Jahannum mein le jane wala amal kya hai?

Jahannum mein le jane wala amal kya hai?


सच और झूट (पार्ट 2)

सच और झूट पार्ट 1 में हमने सच बोलने के बारे में तफसील से जाना था और अब सच और झूट पार्ट 2 में हम झूट को तफसील से जानेंगे।


1. सच जन्नत में और झूट जहन्नम में लेकर जायेगा।

सच इंसान को नेकी और अच्छाई के रास्ते पर ले जाता है और झूट इंसान को नाफरमानी और जहन्नम के रास्ते पर ले जाता है। जब इंसान एक झूट बोलता है तो उस एक झूट को छुपाने की वजह से वह बहुत से झूट और बोलकर उस एक झूट को बचाता है और इंसान झूट बोलते बोलते अल्लाह की इतनी ज्यादा नाफरमानी कर देता है कि वह जहन्नम का ईंधन बन जाता है।


रसूल अल्लाह ﷺ ने फरमाया:

"सच नेकी और अच्छाई के रास्ते पर ले जाता है और नेकी जन्नत की तरफ ले जाती है। एक इंसान सच बोलता रहता है यहां तक कि वह अल्लाह के यहां सिद्दीक (सच्चा) लिख दिया जाता है।

और झूठ फिस्क (नाफरमानी) वा फिजूर की तरफ ले जाता है और फिस्क (नाफरमानी) वा फिजूर आग (जहन्नम) की तरफ ले जाता है और एक इंसान झूट बोलता रहता है यहां तक कि अल्लाह तआला के नजदीक झूठा (कज्जाब) लिख दिया जाता है।" [सहीह मुस्लिम : 6637]


रसूल अल्लाह ﷺ ने फरमाया:

"सच इख़्तियार करो वो नेकी के साथ होता है और वो दोनों (सच और नेकी और उन्हें इख़्तियार करने वाले) जन्नत में होंगे। और झूट से बच कर रहो वो गुनाह के साथ होता है और वो दोनों (झूट और गुनाह और उन्हें इख़्तियार करने वाले) जहन्नम में होंगे।" [इब्ने माजा : 3849]


रसूल अल्लाह ﷺ ने फरमाया:

“झूठ से बचो! बिलाशुबा झूठ गुनाह की तरफ ले जाता है, और गुनाह जहन्नुम में पहुंचाने वाला है।” [अबू दाऊद : 4989]


2. झूट बोलना मुनाफिकत की अलामत है।

मुनाफिक उस इंसान को कहते है जिसके दिल में कुछ हो और जुबान पर कुछ और। ऐसे इंसान के बारे में अल्लाह ने बताया कि मुनाफिक जहन्नम के सबसे नीचे होगा और उसे काफिर से भी ज्यादा अजा़ब दिया जायेगा। मुनाफिक की निशानी हमे नबी करीम ﷺ ने बताई है जिसमे से एक निशानी झूट बोलना है।


रसूल अल्लाह ﷺ ने फरमाया:

''मुनाफ़िक़ की तीन निशानियाँ हैं, 

1. जब बोलता है झूट बोलता है। 

2. जब वादा करता है ख़िलाफ़ करता है। और 

3. जब उसे अमीन बनाया जाता है तो ख़ियानत करता है।''

[सहीह बुखारी: 6095]


रसूल अल्लाह ﷺ ने फरमाया:

"चार आदतें जिस किसी में हों तो वो ख़ालिस मुनाफ़िक़ है और जिस किसी में इन चारों में से एक आदत हो तो वो (भी) निफ़ाक़ ही है जब तक उसे न छोड़ दे। (वो ये हैं) जब उसे अमीन बनाया जाए तो (अमानत में) ख़ियानत करे और बात करते वक़्त झूट बोले और जब (किसी से) अहद करे तो उसे पूरा न करे और जब (किसी से) लड़े तो गालियों पर उतर आए।" [सहीह बुखारी : 34]

इस हदीस से मालूम हुआ कि अगर किसी इंसान के अंदर झूट बोलने की आदत है तो वह एक चौथाई मुनाफिक है।


