगम्बर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को दिया था।
जिस तरह क़ुरआन में कुदरती दुनिया के बारे में जानकारी है उसी तरह हमारी आत्मा के बारे में जानकारी है यह हमारी भावनाओं और इच्छाओं के जरुरत से जुडी बातें और ये अल्लाह के बताए हुए सही रस्तों पर अमल से हमारे जिंदगी में सुकून पैदा करता है।
क़ुरआन पढ़ने से हर तरह का तनाव और बीमारी दूर रहती है और गर्भवती महिलाओं को भी पढ़ने के लिए कहा जाता है ताकि उन्हें सकारात्मक ख्याल आए और वो बेहतर महसूस करें ये बात वैज्ञानिकों ने भी कही है कि क़ुरआन को पढ़ने से सारी बीमारियाँ और तनाव दूर रहता है।
बिग बैंग थ्योरी से लेकर गर्भ में बच्चे के विकास के चरण तक सब चीज़ों के बारे में अल्लाह तआला ने क़ुरआन मजीद में ज़िक्र किया है और भी बहुत सारी चीज़ें हैं जिसके बारे में अल्लाह तआला ने क़ुरआन मजीद में ज़िक्र किया है बहुत सारे नेमतें हैं जो वैज्ञानिक आज खोज कर रहे हैं वह कई सालो पहले अल्लाह तआला ने क़ुरआन में फरमाया था।
आपकी दीनी बहन
शमा
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