क़यामत की निशानियां सीरीज-5
क़यामत की छोटी निशानियां (पार्ट 03)
5. फितनो का ज़हूर (ज़ाहिर होना):
हदीस 01:
अबू-हुरैरा (रज़ि०) से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया:
"उन फ़ितनों से पहले जो अन्धेरी रात के हिस्सों की तरह (छा जाने वाले) होंगे। (नेक) काम करने में जल्दी करो। (उन फ़ितनों में) सुबह को आदमी मोमिन होगा और शाम को काफ़िर या शाम को मोमिन होगा तो सुबह को काफ़िर। अपना दीन (ईमान) दुनियावी सामान के बदले बेचता होगा।"
[सहीह मुस्लिम 118]
हदीस 02:
नबी करीम (सल्ल०) की पाक बीवी उम्मे-सलमा (रज़ि०) ने बयान किया कि एक रात रसूलुल्लाह (सल्ल०) घबराए हुए बेदार हुए और फ़रमाया अल्लाह की ज़ात पाक है। अल्लाह तआला ने क्या-क्या ख़ज़ाने नाज़िल किये हैं और कितने फ़ितने उतारे हैं उन हुजरे वालियों को कोई बेदार क्यों न करे आपकी मुराद पाक बीवियों से थी ताकि ये नमाज़ पढ़ें। बहुत से दुनिया में कपड़े बारीक पहनने वालियाँ आख़िरत में नंगी होंगी।
[सहीह बुखारी 7069]
हदीस 03:
नबी करीम (सल्ल०) ने फ़रमाया,
''ज़माना क़रीब होता जाएगा और अमल कम होता जाएगा और लालच दिलों में डाल दिया जाएगा और फ़ितने ज़ाहिर होने लगेंगे और ( هرج) की कसरत हो जाएगी।" लोगों ने सवाल किया : या रसूलुल्लाह! ये (هرج) क्या चीज़ है? नबी करीम (सल्ल०) ने फ़रमाया कि क़त्ल! क़त्ल। और यूनुस और लैस और ज़ोहरी के भतीजे ने बयान किया उन से ज़ोहरी ने उन से हुमैद ने उन से अबू-हुरैरा (रज़ि०) ने नबी करीम (सल्ल०) से।
[बुखारी शरीफ 7061]
हदीस 04:
हज़रत उसामा (रज़ि०) से रिवायत की कि नबी करीम (सल्ल०) मदीना मुनव्वरह के क़िलों में से एक क़िले (ऊँची महफ़ूज़ इमारत) पर चढ़े, फिर फ़रमाया : क्या तुम (भी) देखते हो जो मैं देख रहा हूँ? मैं तुम्हारे मकानों में फ़ितनों के होने के मक़ामात बारिश टपकने के निशानात की तरह (कसरत से और वाज़ेह) देख रहा हूँ।
[सहीह मुस्लिम 7245]
फायदा:
(01) कयामत की निशानी यह है कि फितने बढ़ जाएंगे, लफ्ज़ फितना, इम्तिहान, और आजमाइश और अपना पसंदीदा चीजों पर इस्तेमाल किया जाता है मसलन गुनाह, क़त्ल, खून, कश्त वगेरा।
(02) दौर ए नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से ही इसका ज़हूर हो चुका है जो कसरत से बढ़ाता ही जा रहा है।
(03) फितना फिल वाके ग़ैर महसूस चीज़ है मगर अल्लाह अपनी कुदरत ए कामिला से नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को इसका वजूद दिखा दिया।
6. हज़रत उमर रज़ि अन्हु फितनो के दरमियान रुकावट हैं:
हदीस:
हम उमर (रज़ि०) की ख़िदमत में बैठे हुए थे कि उन्होंने पूछा: तुममें से किसे फ़ितने के बारे में नबी करीम (सल्ल०) का फ़रमान याद है? हुज़ैफ़ा (रज़ि०) ने कहा कि इन्सान का फ़ितना (आज़माइश) उसकी बीवी उसके माल उसके बच्चे और पड़ौसी के मामलात में होता है जिसका कफ़्फ़ारा नमाज़ सदक़ा अम्र-बिल-मअरूफ़ और नही-अनिल-मुनकर (भलाई का हुक्म देना और बुराई से रोकना) कर देता है। उमर (रज़ि०) ने कहा कि मैं उसके मुताल्लिक़ नहीं पूछता बल्कि उस फ़ितने के बारे में पूछता हूँ जो दरिया की तरह ठाठें मारेगा। हुज़ैफ़ा (रज़ि०) ने बयान किया कि अमीरुल-मोमिनीन आप पर इसका कोई ख़तरा नहीं उसके और आप के बीच एक बन्द दरवाज़ा रुकावट है। उमर (रज़ि०) ने पूछा क्या वो दरवाज़ा तोड़ दिया जाएगा या खोला जाएगा? बयान किया कि तोड़ दिया जाएगा। उमर (रज़ि०) ने इस पर कहा कि फिर तो वो कभी बन्द न हो सकेगा। मैंने कहा जी हाँ। हमने हुज़ैफ़ा (रज़ि०) से पूछा : क्या उमर (रज़ि०) इस दरवाज़े के मुताल्लिक़ जानते थे? फ़रमाया कि हाँ जिस तरह मैं जानता हूँ कि कल से पहले रात आएगी क्योंकि मैंने ऐसी बात बयान की थी जो बे-बुनियाद नहीं थी। हमें उनसे ये पूछते हुए डर लगा कि वो दरवाज़ा कौन थे। चुनांचे हमने मसरूक़ से कहा (कि वो पूछें) जब उन्होंने पूछा कि वो दरवाज़ा कौन थे? तो उन्होंने कहा कि वो दरवाज़ा उमर (रज़ि०) थे।
[सहीह बुखारी 7096]
फायदा:
(01) हज़रत उमर रज़ि अन्हु फिल वाके फितनो के दरमियान मज़बूत रुकावट थें।
(02) दरवाज़े से मुराद हज़रत उमर थे।
(03) दरवाजे का तोड़ा जाना आपकी शहादत की तरफ इशारा था।
(04) खुद उमर रज़ि अन्हु भी हदीस का मक़सद जानते थे।
(05) फितनो से मुराद कश्त खून और क़त्ल व गारगिरी है जो हज़रत उमर की शहादत के बाद शुरू हुए और आज तक जानबर ना हो सके बल्कि क़यामत ताक बा तदरीज बढ़ते ही चले जाएँगें।
(06) हज़रत उमर रज़ि अन्हु को एक मजूसी गुलाम फिरोज़ अबू लु लु ने फजर के वक़्त हालात ए नमाज़ शहीद किया।
अल्लाह हमें दीन समझने की तोफ़ीक़ दें।
जुड़े रहें इस मोज़ू से जुड़ी अहम बातें आने वाली पोस्ट में रखेंगे (इंशाअल्लाह)
आपका दीनी भाई
मुहम्मद रज़ा
0 टिप्पणियाँ
कृपया कमेंट बॉक्स में कोई भी स्पैम लिंक न डालें।