3. झूट बोलने वाले पर अल्लाह ने कुरान में लानत की है।

“बेशक झूठ बोलने वाले पर अल्लाह की लानत है।” [कुरान 3:61]


4. तिज़ारत में सच बोलने की अहमियत।

खरीदते या बेचते वक्त कोई ताजिर झूट बोलें तो कयामत के दिन वह गुनहगार की हैसियत से उठाया जाएगा।

हज़रत रिफ़ाआ से रिवायत है कि वो नबी अकरम (ﷺ) के साथ ईद गाह की तरफ़ निकले। आप ने लोगों को ख़रीद और बिक्री करते देखा तो फ़रमाया: "ऐ ताजिरों की जमाअत ! तो लोग रसूलुल्लाह (ﷺ) की बात सुनने लगे और उन्होंने आप की तरफ़ अपनी गर्दनें और निगाहें ऊँची कर लीं;

आप ﷺ ने फ़रमाया: "ताजिर लोग क़ियामत के दिन गुनहगार उठाए जाएँगे सिवाए उस के जो अल्लाह से डरे, नेक काम करे और सच बोले।" [जामे तिरमिजी : 1210]

अल्लाह उस ताजिर पर रहम नहीं करेगा जो अपना समान बेचते वक्त झूठी कसम खाता हो। क्योंकि रसूल अल्लाह ﷺ ने फरमाया:

तीन शख़्स ऐसे हैं कि अल्लाह क़ियामत के दिन उन को (नज़रे-रहमत और मुहब्बत से) नहीं देखेगा और न उनको पाक करेगा और उनके लिये तकलीफ़ देनेवाला अज़ाब होगा। 

1. वो शख़्स जो अपने अतिये पर एहसान जतलाता है, 

2. जो शख़्स अपना तहबंद लटकाता है और 

3. जो शख़्स झूट बोल कर अपना सामान बेचता है।

[सुनन निसाईं : 4464]


जहां तिजारत में झूट बोलने वाला अल्लाह के नजदीक गुनहगार है वही दूसरी तरफ अपनी तिजारत में सच बोलने वाले ताजिर की तिजारत में अल्लाह बरकत अता कर देता है।

रसूल अल्लाह ﷺ ने फरमाया:

"जिसने अपने माल की खामी को सच सच बता दिया तो अल्लाह उसकी तिजारत में बरकत अता कर देता है।" [सहीह बुखारी : 2079]


5. लोगों को हंसाने के लिए झूट बोलना कैसा है?

कुछ लोग सिर्फ दूसरों को हंसाने के लिए झूट बोल देते है और वह इस चीज को गुनाह भी नहीं समझते बल्कि नेकी समझते है और कहते है कि मेरे इस झूट बोलने की वजह से लोगों के चेहरे पर थोड़ी मुस्कान आई। 

जो लोग मजाक में भी झूट बोलें उनके बारे में नबी करीम ﷺ का फरमान सुन लिजिए:


रसूल अल्लाह ﷺ ने फरमाया: 

"हलाकत है उसके लिए जो इस गरज के लिए झूट बोले कि इससे लोग हंसें। हलाकत है उसके लिए! हलाकत है उसके लिए!" [अबु दाऊद : 4990]


रसूल अल्लाह ﷺ ने फरमाया: 

"मैं जमानत देता हूं एक महल की, जन्नत के दरमियान (center) में, उस शख्स के लिए जो झूट छोड़ दे अगरचे मज़ाक में ही हो।" [अबु दाऊद : 4800]

उपर बयान की गई हदीसों से हमे पता चला की मज़ाक में भी बोला गया झूट, झूट ही होता है। इसलिए इंसान को चाहिए की मज़ाक में भी झूट न बोले।


कही किसी को ये गलतफहमी न हो जाए कि क्या इस्लाम हमे मज़ाक करने की भी इजाजत नहीं देता? 

