खुलासा ए क़ुरआन - सूरह (077) अल मुरसिलात
सूरह (077) अल मुरसिलात
(i) जब क़यामत आएगी
लगातार चलने वाली और तूफ़ानी हवा जो बादलों को उठा कर फिर जुदा करके बारिश और इंसान के डर का कारण बनती हैं उनकी क़सम खा कर यक़ीन दिलाया गया कि क़यामत तो आकर रहेगी और उसकी निशानी यह होगी कि सितारे प्रकाश विहीन हो जायेंगे, आसमान फट जायेगा, पहाड़ चूर चूर कर दिये जायेंगे, पैग़म्बर निर्धारित समय पर एकत्र किये जायेंगे। (01 से 15)
(ii) तबाही है आज झुठलाने वालों के लिए
इस आयत को पूरी सूरह में दस बार दुहराया गया है। पिछले जुमलों में कही गई बात पर ज़ोर देने के लिए ऐसा किया गया है।
1, क़यामत के ज़िक्र के बाद,
2, पिछ्ली क़ौमों की हिलाकत,
3, इंसान की पैदाइश,
4, दुनिया मे अता की गई नेअमतें,
5, लोग क़यामत की तरफ़ बढ़ते जा रहे हैं,
6, क़यामत के दिन लोगों की हालत,
7, आज कोई मक्कारी करनी है तो कर लें,
8, परहेज़गार साये और चश्मों में होंगे, उनकी ख़्वाहिश के मुताबिक़ मेवे होंगे,
9, खाओ पियो और कुछ दिन ऐश कर लो तुम मुजरिम हो,
10, जब रुकूअ करने के लिए कहा जाएगा तो काफ़िर रुकूअ नहीं कर सकेंगे। (16 से 50)
(iii) क़यामत का इंकार करने वालों का अंजाम
तीन शाख़ों वाला साया जो न तो ठंढक पहुंचाएगा और न आग की लिपट से बचा सकेगा, वह तो महलों इतनी ऊंची चिंगारी फेंकेगा, जहन्नमी पीले ऊंटों की तरह होंगे, न यह बोलेंगे और न कोई बहाना (excuses) पेश कर सकेंगे। (35 से 38)
आसिम अकरम (अबु अदीम) फ़लाही
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