खुत्बा ए हज्जातुल विदाअ
जब दावत और तबलीग़ का काम पूरा हो गया और हज़रत मुहम्मद रसूल अल्लाह ﷺ की रिसालत की बुनियाद पर एक नये मुआशरे की तामीर व तशकील अमल में आ गई तो ग़ैबी हातिफ़ (ग़ैबी आवाज़) से नबी ﷺ को ये अदांज़ा हो गया था अब दुनिया में आप ﷺ के क़याम का वक़्त खत्म होने वाला है।
इस्लामी तारीख में मशहूर आख़िरी खुत्बा 9 ज़िलहिजजा को अरफा में दिया गया।
हज के दिन हुजूर अक़्दस सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अरफा तशरीफ लाए और आप ﷺ ने वहाँ कयाम फ़रमाया। जब सूरज ढलने लगा तो आपने कसवा (अपनी ऊंटनी) को लाने का हुक्म दिया। ऊंटनी तैयार करके हाज़िर की गई, तो आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम उस पर सवार होकर बतन ए वादी में तशरीफ़ फ़मां हुऐ और अपना वह खुत्बा इरशाद फ़रमाया जिसमें दीन के अहम उमूर बयान फरमाए।
आप ﷺ ने ख़ुदा की हम्द व सना करते हुए खुत्बे की यूं इब्तदा फ़रमाई–
ख़ुदा के सिवा कोई और माबूद नहीं है। वह यक्तां है, कोई उसका शरीक नहीं, ख़ुदा ने अपना वादा पूरा किया उसने अपने बन्दे (रसूल) की मदद फ़रमाई और तन्हा उसी की ज़ात ने बातिल की सारी मुज्तमा (Community) कुव्वतों को ज़ेर किया।
1. हम नहीं जानते कि हम कब मरने वाले हैं।
2. फज़ीलत व बरतरी
ऐ लोगो! अल्लाह करीम का इरशाद है कि "इन्सानों! हमने तुम सबको एक ही मर्द व औरत से पैदा किया है और तुम्हें जमाअतों और क़बीलों में बांट दिया कि तुम अलग अलग पहचाने जा सको। तुम में ज्यादा इज्जत व करामत वाला खुदा की नज़रों में वही है जो ख़ुदा से ज़्यादा डरने वाला है।" [सूरह हुजरात 13]
चुनांचे इस आयत की रोशनी में न किसी अरबी को अजमी पर कोई फौकीयत हासिल है न किसी अजमी को किसी अरबी पर, न काला गोरे से अफज़ल है न गोरा काले से। हाँ, बुजुर्गी और फजीलत का कोई मैयार है तो वह तकवा है।
इन्सान सारे ही हज़रत आदम अलैहिस्सलाम की औलाद हैं और हज़रत आदम अलै. की हकीकत इसके सिवा क्या है कि वह मिट्टी से बनाए गए। अब फज़ीलत व बरतरी के सारे दावे, ख़ून व माल के सारे मुतालबे और सारे इन्तकाम मेरे पांव तले रौंदे जा चुके हैं बस बैतुल्लाह की तौलियत (निगरानी) और हाजियों को पानी पिलाने की खिदमत अला हाल ही बाकी रहेंगी।
[अबू दाऊद 4588; सहीह अत तरग़ीब 2964, इमाम अल्बानी]
3. जान, माल और इज्जत की कद्र करो
यक़ीनन तुम्हारी जानें और तुम्हारे माल और तुम्हारी आबरू तुम्हारे दरमियान उसी तरह हराम है जिस तरह आज के दिन की हुरमत तुम्हारे इस महीने और इस शहर में है, पस जो शख़्स हाज़िर है उसे चाहिए की ग़ायब(जो हाजिर नहीं है) ये बात पहुँचा दे क्योंकि ऐसा मुमकिन है की जो शख़्स यहाँ मौजूद है वो ऐसे शख़्स को ये ख़बर पहुँचाए जो उससे ज़्यादा [हदीस का] याद रखने वाला हो। [सहीह बुखारी 67]ख़बरदार! जुर्म करने वाले का वबाल खुद उसी पर है। खबरदार! बाप के कुसूर की पकड़ बेटे से और बेटे के कुसूर की पकड़ बाप से न होगी। शैतान को अब इस बात की कोई तवक्को नहीं रह गई कि अब उसकी इस शहर में इबादत की जाएगी लेकिन इसका इमकान है कि ऐसे मामलात में जिन्हें तुम कम अहमियत देते हो उसकी बात मान ली जाए और वह उसी पर राजी है इसलिए तुम उससे अपने दीन व ईमान की हिफाज़त करना। [ तिर्मिज़ी 2159, सहीह]
4. औरतों के लिए वसीयत
देखो! तुम्हारे ऊपर तुम्हारी औरतों के कुछ हुकूक हैं उसी तरह उन पर तुम्हारे हुकूक वाजिब हैं औरतों पर तुम्हारा यह हक हैं कि वह अपने पास किसी ऐसे शख्स को न बुलाऐं जिसे तुम पसन्द नहीं करते और वह कोई खयानत न करे। कोई काम खुली बेहयाई का न करें और अगर वह ऐसा करें तो ख़ुदा की जानिब से इसकी इजाजत है कि तुम उन्हें मामूली जिस्मानी सज़ा दो और वह बाज़ आ जाये तो उन्हें अच्छी तरह खिलाओ, पहनाओ। औरतों से बेहतर सुलूक करो क्योंकि वह तुम्हारी पाबन्द हैं और खुद अपने लिए वह कुछ नहीं कर सकती।
चुनांचे उनके बारे में ख़ुदा का लिहाज रखो कि तुमने उन्हें खुदा के नाम पर हासिल किया और उसी के नाम पर वह तुम्हारे लिए हलाल हुई। [सहीह मुस्लिम 1218]
5. दौर ए जाहिलियत का खात्मा
दौरे जाहीलियत का सब कुछ मैंने अपने पैरों से रौंद दिया। ज़मानाए जाहीलियत के ख़ून के सारे इंतकाम अब कलअदम हैं पहला इंतकाम जिसे मैं कलअदम करार देता हूँ मेरे अपने खानदान का है रबीआ इब्न हारिस के दूध पीते बेटे का ख़ून जिसे बनू हुज़ैल ने मार डाला था अब मैं माफ करता हूँ। सूद जिसे मैं छोड़ता हूँ अब्बास इब्न अब्दुल मुत्तलिब के खानदान का सूद है अब ये खत्म हो गया। [सहीह मुस्लिम 1218]
6. आमाल की बाज़पुर्सी
ऐ कुरैश के लोगो! ऐसा न हो कि ख़ुदा के हुजूर तुम इस तरह आओ कि तुम्हारी गर्दनों पर तो दुनिया का बोझ लदा हो और दूसरे लोग सामाने आख़िरत लेकर पहुंचें और अगर ऐसा हुआ तो मैं ख़ुदा के सामने तुम्हारे कुछ काम न आ सकूंगा।
कुरैश के लोगो ! खुदा ने तुम्हारी झूठी नखुव्वत (घमंड) को खत्म कर डाला और बाज़ कारनामो पर तुम्हारे फख्र व मुबाहात (बड़ाई,शेखी) की कोई गुन्जाइश नहीं। लोगो ! तुम्हारे खून व माल और इज़्ज़ते एक दूसरे पर कतअन हराम कर दी गई, हमेशा के लिए इन चीजों की अहमियत ऐसी ही हैं जैसी तुम्हारे इस दिन की और माहे मुबारक (जिलहिज्जह) की खासकर इस शहर में है तुम सब ख़ुदा के आगे जाओगे। और वह तुमसे तुम्हारे आमाल की बाजपुर्स फरमाएगा।
देखो कहीं मेरे बाद गुमराह न हो जाना कि आपस ही में कुश्त व खून करने लगो।
[सहीह बुखारी 4406]
7. जन्नत में दाखिल करने वाली बातें
ऐ लोगो! अपने रब की इबादत करो, पांच वक्त की नमाज अदा करो, रमजान में महीने भर के रोजे रखो, अपने मालों की जकात खुश दिली के साथ देते रहो, अपने ख़ुदा के घर का हज करो और अपने अहल ए अमर की इताअत करो तो अपने रब की जन्नत में दाखिल हो जाओगे। [तिर्मिज़ी 2616]
7.1. मुस्लिम हुक्मरान की इताअत
अगर तुम पर एक गुलाम को अमीर (हाकिम) बना दिया जाये जो तुम्हे अल्लाह की किताब (शरियत इस्लामिया) मुताबिक़ चलाये उसकी बात सुनो और इताअत करो। [मुस्लिम 1838]
7.2. वालिदैन और क़राबतदारों के हुक़ूक़