इसका जवाब यह है कि इस्लाम हमे मज़ाक करने से नहीं रोकता है बल्कि मज़ाक में भी झूट बोलने से रोकता है। हम बिना झूट बोल एक दूसरे से जायज मज़ाक कर सकते है। तो आइए अब हम देखते है कि नबी करीम ﷺ कैसे जायज मज़ाक किया करते थे जिसमे झूट भी नहीं होता था।


नबी करीम ﷺ के पास एक बूढ़ी औरत आई तो नबी करीम ﷺ उससे कहा की बूढ़ी औरतें जन्नत में नहीं जाएंगी। तो वह बूढ़ी औरत मायूस हो गई तो फिर नबी करीम ﷺ ने कहा कि जन्नत में बूढ़ा कोई नहीं होगा (लिहाज़ा बूढ़े इंसान जवान होकर जन्नत में जायेंगे)। इसपर नबी करीम ﷺ मुस्कुराए। [तखरीज मिश्कात उल मसाबिह 4814] 

नोट:- ये हदीस मुरसल है।


हज़रत अनस (रज़ी०) से मरवी है कि एक आदमी नबी करीम ﷺ के पास आया और कहने लगा: ऐ अल्लाह के रसूल ﷺ ! मुझे कोई सवारी इनायत फरमाएं तो नबी करीम ﷺ ने कहा: हम तुझे ऊंट का बच्चा दे देते है। वह बोला: में ऊंट के बच्चे का क्या करूंगा? तो नबी करीम ﷺ ने फरमाया: ऊंट को भी तो ऊंटनी जन्म देती है। (यानि हर ऊंट, ऊंटनी का बच्चा ही होता है।) [अबु दाऊद : 4998]

नोट: ये हदीस ज़ईफ है।


6. झूटी तारीफ करना या कराना कैसा है?

नबी करीम (सल्ल०) ने सुना कि एक शख़्स दूसरे शख़्स की तारीफ़ कर रहा है और तारीफ़ में बहुत मुबालग़ा से काम ले रहा था। तो नबी करीम (सल्ल०) ने फ़रमाया कि तुमने उसे हलाक कर दिया या (ये फ़रमाया कि) तुमने उस शख़्स की कमर को तोड़ दिया। [सहीह बुखारी : 6060]


7. जहन्नम में जाने की एक बड़ी वजह जुबान का गुनाह है।

रसूल अल्लाह ﷺ ने फरमाया:

"बहुत सारे लोग मुँह के बल जहन्नुम में फ़ेंक दिए जायेंगे, सिर्फ अपनी जबान (झूठ) कि वजह से।" [तिर्मिज़ी 2616] 


8. नबी करीम ﷺ के नाम पर झूट मंसूब करने वाले का ठिकाना जहन्नम है।

झूट बोलने से भी ज़्यादा बड़ा गुनाह ये है कि कोई इंसान नबी करीम ﷺ के नाम पर झूट बोलें। क्योंकि नबी करीम ﷺ अल्लाह की तरफ से पूरी कायनात के लिए रसूल (मैसेंजर) बनाकर भेजे गए है और अल्लाह ने उनके हक होने की निशानियां भी उनके साथ भेजी है। जिससे कोई इंसान भी उन निशानियों को देखकर उनके सच्चे रसूल होने का इकरार कर लेगा। और दुनिया में जो शख्स भी नबी करीम ﷺ को अल्लाह का रसूल मानता है तो वह उनकी बात को अल्लाह की ही बात मानता है।

अब अगर कोई शख्स नबी करीम ﷺ के नाम पर झूट बोलेगा तो दर हकीक़त वह अल्लाह के उपर भी झूट बांध रहा है। और अगर लोगों ने उसकी बात को सुनकर सच मान लिया तो उनके गुनाहों का भी जिम्मा इस झूट बांधने वाले के उपर आएगा। और इस्लाम में नबी करीम ﷺ की बात को एक कानून की हैसियत हासिल है। इसलिए ही नबी करीम ﷺ ने अपने नाम पर झूट मंसूब करने वाले का ठिकाना जहन्नम बताया है:-


रसूल अल्लाह ﷺ ने फरमाया: 

"मुझ पर झूट न बोलो, बेशक जिसने मुझ पर झूट बोला वो जहन्नम में दाख़िल होगा।" [सहीह मुस्लिम : 1]


रसूल अल्लाह ﷺ ने फरमाया: 

