क्या नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने ख्वाब मे अल्लाह को देखा?
कुछ लोग इस तहरीर के बाद मुझसे इख़्तिलाफ भी करेंगे और समझने वाले समझेंगे मेने बहुत सी तक़रीरो और तहरीरो मे देखा है क़ी आलिम लोग हदीस बयान करते हैं क़ी नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने ख्वाब मे अल्लाह को देखा।
लेकिन मै अपने नाकिस इल्म क़ी तहक़ीक़ के ज़रिये ये समझा क़ी अल्लाह के नबी ने अल्लाह को ना बेदारी मे देखा ना ख्वाब मे देखा इस पर दलील आगे आ रही है-
- क़ुरआन से दलील
- हदीस से दलील
- उसूल ऐ हदीस से दलील
1. क़ुरआन
अल्लाह तआला क़ुरआन मे फ़रमाता है:-
لَا تُدۡرِكُهُ الۡاَبۡصَارُ وَهُوَ يُدۡرِكُ الۡاَبۡصَارَۚ وَهُوَ اللَّطِيۡفُ الۡخَبِيۡرُ
निगाहें उसको नहीं पा सकतीं और वो निगाहों को पा लेता है, वो निहायत बारीक बीं [ सूक्ष्मदर्शी] और बाख़बर है। [सुरह अनाम-103]
इस आयत मे वाज़ेह है क़ी कोई आँख अल्लाह को नहीं देख सकती मगर अल्लाह सबको देख लेता है।
नबी अलैहिस्सलाम भी एक बशर हैं, बशर होने के नाते नबी भी अल्लाह का दीदार नहीं कर सकते।
ये वाज़ेह नस ऐ क़तई (Full Clarification) से साबित हुआ क़ी अल्लाह को कोई नहीं देख सकता।
हाँ, ये ज़रूर है दुनिया क़ी ज़िन्दगी मे अल्लाह को कोई नहीं देख सकता लेकिन कयामत के दिन हम अल्लाह का दीदार करेंगे। अल्लाह हमें अपना दीदार नसीब फरमा।
2. हदीस
अबूज़र गिफारी रज़ि अन्हु बयान करते हैं,
नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से पूछा गया के आपने अपने रब का दीदार किया?
तो नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया वो नूर है मे उसे कैसे देख सकता हूँ। [सहीह मुस्लिम 178]
सय्यदा आयशा रज़ि अन्हा ने कहा तीन चीज़े हैं जिसने इनमे से किसी एक के बारेँ मे भी दावा किया उसने अल्लाह पर बड़ा झूठ बाँधा जिसने ये गुमान किया नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अल्लाह को देखा उसने अल्लाह पर बहुत बड़ा झूठ बाँधा। [सहीह मुस्लिम किताब उल इमान 177]
पहली हदीस ने नबी अलैहिस्सलाम ने इकरार किया मे अल्लाह को कैसे देख सकता हुँ वो नूर है।
दूसरी हदीस मे अम्मा आयशा ने कहा नबी अलैहिस्सलाम ने अल्लाह को नहीं देखा।
वाज़ेह हुआ क़ी नबी अलैहिस्सलाम ने अल्लाह को नहीं देखा।
3. उसूल ऐ हदीस
असल मे सब मसला जो खड़ा हुआ वो एक हदीस क़ी बुनियाद पर हुआ है वो हदीस मुलाहिज़ा फ़रमाए :-
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ حَدَّثَنَا مُعَاذُ بْنُ هِشَامٍ حَدَّثَنِي أَبِي عَنْ قَتَادَةَ عَنْ أَبِي قِلَابَةَ عَنْ خَالِدِ بْنِ اللَّجْلَاجِ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ أَتَانِي رَبِّي فِي أَحْسَنِ صُورَةٍ فَقَالَ يَا مُحَمَّدُ قُلْتُ لَبَّيْكَ رَبِّ وَسَعْدَيْكَ قَالَ فِيمَ يَخْتَصِمُ الْمَلَأُ الْأَعْلَى قُلْتُ رَبِّ لَا أَدْرِي فَوَضَعَ يَدَهُ بَيْنَ كَتِفَيَّ فَوَجَدْتُ بَرْدَهَا بَيْنَ ثَدْيَيَّ فَعَلِمْتُ مَا بَيْنَ الْمَشْرِقِ وَالْمَغْرِبِ فَقَالَ يَا مُحَمَّدُ فَقُلْتُ لَبَّيْكَ رَبِّ وَسَعْدَيْكَ قَالَ فِيمَ يَخْتَصِمُ الْمَلَأُ الْأَعْلَى قُلْتُ فِي الدَّرَجَاتِ وَالْكَفَّارَاتِ وَفِي نَقْلِ الْأَقْدَامِ إِلَى الْجَمَاعَاتِ وَإِسْبَاغِ الْوُضُوءِ فِي الْمَكْرُوهَاتِ وَانْتِظَارِ الصَّلَاةِ بَعْدَ الصَّلَاةِ وَمَنْ يُحَافِظْ عَلَيْهِنَّ عَاشَ بِخَيْرٍ وَمَاتَ بِخَيْرٍ وَكَانَ مِنْ ذُنُوبِهِ كَيَوْمِ وَلَدَتْهُ أُمُّهُ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ غَرِيبٌ مِنْ هَذَا الْوَجْهِ
सय्यदना मुआज़ रज़ि अन्हु बयान करते हैं कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया, मै रात को उठा मैंने वुज़ू किया और नमाज पढ़ी जितनी मेरे मुकद्दर में थी फिर मुझे नमाज में ऊँग आ गयीं।
अचानक मैंने अपने रब को सबसे अच्छी सूरत में देखा।
अल्लाह ने अपने हाथ मेरे दोनों कंधों के बीच रखें यहां तक कि मैंने इसकी ठंडक अपने सीने में महसूस की।
[तिरमिज़ी 3233 और मुसनद अहमद मे भी इसकी सनद मौजूद है ]
∎ मुसनद क़ी सनद ये रही,
حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ
حَدَّثَنَا مَعْمَرٌ
عَنْ أَيُّوبَ
عَنْ أَبِي قِلَابَةَ
عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ
∎ तिरमिज़ी क़ी सनद ये रही
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ حَدَّثَنَا مُعَاذُ بْنُ هِشَامٍ حَدَّثَنِي أَبِي عَنْ قَتَادَةَ عَنْ أَبِي قِلَابَةَ عَنْ خَالِدِ بْنِ اللَّجْلَاجِ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ
तिरमिज़ी मे सनद मे أَبِي قِلَابَةَ और इब्ने अब्बास के बीचे خَالِدِ بْنِ اللَّجْلَاجِ है।
इसको इमाम अलबानी ने मर्फू बयान किया है।
∎ लेकिन इनके बरअक्स शुएब अरनोत ने मुसनद क़ी तखरीज मे इसपे हुक्म लगाया कहा।
إسناده ضعيف، أبو قلابة- واسمه عبد الله بن زيد الجرمي- لم يسمع من ابن عباس، ثم إن فيه اضطراباً
सनद ज़इफ अबू क़िलाबा जिसका नाम अब्दुल्लाह बिन ज़ैद जुर्मी है इसका समा इब्ने अब्बास से साबित नहीं फिर रिवायत मे इज़तीराब बहुत है।
समा क्या होता है?
समा का माना होता है सुनना जब हम कहते है क़ी फलां से फलां से समा नहीं किया इसका मतलब होता है उसने उससे उस बात को सुना ही नहीं होता तो कैसे उसके हवाले से हदीस बयान कर देतें है
इज़तीराब क्या होता है?
जब एक ही हदीस दो या कई जगह आती है और एक ही वाक़िया कई तारीको से अलग अलग अल्फाज़ो मे बयान होता है उसको इज़तीराब कहते है और ऐसी हदीस को मुज़तरीब हदीस कहते हैं ये ज़इफ हदीस क़ी एक क़िस्म है।
जामे तिरमीज़ी क़ी भी हदीस सहीह नहीं, क्यूंकि खालिद क़ी मुलाक़ात इब्ने अब्बास से नहीं हुई उसने मुरसल हदीसे बयान करता था।
∎ तारीख़ ऐ इस्लाम मे इमाम ज़हबी फरमाते हैं,
وَقَدْ أَرْسَلَ عَنْ عُمَرَ، وَابْنِ عَبَّاسٍ
उमर और इब्ने अब्बास से इरसाल करता था।
दूसरी बात इमाम क़तादा मुदल्लिस हैं और इसमें वो अन से बयान कर रहे हैं।
किसी को तदलिस और मुदल्लिस जानना है तो वो मुझसे मेरा मुख़्तसर पीडीऍफ़ इस topic पर ले सकता है।
अल्लाह दीन समझने क़ी तौफ़ीक़ दे।
आमीन
आपके दीनी भाई
फैसल शेख
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