क्या नबी ﷺ का अज़ान मे नाम आते ही अंगूठे चूमना जाएज़ हैं?
अल्लाह तआला और उसके रसूल से मोहब्बत का तकाज़ा हैं कि उनकी इतआत क़ी जाये।
सय्यदना अबू बक्र सिद्दीक़ ने अपने पहले खुतबा मे इरशाद फरमाया था,
أطیعونی ما أطعت اللہ و رسولہ، فإذا عصیت اللہ و رسولہ فلا طاعۃ لی علیکم
"मेरी इतआत उस वक्त करना जब तक मैं अल्लाह और उसके रसूल की इतआत करूं, जब मैं अल्लाह और उसके रसूल की नाफरमानी करूं तो तुम्हारे ऊपर मेरी किसी क़िस्म क़ी कोई इतआत फर्ज़ नहीं।"
[सीरत इब्ने हिशाम 7/72 सनद हसन है ]
हमारा फर्ज बनता है क़ी ग़ुलु व तक़सीर से बचते हुए नबी ﷺ क़ी सुन्नतो को हरज़ूजान बनाए शरीयत के दायरे में रहते हुए नबी ﷺ की इज्जत व तोक़ीर बजा लाए,
हालिया फ़िरक़ा के लोगो ने ग़ुलु मे इंतहा कर दी नबी ﷺ क़ी सुन्नतो क़ी बजाये बिदअत का बाज़ार गर्म कर रखा हैं। इनकी जारी करदा बिदअत मे से एक बिदअत यह हैं के लोग नबी ﷺ का नाम इस्म ऐ ग्रामी सुनकर अंगूठे चुमते हैं।
इस पर कोई दलील नहीं अगर यह कोई नेकी का काम होता यह शरीयत कि रू से नबी ﷺ क़ी तोकीर होती तो सहाबा किराम और अइम्मा इज़ाम ज़रूर बिल ज़रूर इसका एहतमाम करते!
वह सबसे बढ़कर नबी ﷺ क़ी ताज़ीम करने वाले थे।
किसी सिक़ा इमाम से इसका जवाज़ या इसतहबाब (मुस्तहब ) साबित नहीं।
इसके बिदअत के सबूत पर बिदातियों के दलाईल का जाएज़ा लेते हैं-
दलील 01: सय्यदना अबू बक्र सिद्दीक़ के मुताल्लिक मुसनद उल फिरदोस अज़देलमी मे रिवायत हैं
أنّہ لمّا سمع قول المؤذّن: أشھد أنّ محمّدا رسول اللہ، قال ھذا، و قبّل باطن الأنملتین السبّابتین، ومسح عینیہ، فقال صلیّ اللہ علیہ وسلّم: من فعل مثل ما فعل خلیلی، فقد حلّت علیہ شفاعتی۔
जब आप ने मुअज़्ज़ीन को आशहदू अन्ना मुहम्मदन रसूलुल्लाह कहते सुना तो यही अल्फाज़ कहे और दोनों अंगश्त शहादत के पूरे जानिब ज़ेरे से चूम कर आँखों से लगाए। इस पर नबी अलैहिस्सलाम ने फ़रमाया जो ऐसा करें जैसा के मेरे प्यारे ने किया, उसके लिए मेरी शफ़ाअत हलाल हो जाये।
(अल मक़ासिदुल हसनातुस सखावी सफा 374)
तब्सिरह:
- यह रिवायत बे सनद होने क़ी वजह से मरदूद व बातिल है।
- इसके सहीह होने के मुद्दई पर सनद पेश करना ज़रूरी है।
- साथ साथ रावियों क़ी तोसीक और इत्तासाल सनद भी ज़रूरी है।
- यह बिदतियों क़ी शान है क़ी वो बग़ैर सनद से गुरेज़ करते है।
- फिर मज़े क़ी बात यह हैं क़ी हाफ़िज़ सखावी ने इस रिवायत ला सहीह (सहीह नहीं हैं ) कहा है।
दलील 02: सय्यदना ख़ज़र से रिवायत क़ी गयी है उन्होंने फ़रमाया:
"जो शख्स मुअज़्ज़ीन को आशहदू अन्ना मुहम्मदन रसूलुल्लाह के अल्फाज़ सुन कर मरहबा बि हुब्बी व क़ुररतू अयनी बिन अब्दुल्ला सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम कहे फिर दोनों अंगूठे चुम कर आँखों पे रखे उसकी आँखे कभी ना दुखे।"
(अल मक़ासिदुल हसनातुस सखावी सफा 375)
तब्सिरह:
यह बे सनद व बे सबूत रिवायत ज़इफ और बातिल है हाफ़िज़ सखावी इसको ज़िक्र करते हुए लिखते हैं:-
بسند فیہ مجاھیل مع انقطاعہ
यह ऐसी सनद है जिसमे कई मजहूल रावी हैं साथ साथ इंक़ता भी है।
इन रिवायात के मुताल्लिक उलेमा किराम क़ी आरा
अब इन रिवायात के मुताल्लिक उलेमा किराम क़ी आरा भी सुन लें :
1. इमाम सखावी लिखते हैं:
لا یصحّ فی المرفوع من کلّ ھذا شیء۔
(अल मक़ासिद उल हसनातूल लिस सखावी सफा 375)
2. मुल्ला अली क़ारी लिखते हैं:
کلّ مایروی فی ھذا، فلا یصحّ رفعہ البیّۃ۔
"इस बारें ने जितनी भी मरफू रिवायत हैं इनमे से कोई भी क़तन साबित नहीं।"
(अल मोज़ोंआत अल कुबरा लिल क़ारी हंफी सफा 210)
3. इब्ने आबिदीन हंफी नक्ल करते हैं:
لا یصحّ فی المرفوع من کلّ ھذا شیء۔
"इसमें से कोई सी मर्फू रिवायत साबित नहीं।"
(रद्द उल मुहतार ला इब्ने आबिदीन अल हंफी 1/293)
हम कहते है क़ी इन रीवायात के सहीह या ज़इफ होने का फैसला हम बाद मे करेंगे पहले इनकी सनदे पेश करके दिखाए, या ये बिदत करने वाले तस्लीम करें के इनका ये तरीका बे सनद है।
अल्लाह दीन समझने क़ी तौफीक दे।
आपका दीनी भाई
मुहम्मद
1 टिप्पणियाँ
Masaallah ap ache se din ki raah bata rahe h allha se ham hamesha duwa karte h allha hamko sahi din sikhne ki tofik de agr allha hamko is trh se har hakkikat se ru baru kare to ham sabko sirk se bacha le allhmdolliha
जवाब देंहटाएंकृपया कमेंट बॉक्स में कोई भी स्पैम लिंक न डालें।