किसी के लिए यह जायज़ नहीं है कि वह अपने भाई से कुछ ले, सिवाए उसके जिस पर उसका भाई राज़ी हो और खुशी खुशी दें। खुद पर और एक दूसरे पर ज्यादती न करो।
औरत के लिए यह जाएज़ नहीं कि वह अपने शौहर का माल उसकी बगैर इजाज़त किसी को दे। [अबू दाऊद 3547]
लोगो! ख़ुदा ने हर हकदार को उसका हक़ खुद दे दिया अब कोई किसी वारिस के हक के लिए वसियत न करे। [सहीह बुखारी 2738]
7.3. गुलाम के साथ हुस्न ए सुलूक
अपने गुलामों का ख्याल रखो, हाँ, गुलामों का ख्याल रखो उन्हें वही खिलाओ जो खुद खाते हो, ऐसा ही पहनाओ जैसा तुम पहनते हो। और अल्लाह तआला की पैदा की हुई चीज़ों पर ज़ुल्म न करो। [अल-अदब अल-मुफ़रद 188, सहीह अलबनी]
8. क़र्ज़ की अदायगी और हदिया
कर्ज काबिल ए अदाएगी है। आरियतन ( कुछ वक्त इस्तेमाल के लिए) ली हुई चीज़ वापस करनी चाहिए। [सहीह बुखारी 2305]
तोहफे का बदला देना चाहिए और जो कोई किसी का जामिन बने वह तावान (fine) अदा करे। [सहीह बुखारी 2585]
अगर किसी के पास अमानत रखवाई जाए तो वह इस बात का पाबन्द रहे कि अमानत रखवाने वाले को अमानत पहुंचा दे। [सहीह अत तरग़ीब 3004]
9. हराम काम की सज़ा
बच्चा उसी की तरफ मन्सूब किया जाएगा जिसके बिस्तर पर वह पैदा हुआ। जिस पर हराम कारी साबित हो उसकी सजा पत्थर है हिसाब व किताब ख़ुदा के यहाँ होगा। [सहीह बुखारी 2218]
जो कोई अपना नसब बदलेगा या कोई गुलाम अपने आका के मुकाबले में किसी और को अपना आका जाहिर करेगा, उस पर अल्लाह करीम की लानत। [सहीह बुखारी 3508]
10. कुरान व सुन्नत की पैरवी
लोगो! मेरी बात समझ लो कि मैंने हक तब्लीग अदा कर दिया। मैं तुम्हारे दरमियान एक ऐसी चीज़ छोड़े जाता हूँ कि तुम कभी गुमराह न हो सकोगे, अगर उस पर कायम रहे और वह ख़ुदा की किताब है। [मुवत्ता इमाम मालिक vol. 02 पेज 899]
अल्लाह की किताब जिस में हिदायत और नूर है, जिसने इसको मजबूती से थाम लिया और उसे ले लिया वो हिदायत पर होगा और जो उससे हट गया वो गुमराह हो जायेगा [सहीह मुस्लिम 6225]
और हाँ, देखो दीनी मामलात में गुलू से बचना कि तुम से पहले के लोग इन्हीं बातों के सबब हलाक कर दिए गए। [सहीह बुखारी 6830]
और लोगों ! तुम से मेरे बारे में (ख़ुदा के यहाँ) सवाल किया जाएगा, बताओ, तुम क्या जवाब दोगे? लोगो ने जवाब दिया कि हम इस बात की शहादत देंगें कि आप ﷺ ने अमानत (दीन) पहुंचा दी और आप ﷺ ने हक ए रिसालत अदा फरमा दिया और हमारी खैर ख़्वाही फरमाई। यह सुनकर हुजूर ﷺ ने अपनी शहादत की उंगली आसमान की तरफ उठाई और लोगों की जानिब इशारा करते हुए तीन मर्तबा इरशाद फ़रमाया खुदाया गवाह रहना! खुदाया गवाह रहना! खुदाया गवाह रहना! [इब्न माजह 3058]जब आप ﷺ ख़ुत्बा से फारिग़ हो चुके तो अल्लाह ताला ने आयत नाज़िल फरमाई:
"आज मैंने तुम्हारे दीन को तुम्हारे लिये मुकम्मल कर दिया है और अपनी नेमत तुम पर पूरी कर दी है और तुम्हारे लिये इस्लाम को तुम्हारे दीन की हैसियत से क़बूल कर लिया है।" [सूरह माईदा: 3]
2 टिप्पणियाँ
Subhan allah
जवाब देंहटाएंमुस्लिम के काम है जो करने हैं और हम नहीं करते।
जवाब देंहटाएंकृपया कमेंट बॉक्स में कोई भी स्पैम लिंक न डालें।