"जो शख़्स मुझ पर झूट बाँधेगा वो अपना ठिकाना जहन्नम में बना ले।" [सहीह बुखारी : 107]


9. सुनी सुनाई बात को आगे बयान करना भी झूट है।

अगर आप बिना तहकीक के हर सुनी सुनाई बात को आगे बयान की देते है तो ये इंसान के झूठा होने की अलामत है क्योंकि नबी करीम ﷺ ने फरमाया:

"किसी इंसान के झूठा होने के लिए यह काफी है कि वह हर सुनी सुनाई बातें बयान करें।" [सहीह मुस्लिम : 11]


10. झूट बोलकर किसी का माल खाना।

नबी करीम ﷺ ने फरमाया:

"जो शख़्स जान-बूझ कर इस नीयत से झूटी क़सम खाए कि इस तरह दूसरे के माल पर अपनी मिल्कियत जमाए तो वो अल्लाह तआला से इस हाल में मिलेगा कि अल्लाह तआला इस पर ग़ज़बनाक होगा।" [सहीह बुखारी : 2515]


11. झूठा ख्वाब बयान करना।

नबी करीम ﷺ ने फरमाया: 

"जिसने झूठा ख्वाब (सपना) बयान किया उसे कियामत के दिन जौ के दाने में गांठ लगाने को कहा जायेगा।" [मुसनद अहमद : 7828]

यानि झूठा ख्वाब बयान करने वाले से कियामत के दिन नामुमकिन काम करने को कहा जायेगा क्योंकि जौ के दाने में गांठ लगाना नामुमकिन है।


12. बदगुमानी भी झूट है।

नबी करीम ﷺ ने फरमाया:

"बदगुमानी (बहुत ज्यादा लोगों पर शक करने) से बचो, क्योंकि बदगुमानी सबसे बड़ा झूट है।" [अबु दाऊद : 4917]


13. झूट का आम होना कयामत की निशानी है।

नबी करीम ﷺ ने फरमाया:

"कयामत के नजदीक झूट बोलना आम बात हो जाएगी और बहुत ज्यादा झूट बोला जायेगा।" [अल सिलसिला सहीहा : 2714]


नबी करीम ﷺ ने फरमाया:

"मैं तुम्हें अपने सहाबा की पैरवी की वसीयत करता हूँ फिर उनके बाद आने वालों (यानी ताबेईन) की फिर उनके बाद आने वालों (यानी तबअ ताबेईन) की फिर झूट आम हो जाएगा यहाँ तक कि क़सम खिलाए बग़ैर आदमी क़सम खाएगा और गवाह गवाही तलब किये जाने से पहले ही गवाही देगा।" [जामे तिरमिजी : 2165]


नबी करीम ﷺ ने फरमाया:

"मेरे बाद कुछ झूठे, जालिम अमीर (हाकिम, जिम्मेदार) होंगे, जो कोई झूट और जुल्म में उनका साथ देगा उनका मुझसे और मेरा उनसे कोई ताल्लुक नहीं।" [सुनन निसाई : 4212]


14. झूट बोलने वाले पर अजाब।

झूट बोलने वाले को आखिरत की जिंदगी में अजाब दिया जायेगा, जिसकी तफसील हमे नबी करीम ﷺ ने कुछ इस तरह बताई है:

नबी करीम (ﷺ) नमाज़ (फ़ज्र) पढ़ने के बाद (आम तौर पर) हमारी तरफ़ मुँह करके बैठ जाते और पूछते कि आज रात किसी ने कोई ख़्वाब देखा हो तो बयान करो। रावी ने कहा कि अगर किसी ने कोई ख़्वाब देखा होता तो उसे वो बयान कर देता और आप (ﷺ) उसकी तअबीर अल्लाह को जो मंज़ूर होती बयान फ़रमाते। एक दिन आप (ﷺ) ने मअमूल के मुताबिक़ हम से पूछा: क्या आज रात किसी ने तुममें कोई ख़्वाब देखा है? 

