खुलासा ए क़ुरआन - सूरह (078) अन नबा
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
सूरह (078) अन नबा
(i) क़यामत
क़यामत से सम्बंधित काफ़िरों के शक का खंडन किया गया और बताया गया है कि क़यामत का आना यक़ीनी है, क़यामत का नक़्शा खींचा गया है। सरकशों के लिए अज़ाब है जिसमें इज़ाफ़ा होता रहेगा। नेक लोगों के लिए पुरस्कार और सम्मान है। उस दिन फ़रिश्ते मैदान ह हशर में सफ़ बांधे खड़े होंगे। बेग़ैर इजाज़त कोई बोल नहीं सकेगा और कुफ़्फ़ार अपना अंजाम देख कर अफ़सोस करते हुए कहेंगे "काश कि मैं मिट्टी होता" तो मेरा हिसाब किताब न होता। (01 से 05, और 37 से 40)
(ii) अल्लाह के एहसानात
ज़मीन को फ़र्श, पहाड़ों को खूंटियों की तरह गाड़ना, लोगों को जोड़े जोड़े, नींद को सुकून, रात को लिबास, दिन को रोज़ी की तलाश, ऊपर सात मज़बूत आसमान, एक रौशन और चमकता सूरज, बादलों से मूसलाधार बारिश, बारिश के ज़रिए ग़ल्ला, सब्ज़ी और घने बाग़ उगाना, वगैरह (06 से 16)
(iii) बुरे लोगों का अंजाम
जहन्नम घात लगाए हुए है, वही जहन्नम जहां पीने के लिए न तो ठंडा पानी होगा और न कोई स्वाद, उसमें मुद्दतों पड़े रहेंगे, उबला हुआ पानी और ज़ख्मों की गंदगी उनके पीने लिए होगी। (21 से 25)
(iv) नेक लोगों को दी जाने वाली नेअमतें
◆ अंगूर और भिन्न भिन्न बाग़,
◆ नवयुवतियां समान आयु वाली
◆ भरे हुए जाम
◆ निराधार (बकवास) और असत्य बात न सुनेंगे। (31 से 35)
आसिम अकरम (अबु अदीम) फ़लाही
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