खुलासा ए क़ुरआन - सूरह (076) अद दहर (अल इंसान)
सूरह (076) अद दहर (अल इंसान)
(i) एक समय में इंसान कुछ भी न था
इंसान पर एक ऐसा दौर भी गुज़रा है जब वह कुछ भी न था फिर अल्लाह ने उसे मिश्रित बूंद से पैदा किया और हिदायत का रास्ता सामने रख दिया। अब जो चाहे शुक्र गुज़ार बने और जो चाहे कुफ़्र करे। अलबत्ता यह जान ले कि काफ़िरों के लिए बेड़ी, तौक़, और भड़कती हुई आग है और नेक लोगों के लिए तरह तरह की नेअमतें हैं। (01 से 04)
(ii) अल्लाह के नेक बंदों की विशेषताएं
◆ नज़रों (अल्लाह से मानी हुई मिन्नत) को पूरी करते हैं,
◆ आख़िरत के दिन से डरते हैं,
◆ मिस्कीन, यतीम और क़ैदियों को हंसी खुशी खाना खिलाते हैं,
◆ हर काम का मक़सूद सिर्फ़ और सिर्फ़ अल्लाह की रज़ा होती है क्योंकि वह अपनी नेकियों के बदले किसी शुक्रिया और बदले के तलबगार नहीं होते। (7 से 10)
(iii) जन्नतियों को दी जाने वाली नेअमतें
काफ़ूर और सोंठ के शर्बत, चमक (freshness) और ख़ुशी, बाग़ात , ऊंची मसनदें, गाऊ तकिया, न गर्मी की तकलीफ़ और न धूप की फ़िक्र, जन्नत की छाया, फलदार दरख्तों का झुकना, चांदी के बर्तन और शीशे के ख़ूबसूरत गिलास, सलसबील का चश्मा, बिखरे मोती की तरह हमेशा एक ही उम्र के रहने वाले ख़िदमतगार, बारीक रेशम के हरे लिबास, अतलस व दीबा के लिबास, चांदी के कंगन, स्वागत आदि। (05 से 22)
(iv) नबी को सब्र की तलक़ीन
◆ ऐ नबी! सब्र करें,
◆ काफ़िरों की न सुनें,
◆ सुबह शाम अपने रब का ज़िक्र करें,
◆ तहज्जुद व तस्बीह का एहतेमाम करें। (24 से 26)
आसिम अकरम (अबु अदीम) फ़लाही
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