हमने कहा कि किसी ने नहीं देखा। 

आप (ﷺ) ने फ़रमाया, लेकिन मैंने आज रात एक ख़्वाब देखा है कि दो आदमी मेरे पास आए। उन्होंने मेरे हाथ थाम लिये और वो मुझे ज़मीने-मुक़द्दस की तरफ़ ले गए। (और वहाँ से आलमे-बाला की मुझको सैर कराई) वहाँ क्या देखता हूँ कि एक शख़्स बैठा हुआ है और एक शख़्स खड़ा है और उसके हाथ में लोहे का आँकड़ा था जिसे वो बैठने वाले के जबड़े में डाल कर उसके सिर के पीछे तक चीर देता। फिर दूसरे जबड़े के साथ भी इसी तरह करता था। इस दौरान में उसका पहला जबड़ा सही और अपनी असली हालत पर आ जाता और फिर पहले की तरह वो उसे दोबारा चीरता। 

मैंने पूछा कि ये क्या हो रहा है? क्या जो कुछ मैंने देखा उसकी तफ़सील भी कुछ बतलाओगे? 

उन्होंने कहा, हाँ वो जो आपने देखा था उस आदमी का जबड़ा लोहे के आँकड़े से फाड़ा जा रहा था। तो वो झूटा आदमी था जो झूटी बातें बयान किया करता था। उससे वो झूटी बातें दूसरे लोग सुनते। इस तरह एक झूटी बात दूर दूर तक फैल जाया करती थी। उसे क़ियामत तक यही अज़ाब होता रहेगा। 

[सहीह बुखारी : 1386]


15. तीन जगह जहां झूट बोलना जायज है

नबी करीम ﷺ ने सिर्फ तीन जगह झूट बोलने की इजाजत दी है। 

नबी करीम ﷺ ने फरमाया: मैं ऐसे इंसान को झूठा शुमार नहीं करता:

1. जो लोगों में सुलह कराने के गर्ज से कोई बात बनाता हो। और उसका मकसद सिवाए सुलह और इस्लाह के कुछ न हो।

2. और जो शख्स लड़ाई (जंग) में कोई बात बनाए।

3. और जो शौहर अपनी बीवी से या बीवी अपने शौहर के सामने कोई बात बनाए।

[अबु दाऊद : 4921]


इस हदीस से मालूम हुआ कि सिर्फ तीन जगह ही इंसान के लिए झूट बोलना जायज है:

पहला: दो मुस्लिम लोगों या गिरोह के दरमियान सुलह कराने के लिए अगर कोई शख्स अपनी तरफ से कोई बात बनाकर कह देता है जिससे की उन लोगों के दरमियान का झगड़ा खत्म हो जाए तो ये झूट बोलना जायज है। और दो लोगों के दरमियान सुलह कराने पर सवाब भी मिलेगा इंशा अल्लाह।

दूसरा: हालत जंग में झूट बोलना जायज है क्योंकि अगर मुसलमान गिरोह का कोई एक सिपाही को दुश्मन पकड़ ले तो वह उनको धोखा देने के लिए झूट बोल सकता है क्योंकि उनको सच बताने से मुसलमानों के गिरोह को नुकसान हो सकता है। और मैदान ए जंग में दुश्मन को धोखा देने के लिए भी झूट बोल सकते है।

तीसरा: शौहर और बीवी आपस में एक दूसरे को खुश करने के लिए झूट बोल सकते है। ताकि उनके दरमियान का रिश्ता बेहतर और खुशगवार रहे। यहां यह बात ध्यान रहे की शौहर और बीवी का मकसद एक दूसरे को धोखा देने का न हो बल्कि सिर्फ एक दूसरे की दिल जोई मकसद हो यानी खुश करना। अगर कोई धोखा देने की नियत से झूट बोल रहा है तो ये बिलकुल नजाइज और हराम है और वह झूट बोलने वाला अल्लाह की तरफ से सजा का मुस्तहिक होगा।


अल्लाह हम सबको सच बोलने वाला बनाये और ऐ अल्लाह हम झूट से तेरी पनाह में आते है। ऐ हमारे रब हमारा नाम सच्चों में लिख दें और जन्नत की राहें हमारे लिए आसान कर। आमीन!


आपकी दीनी बहन
निशा यासीन

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